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निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये 4 काम 

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निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये
निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये 4 काम 
 शास्त्रों और पुराणों में कई तरह के तौर तरीकों का जिक्र किया गया है। जिसका मनुष्य को सदैव पालन करना चाहिए। और इन तरीकों को अपनाकर अपने जीवन को सही तथा सुलभता सेे जिया जा सकता है। हमारे पुराणों तथा शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को क्या करना चाहिए? क्या खाना चाहिए अथवा क्या नहीं? तथा यह भी बताया गया है कि वस्त्र धारण में किन किन नियमों का पालन करना चाहिए? विष्णु पुराण में ऐसे ही कुछ नियमों के बारे में बताया गया है। दरअसल हमारे दिनचर्या से हमारे ऊर्जा पर भी प्रभाव पड़ता है। अतः दिनचर्या हमेशा शुद्ध, पवित्र व नियमबद्ध होना चाहिए। तो चलिए शास्त्रों में लिखी कुछ नियमों के बारे में चर्चा करते हैं।
निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये 4 काम 
  विष्णु पुराण में बताया गया है कि किसी भी मनुष्य को तीन समय पर निर्वस्त्र रहने से बचना चाहिए ।
निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये 4 काम 
 विष्णु पुराण के मुताबिक रात को सोते समय मनुष्य को निर्वस्त्र नहीं रहना चाहिए। इस प्रकार की गलती करने से रात्रि के देवता चंद्रमा का अपमान होता है। ऐसा भी माना जाता है कि  पितृ गण अपने परिजनों  को देखने के लिए रात के समय आते रहते हैं। अतः ऐसे समय में अपने परिजनों को निर्वस्त्र अवस्था में देखकर उन्हें कष्ट होता है।
  विष्णु पुराण के बारहवें अध्याय में यह बताया गया है कि  स्नान करते समय मनुष्य को निर्वस्त्र नहीं होना चाहिए। इसका संबंध भगवान श्री कृष्ण के बालकांड से है जब गोपियां निर्वस्त्र होकर नदी में स्नान कर रही थी तब भगवान श्री कृष्ण गोपियों का वस्त्र लेकर भाग जाते हैं। अतः श्री कृष्ण ने अपने लीलाओं के माध्यम से यह संदेश दिया है कि मनुष्य को कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए । इसका कारण यह है कि ऐसा करने से जल देवता का अपमान होता है ।
निर्वस्त्र होकर कभी ना करें ये 4 काम 
 विष्णु पुराण के मुताबिक मनुष्य को आचमन करते समय निर्वस्त्र अवस्था में नहीं रहना चाहिए।
  पुराणों में यह भी बताया गया है कि मनुष्य को संभोग करने की अवस्था में निर्वस्त्र नहीं होना चाहिए।
 पूजा पाठ करते समय दो वस्त्र बिना सिले हुए धारण करने का विधान बताया गया है। दरअसल सिलाई को सांसारिक मोह माया के बंधन का प्रतीक माना गया है और भगवान की भक्ति बंधन के अनुभव से मुक्त होकर करना ही उत्तम होता है।

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