कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये ? इसलिए कभी नहीं खराब किस्मत में मायूस होइए और नाही अच्छे किस्मत पर घमंड कीजिए

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कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये
कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये ? इसलिए कभी नहीं खराब किस्मत में मायूस होइए और नाही अच्छे किस्मत पर घमंड कीजिए
किस्मत के विषय में साफ-साफ कुछ भी कह पाना एक जल्दीबाजी भरा फैसला होगा। क्योंकि किस्मत किसी का भी एक तरह नहीं होता। किस्मत की प्रवृत्ति ही बनना बिगड़ना है। किस्मत कभी बनती है तो कभी बिगड़ती है। कुछ लोगों की किस्मत कभी-कभी सामान्य भी रहती है। किस्मत की नेचर की अगर बात करें तो यह परिवर्तनशील होता है। इसके रंग हर बदलते मौसम के साथ अलग अलग हो सकते हैं।
 इसलिए  ना ही खराब किस्मत पर धैर्य खोना चाहिए और न ही अच्छे किस्मत पर इतराना चाहिए। क्योंकि धैर्य खो देने से आपका बिगड़ा हुआ किस्मत बन नहीं सकता अपितु ऐसा करने से आप और भी दुखी हो सकते हैं। वहीं अगर आप अपने अच्छे किस्मत पर इतराते हैं तो भी बुरी बात है क्योंकि आपको अच्छी तरह पता है कि किस्मत परिवर्तनशील होता है अतः हो सकता है कि आज आपका अच्छा दिन है और कल आपका बुरा दिन आ जाए। तो सोचिए कि आज आप इतराते हैं पर कल यदि आपके बुरे दिन आ गए तो क्या होगा आपके गुरूर का। अतः इतराना कभी नहीं चाहिए। समान रहना ही हर आदमी के लिए अच्छी बात है।
कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये ? इसलिए कभी नहीं खराब किस्मत में मायूस होइए और नाही अच्छे किस्मत पर घमंड कीजिए
 मैंने कई लोगों को फर्श से अर्श तक पहुंचते देखा है। वह कहते हैं ना राई से पहाड़ होना ठीक वैसे ही। वही मैंने कई ऐसे लोगों को भी देखा है जो अर्श से फर्श पर आ जाते हैं और गुरूर का टूट कर बिखरते देर  नहीं लगता। यानी कुल मिलाकर कहे तो आज जो गरीब है कल वह बहुत ही धनी हो सकता है और आज जो धनी है कल वह बहुत गरीब हो सकता है। यानी किस्मत कब किसके साथ क्या कर दे कोई नहीं जानता। अतः हर परिस्थिति में सामान्य रहने की कला सीख लेना चाहिए आदमी को ।
कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये
खुदा होता है या नहीं होता है इस पर बहुत से लोग बहुत तरह की बात करते हैं। पर जब लाख चाहने पर भी जीवन से वह चीजें नहीं मिल पाती जिसकी अपेक्षा इंसान करता है तब व्यक्ति को किस्मत और भगवान दोनों अनायास ही याद आने लगता है। ऐसे में उसके दिल का हाल ठीक वैसे ही होता है जैसे किसी आस्था के पुजारी का वरना पहले तो वह इतना गुरुर में होता है कि वह ईश्वर और ईश्वर की बनाई चीजों को धता बताकर अपने आप को ही सब समझ लेता है। अतः ईश्वर भी है और भाग्य भी है जिसे ईश्वर ने लिखा है। यह आपके ऊपर है कि आप इस पर कितनी आस्था रखते हैं।
कोई नहीं जानता कि किस्मत कब और क्या गुल खिलाये ? इसलिए कभी नहीं खराब किस्मत में मायूस होइए और नाही अच्छे किस्मत पर घमंड कीजिए
  आदमी अपने जीवन के सफ़र में हर पल दौड़ता धूपता रहता है। नई नई योजनाएं बनाता है, नई-नई तरकीबें ढूंढता है और नए-नए कारनामे करता है। वह हर वक्त लगा रहता है अपने जीवन को दिशा देने में। फिर भी आदमी इच्छा अनुसार सब कुछ नहीं कर पाता। ना ही वह कुछ भी निश्चित कर पाता है कि वह क्या करेगा? क्योंकि एक अदृश्य शक्ति है जो उससे हर चीज करवाती है, जिसका नाम ईश्वर है। कई ख्वाब पूरे हो जाते हैं और कई अधूरे रह जाते हैं। ईश्वर ने भी मनुष्य को वह अधिकार नहीं दिया है जिससे कि मनुष्य अपने मर्जी के अनुसार जीवन की दिशा और दशा सुनिश्चित कर सकें।
एक बात तो मगर तय है कि ईश्वर इंसान को उम्मीदों में उलझाए रहता है। आदमी एक उम्मीद खत्म होने के बाद दूसरी उम्मीद का सहारा ले लेता है पर मरते दम तक उम्मीदें खत्म नहीं होती। पर बात अगर किस्मत की किया जाए तो किस्मत कब क्या गुल खिला दे कोई नहीं जानता। किस्मत किसी के उम्मीदों पर निर्भर नहीं होता। आदमी उम्मीद कुछ भी कर सकता है पर होता वही है जो किस्मत में लिखा होता है। ऐसे में  खराब किस्मत पर मायूस नहीं  होना चाहिए और ना ही अच्छे किस्मत पर  इतराना चाहिए।