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अगर पाकिस्तान नहीं संभलता है तो भविष्य में उसके लिए उत्पन्न होगी बहुत ही खराब परिस्थिति, इस बार भारत पाकिस्तान को माफ नहीं करेगा

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अगर पाकिस्तान नहीं संभलता है तो भविष्य में उसके लिए उत्पन्न होगी बहुत ही खराब परिस्थिति, इस बार भारत पाकिस्तान को माफ नहीं करेगा।

भारत पाकिस्तान का झगड़ा 1947 से ही शुरू हो गया था। आजादी प्राप्ति के ही समय पर जिन्ना द्वारा दो कौमी नजरिए के आधार पर भारत के दो टुकड़े करना भारतीय अवाम को कतई स्वीकार्य नहीं था। यहां तक कि राजनेता भी इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन जीन्ना द्वारा मौका देखकर घात लगाने की वजह से नेहरू-गांधी पटेल सरीखे सभी नेता ना चाहकर भी भारत के बंटवारे को मजबूर हुए।

कारण सीधा था कि भारत उस समय सक्षम नहीं था। यदि देश में दो कौमी नजरिए के आधार पर दंगे भड़क जाते तो उसे शक्ति द्वारा दबाया नहीं जाया जा सकता था। साथ में यह भी हो सकता था कि दो कौमों की लड़ाई में देश इस हद तक कमजोर हो जाता की कमजोरी का फायदा उठाकर अंग्रेज भारत को आजादी देने से मना कर देते। भारत आजादी से महरूम हो जाता और गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहना पड़ता।

इन्हीं सब कारणों से भारतीय नेताओं ने पाकिस्तान नामक देश के वजूद को स्वीकार कर लिया। हालांकि कारण और भी हैं जिन्हें कही सुनाई जाती है। परंतु मेरे विचार से मैं जो कह रहा हूं यह भी उन कारणों में से एक  है।

हालांकि भारत सरकार ने भले ही पाकिस्तान को एक देश के रूप में स्वीकार कर लिया हो लेकिन जनता की नजर में पाकिस्तान आज भी भारत के एक हिस्से के रूप में देखा जाता है। जिसे भारत से छल प्रपंच द्वारा अलग कर लिया गया था। फिर भी भारत के टूटने के उपरांत देखा गया है कि शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए भारत ने कभी भी पाकिस्तान के ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया। अपनी जमीन को पुनः वापस न लेने के लिए भारत का यह कदम सराहनीय है जो अपने हक से महरुम होकर भी शांति और सद्भाव के लिए तत्पर है। यही होना भी चाहिए। बीते हुए कल को भूल कर नए सुबह का आनंद शांति के साथ लेना ही मानव जीवन का उद्देश्य होना चाहिए।

किंतु क्या वास्तव में शांति की स्थापना हुई है। भारत पाकिस्तान के अब तक के इतिहास को उठाकर देखें तो यह कहना निरर्थक ही है कि शांति की स्थापना हुई है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान का कश्मीर पर हमला और पाकिस्तानी हमले के बाद राजा जयसिंह द्वारा कश्मीर का भारत में विलय तथा फिर उसी कश्मीर के लिए भारत पाकिस्तान का आपस का चार युद्ध लड़ना, साक्ष्य स्वरुप इतना ही काफी है कि भारत पाकिस्तान के रिश्ते शांतिपूर्ण कभी नहीं रहे। भले ही जिन्ना ने शांति का हवाला देकर भारत को हिंदू और मुस्लिम के आधार पर दो टुकड़े कर दिए।

इस समय ध्यान देने योग्य बात यह है कि शांति जितनी ही बार खतरे में पड़ी है  वह केवल पाकिस्तान के कारण ही पड़ी है। जितनी ही बार युद्ध लड़ा गया है वह मात्र पाकिस्तान की ओर से ही प्रारंभ किया गया है। हालांकि यह बात दीगर है कि भारतीय सेना ने नापाक मंसूबों को कभी भी कामयाब नहीं होने दिया। भारतीय सेना ने हर बार ही पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है और घुटने टेकने को मजबूर किया है। किंतु पाकिस्तान कुत्ते का पूंछ है जो ना अब तक सीधा हुआ है और ना कभी सीधा होगा।

