जब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो। चलते हुए गिरते रहना इंसानी जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है

0
124
आप गिर जाएं तो निराश ना हो।
जब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो। चलते हुए गिरते रहना इंसानी जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है। चलता हुआ आदमी ही गिरता है। वह आदमी कभी नहीं गिरता जो बैठा रहता है। इसलिए आप जब भी गिरे तो स्वयं को कोसीय मत। हां गिरने के बाद तुरंत खड़ा हो जाइए, मिट्टी झाड़िए और संभल कर चलना प्रारंभ कर दीजिए। इसी में बुद्धिमानी भी है और आपका भला भी है, अन्यथा तो नुकसान ही नुकसान है।
 आदमी का गिरना बुरा नहीं होता। बुरा तो तब होता है जब आदमी गिर जाता है और उठता नहीं है। गिरने के बाद उठकर ना चलना ही सबसे बड़ी समस्या है। अगर बार-बार गिरा जाए और बार बार उठ कर चला जाए तो समझिए आपसे सुलझा व्यक्ति दूजा कोई नहीं है। अतः जब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो।
 जीवन तो सुख दुख के लिए ही बना है। जीवन में खुशी गम तो है ही। तो क्या इन चीजों का एहसास करके आदमी व्यथित रहे ? कदापि नहीं ! मकड़ी बार बार की कोशिश से कामयाब होती है। चींटी बार-बार की कोशिश से दीवार चढ़ती है। सिकंदर बार-बार के प्रयास से ही कामयाब हुआ था। इसलिए सफलता का मूलमंत्र बार-बार गिरने के उपरांत बार-बार उठने में ही है। इसलिएजब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो।
 अगर आपके साथ सदा ही ऐसा हो रहा है तो समझिए कि ईश्वर आपकी परीक्षा ले रहा है और आप को कोई बड़ी सफलता हाथ लगने वाली है। अगर आपको हमारी बात पसंद नहीं आ रही हो तो आप ही बताइए कौन ऐसा महान व्यक्ति हुआ है जो कभी जीवन के पथ पर गिरा नहीं है। जीवन पथ पर सभी गिरते हैं लेकिन महान वही बनते हैं जो गिर के संभलते भी हैं व गिरने से निराश नहीं होते। वह अपने खाए हुए ठोकर को चुनौती के रूप में लेते हैं और सीख लेकर आगे बढ़ते हैं। सो जब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो।
 इसीलिए चुनौतियों को स्वीकार करें। जब भी आप गिर जाएं तो निराश ना हो। आप सोचे कि हर बाधा को पार कर जाएंगे। कोई भी ऐसा बाधा नहीं जो आप के मार्ग को अवरुद्ध कर सके, जब तक कि आप स्वयं में ही हार ना मान जाए। फिर यह सोच के साथ लगे रहिए आशाएं पूर्ण होंगी। वह सब मिलेगा जो आप चाहते हैं और सारी कठिनाइयां दूर चली जाएंगी जिसे आप पसंद नहीं करते।
Previous articleदुनिया में हर चीज संभव है कभी भी कुछ भी हो सकता है
Next articleजीवन बीमा हर आदमी के लिए है जरूरी अतः आप भी कीजिए अपने लिए एक जीवन बीमा पॉलिसी का चुनाव
मेरा नाम "संजय कुमार मौर्य " है और मैं देवरिया ( यूपी ) का रहने वाला हूं । मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर, लेखक, कवि और कथाकार हूं । मैं हिंदी साहित्य में रुचि रखता हूं और हमेशा कविताओं और कहानियों का सृजन करता रहता हूं। इसके अलावा भी हमारे पास बहुत सारी चीजों की जानकारियां है जिसे मैं इस ब्लॉग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करता हूं। दोस्तों हमें अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करना बहुत ही अच्छा लगता है अतः इसी उद्देश्य से हमने सन 2018 जनवरी में www.sitehindi.com को शुरू किया, जो कि आज एक सफल वेबसाइट बन चुका है और निरंतर वेब की दुनिया में उचाईयों की ओर बढ़ रहा है । इसके अलावा मेरा उद्देश्य अपने राष्ट्रभाषा हिंदी की सेवा करना है और इसे जन-जन तक पहुंचाना भी है । अगर मैं अपने इस उद्देश्य में सफल होता हूं तो मैं स्वयं को भाग्यशाली समझूंगा। आप भी हमारे इस ब्लॉग को पढ़े और हमारे इस उद्देश्य को पूरा करने में हमारी सहायता करें । धन्यवाद !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here