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राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है । नेता अच्छा करे तो भी गाली सुने नेता बुरा करे तो भी गाली सुने।

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राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है
राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है । नेता अच्छा करे तो भी गाली सुने नेता बुरा करे तो भी गाली सुने।
राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है। नेता अच्छा करे तो भी गाली सुने नेता बुरा करे तो भी गाली सुने। जैसे नेताओं ने भगवान से ठेका लिखा कर धरती पर जन्म लिया है देश के जनता की गाली सुनने का। कई जगह तो इन पर जूते चप्पल भी फेंके जाते हैं। काले झंडे दिखाए जाते हैं।  आलू प्याज टमाटर अंडों का बौछार किया जाता है और सियाही फेंके जाते हैं। अगर नेता भ्रष्टाचारी है, नेता घोटालेबाज है तो जरूर कीजिए आप ऐसा। यह आपका जन्मसिद्ध अधिकार है प्रजातंत्र के इस युग में।
राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है । नेता अच्छा करे तो भी गाली सुने नेता बुरा करे तो भी गाली सुने।
वैसे तो यह लोकतंत्र है। भाई लोकतंत्र में तो भीख मांगने वाला नागरिक भी प्रधानमंत्री के समान है। वैसे यह बात लोकतंत्र का सबसे बड़ा मजाक है। कहां प्रधानमंत्री और कहां भीख मांगने वाला भिखारी। भले मुंह से कुछ भी कहा जाए पर राजा और रंक में फर्क तो होता ही है, जो पहले भी होता था और आज भी है।
राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है । नेता अच्छा करे तो भी गाली सुने नेता बुरा करे तो भी गाली सुने।
 मैं बात उन लोगों की कर रहा हूं जो विरोध किसी विचारधारा के सही या गलत होने के आकलन के पश्चात नहीं करते, बल्कि वे विरोध इसलिए करते हैं कि अमुक पार्टी या राजनेता उन्हें पसंद नहीं है या उनके जाति या धर्म का अनुसरण नहीं करता है। ऐसे में चाहे राजनीतिक पार्टी कितनी भी अच्छी हो विरोध तो करना ही है। बीच में जाति धर्म का पसंद या नापसंद जो आ गया। धन्य है ऐसे मानव जो फेसबुक ट्विटर पर राजनीतिक दुर्भावनाओं के आवेश में आकर  विरोध करते-करते गाली-गलौज भी करने लग जाते हैं। तब आगे क्या होता है सबको पता है। दोनों पक्ष एक दूसरे के पक्ष वाले नेता को लपेट कर गाली देने लगते हैं। यानी नेता अच्छा हो या बुरा किसी हाल में खैर नहीं, उन्हें गाली सुनना ही है।
रही बात गाली देने वाले बेवकूफों की तो मैं ऐसे लोगों को बेवकूफ इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यह लोग बेवकूफ नहीं होते तो गाली-गलौज कतई नहीं करते, बल्कि यह लोग विरोध करते। क्योंकि लोकतंत्र में विरोध जायज है गाली गलौज नहीं। वैसे भी किसी नेता को गाली देने से देश का विकास संभव नहीं है। आप जिस समय को सोशल मीडिया पर बर्बाद कर रहे हो उस समय में काम करो, अपने घर का विकास करो, जिस दिन प्रत्येक आदमी ने अपने घर का विकास कर लिया समझो देश का विकास हो गया। किंतु आपको कुछ करना नहीं है फालतू का समय है जिसे इंटरनेट पर खपाना है। बस अपना घर तो चलता नहीं देश चलाना है Facebook पर। अपने घर का विकास होता नहीं एक नेता से सारा विकास करवा लेना है गाली देकर।
राजनीति का क्षेत्र भी अजीबोगरीब है
खैर बता दूं हम नागरिक हैं हमें भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज नेताओं का विरोध करना ही चाहिए। क्योंकि भारतीय लोकतंत्र में निरंतर सुधार की आवश्यकता है किंतु गाली गलौज से परहेज भी जरूरी है। कुछ नेता बुरे हैं जो अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश की नैया डुबो सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नेता खराब ही है। देश को आजाद हुए 70 साल के करीब होने वाले हैं इस अवधि के बीच चार पांच जंगे लड़ी है भारत ने। फिर भी आज हम संगठित और मजबूत हैं। विश्व स्तर पर हमारी एक अलग पहचान है। हमने बहुत से आयाम स्थापित किए हैं। हम पर कोई बुरी नजर नहीं डाल सकता चाहे वह दुनिया का सुपर पावर ही क्यों ना हो? भारत के इस साख को हासिल करने में देश के एक-एक नागरिक का योगदान है किंतु हमारे नेताओं ने भी कमतर जिम्मेदारियां नहीं निभाई हैं। हां हो सकता है कि कहीं पर राजनीतिक त्रुटि हुई हो किंतु हमें इन सब चीजों को सुधारते हुए नेताओं के साथ खड़े रहना है। चाहे वह किसी भी पार्टी के हो आखिर सरकार तो हमारी ही है देश तो हमारा ही है। वैसे भी सरकारें तो बदलती रहती हैं लेकिन इस बदलाव में देश जिस गति से बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है हम कह सकते हैं निश्चित ही भारत सुपर पावर बनने की ओर अग्रसर है। बस हमारे पूरे देश को एकजुट होने की आवश्यकता है।

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