द्रोपदी ने बताए थे सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह सूत्र, क्या आपको भी पता है?

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द्रोपदी

 महाभारत की कथा के बारे में तो आप जानते ही होंगे। आज भी लोग महाभारत की कथा से ज्ञान लेते हैं। पूरी महाभारत की घटना लालच, ईर्ष्या, युद्ध और प्रतिशोध के इर्द-गिर्द घटित हुई थी। Mahabharat के कथा के दौर में और भी छोटी-छोटी घटनाएं हुई थी जिस पर शायद हमारा ध्यान नहीं जाता। द्रोपदी का विवाह अर्जुन से हुआ था, परंतु माता कुंती की बात न टाल पाने के कारण द्रोपदी पांचों भाइयों की पत्नी बन गई । तब पांचों पांडवों ने द्रोपदी को अपनी पत्नी के रुप में स्वीकार कर लिया था। तत्पश्चात द्रोपदी जीवनभर पांचों पांडवों की पत्नी बन कर रही।
 ऐसे में वेद व्यास जी ने इस विवाह को लेकर कुछ शर्त निश्चित किया था। द्रोपदी समेत सभी पांडवों के लिए जिसका पालन करना अनिवार्य था। तो आगे मैं जो आपसे बताने जा रहा हूं वह सारी बातें द्रौपदी और पांडवों से संबंधित है। तो चलिए जानते हैं।
  वनवास काल में सभी पांडव तथा द्रोपदी पेेेेड के नीचे आराम कर रहे थे। उस समय भगवान श्री कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ वहां पहुंचे। तब भगवान श्री कृष्ण पांडवों के साथ वार्तालाप करने लगे तभी श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा और द्रोपदी उनसे अलग जाकर बातचीत करने के उद्देश्य से बैठ गई और बातचीत करने लगी। उस समय बात करते-करते सत्यभामा ने द्रोपदी से पूछा था कि वह किस प्रकार से अपने सभी पतियों को सामान्य रूप से जोड़ कर रखती है और किस प्रकार से अपने पांचों पतियों को एक अच्छा दांपत्य जीवन दे पाती है। उसी समय द्रोपदी ने सत्यभामा को उत्तर देते हुए सफल वैवाहिक जीवन के कुछ सूत्र बताए थे। शायद जिसे जानने की जिज्ञासा आपको भी होगी तो चलिए हम आपको बताते हैं क्या थे वह सुत्र?
  द्रौपदी ने सत्यभामा को बताया था कि स्त्री को अपने पति पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बहुत सी स्त्रियां अपने पति पर नियंत्रण रखना चाहती हैं परंतु ऐसा करने पर निश्चित ही उनके दांपत्य जीवन और संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  द्रोपदी ने कहा था कि पति के साथ साथ पति के परिवार के आवश्यकताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। जो स्त्रियां अपने पति के साथ साथ परिवार वालों का भी ख्याल रखती हैं उनका जीवन सुखमय होता है।
  द्रोपदी ने यह भी कहा था कि यदि पति पत्नी खुशहाल और सुखी रहना चाहते हैं तो दोनों के मध्य ईर्ष्या जैसी कोई भावना नहीं होनी चाहिए। यहां पर इर्ष्या और अहंकार को संबंध से परे रखना चाहिए तथा दोनों को ही एक दूसरे के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध  होना चाहिए।
  अगर पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखेंगे तो प्रेम और भी प्रगाढ़ होगा और संबंध की डोर और भी मजबूत होगी। द्रोपदी ने बताया था कि विवाह के पश्चात किसी भी गैर व्यक्ति से खुलकर बातचीत नहीं करनी चाहिए तथा अपने क्रोध पर भी नियंत्रण रखनी चाहिए। जो महिलाएं इस प्रकार से कर्तव्यों को अंजाम देती हैं समाज में उनकी छवि खराब हो जाती है। ऐसा करने से स्त्रियों को बचना चाहिए।