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क्या होता है नारको टेस्ट (narco test)और कैसे किया जाता है

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हमारे देश में अपराधियों की संख्या में तो अनवरत वृद्धि होती ही जा रही है । जहां देखो वहां  भ्रष्टाचार लूट हत्या लोगों का काम हो गया है। दोस्तों कुछ अपराधी ऐसे होते हैं जो किसी भी कीमत पर अपना अपराध स्वीकार ही नहीं करते। ऐसे लोग इतने गंभीर किस्म के अपराधी होते हैं कि उन्हें पुलिस कितना भी मारती है पर वह सत्य को जुबान पर नहीं आने  देते । ऐसे लोगों से पुलिस बेहद खतरनाक  तरीकों को अपनाकर सच्चाई उगलवाने का प्रयास करती है, पर जब कोई अपराधी पुलिस के तमाम कोशिशों के बावजूद सच्चाई नहीं बताता और वह सही सही जानकारी देने से मना कर देता है तो नारको टेस्ट(narco test) की सहायता से उससे सच्चाई उगलवाई  जाती है। इस टेस्ट को आमतौर पर अपराधियों से सच उगलवाने के लिए ही किया जाता है। सामान्यता पाया गया है कि सीबीआई जांच की प्रक्रिया में भी नारको टेस्ट(narco test) की सहायता ली जाती है, परंतु यह  कोई आवश्यक नहीं है कि इस  प्रक्रिया में अपराधी सब कुछ सच-सच ही बता दे । कई गंभीर अपराधी  बच निकलते हैं तथा सच नहीं बोलते ।परन्तु यह टेस्ट  काफी हद तक सफल होता है। इसमें व्यक्ति को ट्रुथ सीरम इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है। नारको टेस्ट(narco test) एक  फॉरेंसिक टेस्ट है जो इन्वेस्टीगेशन अधिकारी, डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट और फॉरेंसिक एक्सपर्ट  की उपस्थिति में किया जाता है ।
 किस प्रकार किया जाता है नारको टेस्ट(narco test) –
इस टेस्ट में व्यक्ति को ट्रुथ ड्रग नाम की  एक साइको एक्टिव दवा दी जाती है या सोडियम पेंटोथाल का इंजेक्शन लगाया जाता है। दवा का असर होते ही अपराधी व्यक्ति को नींद आने लगती है, जिस कारण उसके मस्तिष्क का शीघ्र  प्रतिक्रिया  देने वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है ।ऐसी परिस्थिति में उसके पास ज्यादा  समझने, सोचने की क्षमता नहीं रहती। उस समय वह ऐसी बेहोशी की स्थिति में होता है कि वह पूछें जा रहे प्रश्नों का उत्तर घुमा-फिराकर नहीं दे पाता है तथा अधिकतर प्रश्नों का उत्तर सीधा सही और सटीक देता है।
  जब नारको टेस्ट(narco test) के लिए किसी अपराधी को ले जाया जाता है तो व्यक्ति को दवा देने से पहले ठीक प्रकार से शारीरिक परीक्षण किया जाता है ।दवा को देते समय बहुत बारीकी से ध्यान दिया जाता है ।उसके सेहत, उम्र व लिंग के आधार पर ही यह  दवा दी जाती है ।हालांकि यह जोखिमों से भरा होता है, क्योंकि यदि नारको टेस्ट(narco test) के दौरान उस व्यक्ति को अधिक मात्रा में दवा दे दिया जाए तो वह कोमा की स्थिति में पहुंच सकता है या फिर उसकी मौत भी हो सकती है ।
 हालांकि जाना जाता है कि व्यक्ति नार्को टेस्ट (narco test)में बहुत कुछ सही-सही बता देता है लेकिन बेहोशी की हालत में कभी-कभी अपराधी झूठ भी बोल सकता है तथा प्रश्न पूछने वाले को घूमाकर भी कर उत्तर दें सकता है।

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