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महंत अवैद्यनाथ के शिष्य योगी आदित्यनाथ भगवा वस्त्र धारी CM बन गए और पूरे यूपी की सत्ता गोरखनाथ मंदिर के दरबार में माथा टेक चुकी थी जोकि अपने आप में इतिहास से कम नहीं था

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 योगी आदित्यनाथ
 जब मैं छोटा था तभी से गोरखनाथ मंदिर का नाम सुनते आया। योगी आदित्यनाथ भी  इसी मंदिर के महंत है ।अब तो मैं बहुत ही बड़ा हो गया हूं किंतु अभी तक गोरखनाथ मंदिर परिसर तक कदम नहीं रख सका हूं। मुझे यह मानने में तनिक भी संकोच नहीं है कि यह मेरा दुर्भाग्य है कि मैं  गोरखनाथ मंदिर तक अभी तक नहीं पधार सका।
हालांकि गोरखपुर मेंरा जाना आना कई मर्तबा होता रहा है। कभी किसी के इलाज के लिए तो कभी-कभी किताबों के लिए जाना पड़ता था। एकाध मर्तबा तो यूं ही दोस्तों के साथ घूमने भी गया किंतु दुर्भाग्य की मैं मंदिर तक नहीं जा पाया।
 किंतु फिर भी मंदिर के बारे में मैं सुनता रहा हूं। सब लोग अवैधनाथ जी के बारे में चर्चा किया करते थे। महंत अवैधनाथ जी का बड़े ही आदर के साथ गुणगान हुआ करता था। मैंने बगीचे में चार लोग बैठते थे तब भी उनकी चर्चा सुनी है और ठंड के मौसम में  आग  तपते लोगों द्वारा भी सुनी है। तब मैं बहुत ही ध्यान से उनकी बातें सुनता था। तब गाहे-बगाहे गांधी जी के मौत की चर्चा भी इस बीच आ जाती थी। मैंने कइयों के मुंह से सुना कि महंत अवैधनाथ के बंदूक से ही गांधी जी की हत्या हुई थी। तब लोग अवैधनाथ जी की तारीफ तो करते थे लेकिन मुझे यह तारीफ पसंद नहीं आती थी। खैर गांधी जी के मौत के पीछे गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश का कितना हाथ था यह मैं नहीं जानता। किंतु यह तथ्य सत्य है इसका कोई प्रमाण नहीं है भारतीय कानून भी जब उनको गांधी जी के हत्या का दोषी नहीं मानता तो मैं किस आधार पर और क्यों मानूं?
हालांकि मैं कई लेखों में पढ़ चुका हूं कि गांधी जी के हत्या के बाद कानून की उंगली गोरखनाथ मंदिर के तरफ भी उठा था यह बात अलग है कि कोई साक्ष्य नहीं मिल सका। खैर तब मुझे बहुत दुख होता था कि गांधीजी की हत्या करना बड़ा ही कायरतापूर्ण कदम था। गांधी जी जैसे महापुरुष सदियों बाद जन्म लेते हैं। देश को अभी और आवश्यकता थी उनके मार्गदर्शन की किंतु नियति को कौन टाल सकता है। अब वह हमारे बीच ना रहे तो उनकी कमी सदियों तक खलती रहेगी। ईश्वर उस महान आत्मा को शांति दें।
 अब फिर आते हैं गोरखनाथ मंदिर के तरफ । महंत अवैधनाथ के बाद मंदिर की सत्ता उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की ओर स्थानांतरित हुई। कुछ ही दिनों में योगी आदित्यनाथ की चर्चा चारों ओर होने लगी। इसका कारण था उनका सशक्त हिंदुत्ववादी भगवा छवि और मुसलमानों के खिलाफ सख्त भाषण। योगी आदित्यनाथ की दहाड़ पूरे पूर्वांचल में गूंजने लगी। इस बीच में लगातार गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव भी जीतते गए। जिसके कारण योगी आदित्यनाथ दिन दोगुनी रात चौगुनी आगे बढ़ते गए।
 उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी नाम से एक संगठन खड़ा किया जिसका सिक्का कुछ समय में ही पूरे पूर्वांचल में चलने लगा। इस बीच मुसलमानों के बीच उनकी छवि जैसी भी हो पर हिंदुओं के बीच उनकी अच्छी ख्याति  थी। उन्होंने भेदभाव के खिलाफ काम करते हुए सभी हिंदुओं  को एक माना और उनके अधिकारों की लड़ाई के लिए खड़े हुए। इस बीच उनका राजनीतिक रसूख भी बढ़ता गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा की बड़ी जीत हुई तो पूर्वांचल की जीत के लिए योगी को ही वजह माना गया। तब निश्चित तौर पर योगी जी का कद बढ़ा लेकिन उसके बाद पुनः जब अखिलेश सरकार का कार्यकाल पूरा हुआ तो योगी जी को विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारक के रुप में उतारा गया। इस बीच उनके समर्थकों ने योगी जी को बतौर मुख्यमंत्री पद के दावेदार घोषित करने का बहुत प्रयास किया। किंतु भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह मंजूर ना था। क्योंकि वह कट्टर हिंदुत्ववादी छवि के नेता थे।
 खैर तमाम जद्दोजहद के बीच भाजपा नेतृत्व ने यह फैसला किया कि वह बिना किसी मुख्यमंत्री दावेदार के नाम को घोषित किए बिना ही चुनाव में उतरेगी। क्योंकि भाजपा नेतृत्व को शक था कि मुख्यमंत्री पद घोषित करने के बाद पार्टी में फूट पड़ सकती है। नेतृत्व पार्टी के आपसी झगड़े में उलझना नहीं चाहती थी इसलिए चुनाव में बिना किसी मुख्यमंत्री के ही उतर गई। खैर चुनाव हुए। हवा किधर चल रही है कोई साफ साफ नहीं कह पा रहा था। पर जब एग्जिट पोल आए तो भाजपा को बढ़त दिखी फिर भी कुछ साफ नहीं था कि कौन सी पार्टी जीत रही है। सबने मतगणना का इंतजार किया और मतगणना के दिन जो परिणाम आए वह आश्चर्यचकित कर देने वाले थे। इस चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई। BJP और भगवा खेमे में चारों तरफ जश्न ही जश्न था। इसी के साथ ही BJP का 14 वर्ष का वनवास खत्म हो चुका था।
 इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद BJP खुश तो थी ही किंतु समस्या भी  एक और खड़ा हो गया कि अब मुख्यमंत्री किसको बनाया जाए? पार्टी की धुरंधरों में मुख्यमंत्री बनने की होड़ सी लग गई। हालांकि कोई खुलकर इच्छा जाहिर नहीं कर रहा था पर नकार भी कोई नहीं रहा था। इससे तो साफ है कि सभी नेता जो शीर्ष पर थे वह CM की कुर्सी के फिराक में थे।मीडिया वालों ने भी ऐसे मौके का खूब फायदा उठाया और टीआरपी बटोरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने जनता को 1 सप्ताह तक इंतजार करवाने के पश्चात आखिरकार CM का नाम घोषित कर दिया जिसका नाम था योगी आदित्यनाथ। इस फैसले से मीडिया से लेकर जनता तक और विपक्षी से लेकर सियासी पंडित तक सभी चौक गए। क्योंकि उनका अंदाजा था कि कट्टर हिंदुत्ववादी छवि के कारण बीजेपी योगी आदित्यनाथ को कभी CM नहीं बनाएगी। ऐसे में चौकन्ना लाजमी था। खैर जो भी हो महंत अवैद्यनाथ के शिष्य योगी आदित्यनाथ भगवा वस्त्र धारी CM बन गए और पूरे यूपी की सत्ता गोरखनाथ मंदिर के दरबार में माथा टेक चुकी थी जोकि अपने आप में इतिहास से कम नहीं था।

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