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पहले कदम से ही मिलेगी मंजिल, जब तक आप शुरुआत नहीं करते तब तक नहीं मिलेगा आपको सफलता

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 पहले कदम
 कोई मंजिल दूर नहीं होता किंतु हमारा उसकी ओर ना बढ़ना ही दूर बना देता है। आप  पहले कदम चलिए तो सही तत्पश्चात देखिए आपकी मंजिल आपके एक कदम और नजदीक आ जाएगी। किंतु ऐसा नहीं होता है। क्यों नहीं होता है? जवाब है इसलिए नहीं होता है कि हम पहला कदम बढ़ाते ही नहीं हैं। आलस करते हैं , तरह-तरह के  बेवाजिब विचार मंथन करते हैं, फिर कहते हैं कि  हम उस मंजिल तक पहुंच भी पाएंगे कि नहीं। दरअसल इस सारी दुनिया में कुछ भी कठिन नहीं है। समस्त संसार में जो भी हो रहा है वह आदमी ही कर रहा है।
 जब तक आप कुछ नया सीखना नहीं चाहेंगे कुछ करना नहीं चाहेंगे, अपना एक अलग रास्ता चुन कर उस पर चलना शुरू नहीं करेंगे, तब तक आपके लिए दुनिया का प्रत्येक कार्य असंभव ही लगेगा। किंतु जिस दिन आपने संकल्प लेकर कोई भी कार्य खुद शुरू कर दिया उसी दिन से आप अपने अंदर एक नई ऊर्जा का संचार महसूस करेंगे और पल प्रतिपल आगे की ओर बढ़ते जाएंगे।
 दुनिया की कोई शक्ति आपको नहीं रोक पाएगी क्योंकि कोई भी इंसान संकल्प के साथ कुछ करता है तो वह पूरा होकर ही रहता  है। यहां तक कि ईश्वर भी  उसके कार्य में सहयोग करता है। फिर आप सोचिए जिस कार्य को पूरा करने में ईश्वर का सहयोग सम्मिलित हो उसे भला कौन है जो रोक सकता है?
 इसलिए आप दृढ़ संकल्पी होकर तन मन से किसी भी कार्य को करें। आपको अवश्य ही सफलता मिलेगी। कहा भी गया है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत। यानी कि मन के हार जाने से ही हार होता है और मन के जीतने से ही जीत होता है। आप अगर  अपने जीवन में जितना चाहते हैं फिर अपने मन से पहले जीत जाओ। यदि आप मन से किसी भी प्रकार की चुनौती को जीत लेते हो तो समझ लो आप ने आधी चुनौती जीत ली।
 इसलिए मैं तो पहले कहूंगा कि किसी भी कार्य को करने से पहले सोचो कि आपने इसे जीत ही लिया है। ऐसा करने से आपका चुनौती रूपी खेल आसान हो जाएगा और आप जीत जाओगे।
 जरा सोचिए आप की आज के युग में ऐसा कौन सा कार्य है जो मनुष्य नहीं कर सकता है। रेल से लेकर जहाज तक, कंप्यूटर से लेकर मशीनरी तक, हर चीज़ तो  मनुष्य कर ही रहा है ना! फिर आप किस बात का संकोच करते हैं। आज आदमी अपने बुद्धि विवेक के बल पर असंभव से असंभव कार्य को कर सकता है। आज रॉकेट से सेटेलाइट भेजा जा रहा है। आदमी चांद पर जा चुका है और मंगल पर जाने की तैयारी चल रहा है। दिन प्रतिदिन नए नए आविष्कार हो रहे हैं। पर आप हो कि छोटे ख्यालात से निकल ही नहीं पा रहे हो।
 दरअसल जब तक आप मेंढक की तरह कुएं में मस्तिष्क को सीमित रखोगे तब तक बाहरी दुनिया से आपका संपर्क नहीं हो पाएगा और आप यह जान नहीं पाओगे कि दुनिया में आखिर हो क्या रहा है? दुनिया है कैसी? इसलिए कुएं से बाहर निकलो दुनिया को देखो, उसे समझो, अपनी मंजिल चुनो और उसके  पथ पर बढ़ ना प्रारंभ कर दो। फिर पाओगे की कितनी सरल है यह दुनिया  जिसे नाहक ही कठिन समझ रहे थे।
  तो फिर देर किस बात की है, नींद से जाग जाओ। और देर मात्र इस बात की है तुम पहला कदम कब रख रहे हो? पहला ही कदम सब कुछ है। पहले कदम का जीवन में बहुत ऊंचा स्थान है। इसे व्यर्थ ना जाने दो। एक बार सोचो पहली बार दुनिया देखी थी अब तक देखे जा रहे हो। पहली बार चलना सीखा था अब तक चले जा रहे हो। पहली बार स्कूल गए थे और तब तक नहीं रुके जब तक पढ़ाई पूरी ना हो गई । यही तो सफलता का राज है। पहले कदम की ओर बढ़ो और पहला कदम रखो फिर चलते रहो प्रयास ना छोड़ो सारी ख्वाहिशें पूरी हो जाएंगी।

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