महिलाओं के मासिक धर्म के विषय पर क्या कहते हैं धर्म? आप भी जानिए कौन से धर्म इसे पवित्र मानते हैं और कौन से अपवित्र

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मासिक धर्म
 महिलाओं का पीरियड एक नेचुरल प्रक्रिया होता है, जो महिलाओं के प्रजनन से संबंधित होता है। लगभग 30 से 50 साल के बीच की हर महिला को इस प्रक्रिया के दौर से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म का चक्र उनके प्रजनन प्रणाली को परिवर्तित करता है। इस लिहाज से यह बहुत ही आवश्यक होता है। मासिक धर्म के दौरान महिला के योनि मार्ग से रक्त का स्त्राव होता है और इस प्रक्रिया के बाद ही कई महिलाएं मां बनने लायक होती हैं। हमारे समाज में मासिक धर्म को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं प्रचलित है। अगर इस पर बीते जमाने की बात की जाए तो तब के समय में जिस महिला को पीरियड आती थी उसके साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता था तथा इस प्रक्रिया के कारण महिला को अपवित्र माना जाता था। इस समय महिला को कई शुभ कार्यों में शामिल होने से वंचित कर दिया जाता था।
 मासिक धर्म को लेकर सभी धर्मों का अपना-अपना नियम कानून है। आज हम इसी को लेकर आपके बीच चर्चा करने वाले हैं। आज हम आपको यह संक्षेप में बताने की कोशिश करेंगे कि पीरियड को लेकर विभिन्न धर्मों में क्या मान्यता है ? तो आइए सबसे पहले हम हिंदू धर्म के बारे में बात कर लेते हैं।
  मासिक धर्म को लेकर क्या कहता है हिंदू धर्म ———–
 हिंदू धर्म के मुताबिक मासिक धर्म आने की परिस्थिति में महिला को अपवित्र माना जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार महिलाएं ना तो रसोई का कार्य करती है और ना ही पूजा पाठ। पीरियड के दौरान महिलाओं को शुभ कार्यों से कोसों दूर रखा जाता है । हालांकि बदलते परिवेश में शहरीकरण हुआ है और शहरों में अगर सिंगल फैमिली है तो खाना तो बनाना ही पड़ता है। परंतु फिर भी लोगों के मन पर पीरियड को लेकर धार्मिक मान्यताओं का असर कुछ खास कम नहीं हो सका है। हालांकि महिलाएं वक्त वक्त पर इसे लेकर आवाज जरूर उठा रही है।
 मासिक धर्म को लेकर क्या मत है इस्लाम का ———-
इस्लाम धर्म में भी मासिक धर्म को  अपवित्र माना गया है। इस दौरान महिलाएं शुभ कार्यों में हाथ नहीं लगा सकती। इस समय कुरान छूना, बाजार जाने, मस्जिद जाने जैसी चीजों पर मनाही है। यहां तक कि शारीरिक संबंध बनाने की भी इजाजत नहीं है।
 मासिक धर्म  को लेकर क्या कहता है सिख धर्म- ————
सिख धर्म के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पवित्र माना जाता है। गुरु नानक देव जी के अनुसार माता का रक्त जीवन देने के लिए बहुत ही आवश्यक है । यही कारण है कि सिख धर्म के अनुसार इसे पवित्र माना जाता है तथा इस दौरान महिलाओं को हर कार्य करने के लिए भी छूट होता है।
 मासिक धर्म को लेकर क्या कहता है बौद्ध धर्म ———–
 बौद्ध धर्म में भी मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को पवित्र माना जाता है। इस समय महिलाएं हर काम कर सकती हैं। परंतु बौद्ध धर्म में कुछ मान्यताओं के अनुसार यह भी माना जाता है कि इन दिनों महिलाएं अपनी कुछ शक्तियां खो देती हैं।