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राजनीति से दूर भागते हुए लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। बहुत सारे लोग राजनीति से तौबा करने में हिचकते नहीं है।

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राजनीति से दूर भागते हुए लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है
राजनीति से दूर भागते हुए लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। बहुत सारे लोग राजनीति से तौबा करने में हिचकते नहीं है।
गंदगी वही है जहां सफाई नहीं है। बुराई वही है जहां अच्छाई नहीं है और अंधेरा वही है जहां रोशनी नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि सकारात्मकता के अभाव में नकारात्मकता का वर्चस्व स्थापित हो ही जाता है। इसलिए सकारात्मक बने और उन क्षेत्रों में कदम रखें जहां सकारात्मकता ने घर बना लिया है। तभी सुधार संभव है अन्यथा मूकदर्शक बने देखते रहिए समस्याओं और उत्पात की बहती सैलाब को जिससे समाज व समाज की प्रत्येक इकाई डूब डूब कर नष्ट हो रही है।
राजनीति से दूर भागते हुए लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। बहुत सारे लोग राजनीति से तौबा करने में हिचकते नहीं है।
 दरअसल हम आज बात करने जा रहे हैं भारतीय राजनीति पर। इस विषय पर भारत के एक बड़े तबके का कहना है कि राजनीति गंदी हो गई है या राजनीति गंदी चीज है। मेरा मानना है राजनीति गंदी नहीं हुई है बल्कि भारतीय राजनीति गंदी हुई है। और राजनीति गंदी नहीं है बल्कि भारतीय राजनीति गंदी है। किंतु राजनीति का यह गंदगी दूर कैसे होगी ? क्या भारतीय राजनीति पर तोहमत लगा देने से तथा इसका परित्याग कर देने से यह गंदगी दूर हो जाएगी? बिल्कुल नहीं।
राजनीति से दूर भागते हुए लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है।
मेरा मानना है इस तरह से कभी यह गंदगी दूर नहीं होगी। किसी भी प्रकार की गंदगी दूर करने के लिए गंदगी के पास जाना पड़ता है उसे अपने हाथों से साफ करना पड़ता है। गंदगी से दूर भागने से गंदगी नहीं मिटती अपितु बढ़ती है। इसलिए मैं उन खास बुद्धिजीवी वर्ग से कहूंगा कृपया राजनीति को गंदी बताकर उससे दूर न भागे। राजनीति में जैसे भी हो सके हिस्सा लें और अगर कुछ भी नहीं कर सके तो कम से कम वोट देने जाएं और अपने विवेक के आधार पर वोट जरूर करें। किंतु यह कहना बंद करे की राजनीति गंदी हो गई है। अगर गंदी हुई है तो इसे सुधारने की जिम्मेदारी किसकी है ? क्या आप भारत के नागरिक नहीं है? क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है देश के प्रति अगर है ? तो सुधार करें जिस स्तर पर भी हो सके उस स्तर पर ।
अगर आपके परिवार में कोई प्रॉब्लम है तो आप रोएंगे गिलगिलाएंगे परेशान होंगे तथा हर संभव प्रयास करेंगे निजात पाने के लिए। फिर देश के लिए उसका 1% भी क्यों नहीं कर सकते आप ? कभी सोचा है आपने कि यदि यह देश ठीक से नहीं चल पाया तो आप का घर ठीक से कैसे चलेगा ?ठंडे दिमाग से सोचिए देश की स्थिरता प्रत्येक आदमी के लिए जरूरी है। इसलिए राजनीति को ब्लेम कर के अपने दायित्वों से मुंह मत घुमाइए। राजनीति आपका अधिकार है आपका युगधर्म है इससे दूर ना भागे। इसमें हिस्सा लेकर इसके कमियों को दूर करें और लोकतंत्र को ताकत और नई दिशा दें।

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