आप भी जाने वह 6 चीजें जो हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते

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 हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते
आप भी जाने वह 6 चीजें जो हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते————–
 हमारा देश ऋषि मुनियों का देश रहा है। समय-समय पर इस धरती पर ऋषि-मुनि अवतरित होते रहे हैं तथा भारत की धरती को ज्ञान की आलोक से आलोकिक करते रहे हैं । ऋषि मुनियों ने अपने जीवन में बहुत सारे शोध कार्य किए तथा मनुष्य के लिए उपयोगी ज्ञान छोड़कर गए, जो हमारे ग्रंथों में आज भी सुनहरे अक्षरों में विराजमान है। ग्रंथों में से एक ग्रंथ है आचार्य शुक्राचार्य की नीति। आज हम आपको ऐसे 6 चीजों के बारे में बताएंगे जो हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते हैं। जिसका वर्णन शुक्राचार्य नीति में मिलता है तो आइए जानते हैं।
तो चलिए आप भी जाने वह 6 चीजें जो हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते————–
 (1)  सत्ता या अधिकार
बहुत से लोगों को सत्ता या अधिकार पाने की लालसा होती है अथवा वे सत्ता या अधिकार पर काबिज होते हैं। ऐसे लोगों की हार्दिक इच्छा होती है कि उन्हें जो पद वह अधिकार मिला है वह पूरे जीवन उनके साथ रहे। परंतु वास्तव में ऐसा हो पाना किसी भी हाल में मुमकिन नहीं होता है। सत्ता और अधिकारों का परिवर्तन भी प्रकृति के परिवर्तन के नियमों के अंतर्गत ही आता है। अतः सत्ता या अधिकारों का परिवर्तन भी समय-समय पर होता रहता है। अतः अपने वर्तमान सत्ता व अधिकार को हमेशा भोगते रहने की इच्छा अपने मन में कभी नहीं आने देनी चाहिए।
 ( 2 )  परछाई
  मनुष्य की परछाई भी मनुष्य का हमेशा साथ नहीं देती। यह तब तक साथ देती है जब तक की मनुष्य धूप में चलता है। जब अंधकार आता है तो परछाई भी साथ छोड़ देती है । अतः अपनी जब छाया नहीं साथ देती तो दूसरे लोगों से भी साथ की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
 ( 3 ) धन-संपत्ति
   दुनिया के सभी मनुष्यों को धन-संपत्ति की चाहत होती है। सभी लोग यह मानते हैं कि दुनिया की सभी सुख सुविधाओं को मात्र धन के द्वारा ही पाया जा सकता है। अधिकतर लोग ऐसे में धन से बहुत ही प्रेम करने लगते हैं, जो कि सही मायनों में ठीक नहीं होता। क्योंकि मन की तरह ही धन भी बहुत चंचल स्वभाव वाला होता है। ऐसे में वह किसी एक जगह अथवा किसी एक के पास हर समय के लिए नहीं टिकता। यही वजह है कि वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए धन से अधिक प्रेम नहीं करना चाहिए और उस से मोह नहीं बांधने चाहिए।
 ( 4 ) जीवन
 जन्म और मृत्यु मनुष्य की एक निश्चित प्रक्रिया है। जो भी लोग इस धरती पर जन्म लेते हैं उनकी मृत्यु भी निश्चित होती है । मनुष्य चाहे कितनी भी पूजा-अर्चना करें अथवा औषधियों का सहारा लें। परंतु एक समय के पश्चात उसकी मृत्यु निश्चित होती है। इस धरती पर कोई भी मनुष्य अमर होकर जन्म नहीं लेता। अतः अपने अथवा किसी प्रिय के जीवन से मोह करना भी ठीक नहीं होता ।
(5)  मन
 दुनिया के प्रत्येक मनुष्य का मन बहुत ही चंचल स्वभाव का होता है। मनुष्य के मन की प्रकृति ही ऐसी होती है। ऐसे में बहुत से लोगों की यह ख्वाहिश होती है कि वह अपने मन को वश में  कर ले। परंतु कभी ना कभी व्यक्ति का मन उसके बस से बाहर हो ही जाता है। ऐसे में ऐसी भूल भी हो जाती है जो नहीं होनी चाहिए। सभी लोगों का मन अलग-अलग विषयों में लगा रहता है। यह सत्य है कि मन को वश में करना बड़ा ही कठिन कार्य है। परंतु योग व ध्यान का सहारा लेकर काफी हद तक मन पर काबू पाया जा सकता है। इस पर किसी ने सच ही कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने मन पर काबू कर ले तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता ।
(6) योवन और रूप
अपने यौवन तथा रूप की सुंदरता को कायम रखने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं? लोग इसके लिए महंगे-महंगे क्रीम लगाते हैं तथा ब्यूटी पार्लर में बहुत सारा धन खर्च कर देते हैं। परंतु कुदरत के नियमानुसार प्रत्येक आदमी का युवावस्था उसका साथ एक ना एक दिन छोड़ ही देता है। आदमी युवा दिखने के लिए चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले परंतु वृद्धावस्था एक ना एक दिन आनी ही है।

तो दोस्तों आपको पता चल ही गया होगा कि कौन सी है वह चीजें जो हमारा होते हुए भी हमारा कभी साथ नहीं देते ।