भारत से बार-बार परास्त होने के बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधरता और अपनी छदम नीतियों द्वारा भारत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता रहता है। यह बात तो तय है कि पाकिस्तान भारत से सीधी जंग कभी नहीं जीत सकता इसलिए वह आतंकवाद का सहारा लेता है। आए दिन भारत उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से चोट खाता रहता है। कश्मीरी युवाओं को पाकिस्तान धर्म के आधार पर भारत के खिलाफ भड़काता है और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराता है। जिस कारण घाटी में कभी भी स्थाई शांति नहीं स्थापित हो पाता और आए दिन आतंकी वारदात होता ही रहता है।

पाकिस्तान का यह मानना है कि वह आतंकवाद और जिहाद के द्वारा कश्मीर को भारत से अलग करने में अंततः किसी ना किसी रोज सफल हो ही जाएगा। किंतु वह ऐसा इसलिए करता है कि भारत हद से ज्यादा शांति का ख्वाहिशमंद मुल्क है। किंतु उसे यह नहीं पता है कि जिस दिन भारत ने ठान लिया तो उस दिन कश्मीर तो कश्मीर है पूरा पाकिस्तान भारत का हिस्सा होगा।

 हां दोस्तों मैं सच बोल रहा हूं, अगर पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आता तो संभव है भारत एक दिन उसके खिलाफ निर्णायक युद्ध छेड़ दे। अगर ऐसा होता है तो आप सोच सकते हैं नतीजा क्या होगा? भारत की तुलना में पाकिस्तान एक छोटा देश है इसलिए भारत का प्रकोप वह ज्यादा देर सहन नहीं कर सकेगा और अंत में उसे हार का मुंह देखना पड़ेगा।

इस बीच आप के मस्तिष्क में परमाणु बम की याद जरूर आ रही होगी और आप सोच रहे होंगे कि युद्ध हारने की परिस्थिति में पाकिस्तान परमाणु युद्ध छेड़ सकता है। किंतु मैं  यहां आश्वस्त कर सकता हूं कि पाकिस्तान ऐसा कभी नहीं करेगा। क्योंकि ऐसा कोई भी कदम पाकिस्तान के लिए खुदकुशी साबित होगा। क्योंकि पाकिस्तान का चप्पा-चप्पा भारत की मिसाइलों के जद में है। अगर भारत ने परमाणु हमला किया तो कुछ ही मिनटों में पाकिस्तान नक्शे से मिट जाएगा। लेकिन भारत का अस्तित्व पाकिस्तान के परमाणु हमले को झेलने के पश्चात भी कायम रहेगा।

इस कारण पाकिस्तान भूलकर भी भारत पर परमाणु हमला करने की नहीं सोच सकता। किंतु एक बात मेरे जहन में हमेशा उभरती है कि वह यह है कि भारत भले ही नो फर्स्ट यूज़ की पॉलिसी का इजहार करता है। किंतु भविष्य में कोई गारंटी नहीं कि वह इस नीति पर कायम रहेगा। भारत एक बड़ा मुल्क है क्षेत्रफल के हिसाब से भी और जनसंख्या के हिसाब से भी। मैं मानता हूं कि अपने इस बड़े भूभाग और इतनी बड़ी जनसंख्या की रक्षा के लिए भारत किसी भी हद तक जा सकता है। और इसका निष्कर्ष यह निकलता है कि अगर भारत को पाकिस्तान से अत्यधिक खतरा महसूस होता है तो भविष्य में पाकिस्तान पर परमाणु अटैक कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत पाकिस्तान को मिसाइल दागने का मौका ही नहीं देगा और इतने एटम बम गिराएगा की पाकिस्तान का वजूद ही  हमेशा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

इसलिए पाकिस्तान भले ही भारत को सदा आंखे दिखाता रहा हो व भले ही आतंकवाद का सहारा लेकर भारत को जख्म देता रहा हो किंतु उसे यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि भारत चुपचाप नहीं बैठने वाला। भारत हालात के अनुसार चलने वाला शांतिप्रिय और समझदार देश है। किंतु इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने हितों से समझौता करेगा।

जिस दिन मौका मिला जिस दिन उचित समय हाथ लगा उस दिन पाकिस्तान को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा जो कि मात्र पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद का जवाब होगा और जवाबी कार्यवाही में पाकिस्तान का अंत निश्चित है। फिर ना कोई कश्मीर में आग लगाने वाला रहेगा और ना ही कोई भारत को जंग की आग में धकेलने वाला। ना ही कोई शैतानी आतंकियों आका होगा और ना ही कोई शैतानी आतंकी।

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