जीवन बीमा हर आदमी के लिए है जरूरी अतः आप भी कीजिए अपने लिए एक जीवन बीमा पॉलिसी का चुनाव

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 जीवन बीमा
पुरानी बात थी जब जीवन बीमा का नाम सुनते ही चेहरा बिदक जाता था। इसके पीछे शिक्षा की कमी को भी मूल कारणों में से एक कारण के रूप में देख सकते हैं। सबसे पहले तो कुछ बीमा के एजेंटों ने बहला-फुसलाकर भोले भाले लोगों को पैसे जमा कराए फिर लेकर रफूचक्कर हो गए। इसीलिए लोगों में यह भ्रम व्याप्त हो गया कि जीवन बीमा वास्तव में एक जालसाजी है। लोगों को एजेंटों पर भरोसा ना रह गया। सभी लोग एजेंटों को लुटेरे के रूप में देखने लगे।
 उस वक्त का मुझे अब भी याद है जब मैंने अपने पिताजी से कहा था बीमा करवा दो। फिर क्या था शुरू हो गए फलाने का इतना डूब गया, फलाने का उतना डूब गया, एजेंट पैसे लेकर भाग जाएंगे, जीवन बीमा मात्र एक धूर्त बाजी है। इस कारण मेरे लाख चाहने पर भी पूरे परिवार में एक भी बीमा पालिसी नहीं हो सका।
हालांकि मैंने और भी अतिरिक्त प्रयास किए परंतु सफल ना हो सका। मुझे बस एक तर्क हीन उत्तर से संतोष करना पड़ता कि अपने ही जीवन का बीमा कराना अशुभ है। जीवन का सोचो मृत्यु और मृत्यु के बाद का नहीं। जाहिर है मतलब साफ की जीते जी अपने मृत्यु का अंदेशा पालकर जीवन बीमा करवाना उचित नहीं समझते थे। खैर मैं कह भर सकता था मेरे हाथ में कुछ था तो नहीं। किंतु उमर ढलने के साथ अब यह अनुभव होता है कि काश उस समय किसी बीमा योजना का लाभ उठा लिया होता तो कुछ परेशानियों का हल स्वता ही हो जाता।
 जीवन आशाओं से भरपूर होती है किंतु चाह कर भी ऐसा ना हो सका और हिस्से में बच्चा केवल पछतावा। अब इसे मूर्खता कहें या कुछ और नाम दें पर जो होना था सो हो गया। वक्त ना किसी के मुट्ठी में समाया है और ना ही समाएगी। किंतु इंसान चाहे तो वक्त का सदुपयोग जरूर कर सकता है।
 खैर आप सोच रहे होंगे कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं तो बताता चलूं कि इसके पीछे मेरा उद्देश्य यह है कि आज से ही सही किंतु प्रत्येक नागरिक के पास कम से कम एक जीवन बीमा की पॉलिसी जरूर होनी ही चाहिए। जिससे कि कुछ हद तक ही सही किंतु आर्थिक परेशानियों की चिंता से छुटकारा मिल सके।
 दरअसल आज के समय में आदमी को कोई ना कोई चिंता लगी रहती है। अगर बच्चा पैदा हुआ तो पढ़ाई और नौकरी का। अगर बच्ची पैदा हुई तो पढ़ाई और शादी की। अगर आप बुढ़ापे की ओर अग्रसर हो रहे हैं तो आप जरूर चाहेंगे कि कुछ पैसे आपके पास जरूर हो कि हाथ ना फैलाना पड़े। या फिर आपको यह चिंता जरूर सताती Hogi की खुदा ना खास्ता अगर जीवन के सफ़र में कुछ अनहोनी हो गया तो आपके बाल बच्चों का गुजारा किस तरह होगा। तो होनी और अनहोनी को रोका तो नहीं जा सकता किंतु इससे चिंतामुक्त जरूर कुछ हद तक रहा जा सकता है। इस सभी चिंताओं का एक ही इलाज है जीवन बीमा।
 अगर आप समय रहते हुए कुछ पैसे बचाकर परिवार के सदस्यों और अपने नाम से जीवन बीमा की पॉलिसी खरीद लेते हैं तो निश्चित ही आगे चलकर सुखद होगा। क्योंकि जीवन बीमा आपके जीवन के साथ की और जीवन के बाद की भी सहयोगी है। तो देर किस बात की है अपने सामर्थ्य के अनुसार कोई बीमा पॉलिसी लीजिए और किस्त भरना शुरू कीजिए। इससे भारत का वह सपना भी पूरा होगा जहां हर एक व्यक्ति के नाम से एक बीमा पॉलिसी की है। साथ में आप भी समृद्धि होंगे और देश भी।
 आजकल तो देश में वाहन बीमा, फसल बीमा, मवेशी बीमा, अन्य कई तरह की भी पॉलिसी उपलब्ध है। आपको जहां भी जरूरत हो इसका बेहिचक लाभ उठाइए।