संबंधों में स्थिरता ही सब कुछ नहीं होता,  ब्रेकअप भी होता है जीवन का अहम हिस्सा

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संबंधों में स्थिरता
संबंधों में स्थिरता ही सब कुछ नहीं होता,  ब्रेकअप भी होता है जीवन का अहम हिस्सा————
 फिलहाल संबंधों में स्थिरता बहुत देर तक टिकी भी नहीं रहती। आज के दौर में हम सभी ठहरना कदापि नहीं चाहते। ऐसे में संबंधों में स्थिरता दबे पांव हमसे कहीं बहुत दूर जा चुकी है। सच ही है हम ठहरना नहीं चाहते हैं। कहीं भी नहीं चाहे जिंदगी की भाग दौड़ में या संबंधों की दौड़ में। आजकल तो लोगों के रिश्ते टूट जाते हैं पर लोग नहीं टूटते। वास्तव में यह टूट कर बिखरने की खूबी ही असली स्थिरता बन गई है। आजकल के लोग इस बात को बेहतर समझ रहे हैं कि जीवन में व्यक्तिगत इच्छाओं की भी अपनी जगह होती है। जो हर रिश्ते में होना अनिवार्य है।
आजकल क्यों टूट जाते हैं रिश्ते ———
 जमाना इतना एडवांस हो गया है कि लोगों की सोच तो बदली ही है पर जीवन शैली भी बहुत बदल चुकी है। आजकल लोग इतने व्यस्त होते हैं कि समय निकाल पाना बड़ा कठिन है। ऐसे में समय ना मिल पाने का बहाना अब केवल बहाना ही नहीं रहा बल्कि आज की कटु सच्चाई है। लोग ऑफिस या कंपनी में मशीनों की तरह कार्य करते हुए अपने जीवन को बिता रहे हैं। ऐसे में समय कहां मिल पाता है कि वह घंटों फोन पर बातचीत करें अथवा पास बैठकर देर तक समय बिताएं। परंतु आपकी व्यस्तता की समस्या को आपके सामने वाला भी समझे यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में कई बार ऐसे अवसर बन जाते हैं कि रिश्तो में कड़वाहट आ जाती है। जीवन में कई बार तो समय के ना मैनेज होने की वजह से रिश्ते टूट कर बिखर जाते हैं । ऐसे में जीवन में एक मनचाहा परिवर्तन आता है जिससे पार पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
 टूट कर बिखर जाना कमजोरी की निशानी है ——–
 कुछ लोग प्यार को ही सब कुछ समझ बैठते हैं पर प्यार एक कमजोरी की तरह है और कमजोरी से रिश्ते नहीं निभते। मात्र प्रेम ही जीवन नहीं होता प्रेम के बाद भी जीवन होता है। जिसका अनुभव किया जाना आवश्यक होता है। किसी के दूर हो जाने के ग़म में संसार को भूल जाने का अर्थ खुद को नुकसान पहुंचाना मात्र है। अब इस बात को लोग अच्छी तरह से समझ चुके हैं।
  बेहतर की तलाश अब सबको होती है———-
  अब प्रेम और विवाह को सात जन्मों का बंधन नहीं माना जाता है । हर पल बेहतर की तलाश सबको है। ऐसे में इस तलाश से संबंध भी अछूते नहीं बचे हैं । सोचना चाहिए कि जब प्यार आपके साथ रहना ही नहीं चाहता तो क्यों जबरदस्ती रिश्ता कायम रखना चाहते हैं आप?  छोड़ कर आगे निकल जाना ही जिंदगी है। यदि आपके साथ कोई कंफर्टेबल नहीं रह पाता है तो कोई आवश्यकता ही नहीं है कि आप हमेशा उसके पीछे पड़े रहे। आज के जमाने के हिसाब से हर किसी को बेहतर इंसान की आवश्यकता है ऐसे में आपको भी बेहतर की तलाश में आगे की ओर बढ़ लेना चाहिए। क्योंकि हारने से जिंदगी नहीं ठहरती। जिंदगी के सफर में हो सकता है कि कोई बेहतर साथी आपके तलाश में प्रतीक्षित बैठा हो। इन्हीं सब नई सोच समझ की वजह से आजकल के रिश्तो की स्थिरता में कमी देखी जा रही है। खैर कोई बात नहीं आपके साथ कोई रहे या ना रहे परंतु आप स्वयं खुद के साथ तो रहा करें। जीवन का सफर बेहतर हो जाएगा वरना रिश्तो के बिखराव में आप भी कहीं बिखर जाएंगे।

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