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ब्लॉग लेखन भी बहुत ही मेहनत का काम है

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ब्लॉग लेखन भी बहुत ही मेहनत का काम है

ब्लॉग लेखन
 मैं जब ब्लॉग लिखना शुरु नहीं किया था तो दूसरों का ब्लॉक पढ़ता था। तब मुझे ब्लॉग लेखन बड़ा ही आसान काम लगता था। दरअसल जब मैं यह देखता था कि लोग ब्लॉक लिखकर बहुत ज्यादा पैसे कमा रहे हैं वह भी रोजमर्रा के जीवन से संबंधित लेख लिखकर तो मुझे यह सब बहुत ही सरल लगता था। मुझे लगता था कि इसमें कुछ ज्यादा मेहनत नहीं है और बड़ा आसानी से लोग ब्लॉग लिख कर पैसे कमा रहे हैं। अतः मैं भी ऐसा कर सकता हूं ।
परंतु जब मैं खुद ब्लॉग लिखना शुरू किया तो शुरुआती क्षणों में तो मुझे आभास नहीं हुआ क्योंकि नया उमंग था, ब्लॉगर बनने  का जोश था और साथ-साथ पैसे कमाने का जुनून भी। अतः  दो-तीन महीनों तक खूब दबाकर ब्लॉग लेखन किया, सच मानिए दिन रात एक कर दिया। दरअसल जोश में आदमी को होश भी कहां होता है। ऐसे में खूब मेहनत करने के बावजूद मुझे यह  तनिक भी एहसास ना हुआ कि मैं बहुत अधिक ही मेहनत कर रहा हूं।

ब्लॉग लेखन भी बहुत ही मेहनत और धैर्य का काम है 

 धीरे-धीरे मुझे अपने परिश्रम का एहसास तब होने लगा जब मैं तीन चार महीने के लेखन कार्य करने के बाद भी सफल ना हो सका। इतना मेहनत इतना लेख लिखना फिर भी ब्लॉग पर ट्रैफिक नहीं और ना ही एक रुपए की कमाई। अगर किसी कंपनी में इतने दिन नौकरी करता तो ना अधिक तो 50 से 60 हजार तो कमा ही लिया होता। अतः ऐसी परिस्थिति में मुझे पछतावा तो हुआ ही साथ साथ यह एहसास भी हो गया कि ब्लॉगर बनना इतना आसान बात नहीं है। इसके लिए भी शुरुआत में खून पसीना एक करना पड़ता है और जो लोग आज ब्लॉगिंग से दो पैसा कमा रहे हैं उन लोगों ने अपने जीवन का बहुमूल्य समय और कड़ी मेहनत अपने ब्लॉग को दिया है। वरना इससे पहले तो ब्लॉगर बनना मैं  एक खेल समझता था।

ब्लॉग लेखन भी बहुत ही मेहनत और धैर्य का काम है 

  किसी को लगता है कि ब्लॉगर अपने जीवन को बहुत ही सरलता से जीता है तथा सुगमता से अपना कार्य करता है तो यह ब्लॉगर के साथ थोड़ी नाइंसाफी है। क्योंकि ब्लॉगर की जिंदगी आसान नहीं होती, एक ब्लॉगर बनने के बाद इस बात का पता हमको चल चुका है। ब्लॉग लेखन बहुत ही मेहनत का काम है। सच मानिए एक प्रोफेशनल ब्लॉगर इस दुनिया में होकर भी इस दुनिया में नहीं होता। उसकी अपनी एक अलग ही दुनिया होती है।
ब्लॉगर ना ही अपने मित्रों को समय दे पाता है ना ही घर वालों को और ना ही अपने रिश्तेदारों को। वह नजर सभी घटनाओं पर रखता है पर दूर से ही। उसे इतना समय ही नहीं मिल पाता कि वह किसी के पास जाकर मिले-जुले कुशल-क्षेम पूछे।

ब्लॉगर अपने ही धुन में लगा रहता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों करता है ब्लॉगर तो दोस्तों मैं आपको बता दूं कि कोई भी ब्लॉगर जानबूझकर ऐसा नहीं करता। ब्लॉग लेखन कार्य ही ऐसा है कि समय नहीं मिल पाता है।
जो लोग ब्लॉगिंग से बाहर होते हैं वह तो सोचते ही हैं कि ब्लॉगर बड़ी आसानी से पैसे कमा लेते हैं परंतु ऐसा नहीं है। किसी टॉपिक पर रिसर्च करना पड़ता है, उसके बाद आर्टिकल लिखना पड़ता है, फोटो की व्यवस्था करनी पड़ती है, पोस्ट करना पड़ता है, सोशल मीडिया पर शेयर करना पड़ता है और ब्लॉक के रखरखाव का जिम्मा अलग से है।
तो दोस्तों ब्लॉग लेखन भी बहुत ही मेहनत का काम है। लोगों की सोच की तरह आसान नहीं है। यह बात मैंने ब्लॉग लिखने के बाद खुद अनुभव किया है।

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