सपनों का संसार हम अमाप है असीम है। जो भी व्यक्ति इस संसार में विचरण करता है खो सा जाता है

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सपनों का संसार
 सपनों का संसार हम अमाप है असीम है। जो भी व्यक्ति इस संसार में विचरण करता है खो सा जाता है। इन सपनों के संसार में हर कोई विचरण करता है।  खैर सपनों के संसार में होना कोई बुरी बात नहीं है। क्योंकि यही सपनों के संसार तो आदमी को हकीकत के द्वार तक पहुंचाते हैं, जहां सब कुछ साफ-साफ होता है। जहां आंखों के समक्ष अंधेरा नहीं होता, कोई गफलत नहीं होती। इसलिए सपना देखना, सपनों में विचरण करना एक अवसर है।
बस जरूरत है तो केवल अथक परिश्रम करने की। वैसे भी कहा ही जाता है कुछ भी करने या कुछ भी पाने से पहले आदमी सपना देखता है, फिर लग जाता है उसे सच में  बदलने के लिए। दिन रात मेहनत करता है, त्याग करता है, ना समय से खा पाता है और ना ही समय से सो पाता है। फिर जाकर कहीं सफलता हाथ लगती है। इसलिए मैं तो कहूंगा सपना देखिए खूब देखिए, किंतु सपनों की दुनिया से अलग समय जरूर निकालिए उन सपनों को सच करने के लिए।
सपना देखने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप सपने ही देखते रहे और करें कुछ भी नहीं। आपको अपने सपनों को सच में तब्दील करने के लिए मेहनत करना ही होगा। हां इस बीच एक बात और जरूर कहूंगा के आप जब एक बार सपने को सच करने की ठान लेंगे और मेहनत करेंगे तो आपका सपना तो सच होगा ही किंतु साथ साथ जो सफलता प्राप्त होगी उससे आपके हौसलों में बेेहद ही इजाफा होगा। आप हौसलों से लबरेज होंगे आप बुलंदियों में गोता लगाएंगे और फलस्वरुप आपके आंखों में और नए और खूबसूरत सपने आने लगेंगे। जिससे जीवन में पुनः कभी पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि आप जीवन के अंत तक निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। क्या आपको पता है मैं जब छोटा था तो सपने बहुत देखता था, तरह-तरह के ख्वाब आते थे, कभी आईएएस अधिकारी का ख्वाब देखता था, तो  कभी किसी बड़े हॉस्पिटल के बड़े डॉक्टर बनने की, कभी सोचता था आर्मी में जाऊंगा, तो कभी सोचता था अभिनेता बनूंगा, मैं बता दूं कि मैं एक राजनेता और क्रिकेटर बनने का सपना भी देख चुका हूं । इन सपनों को देखना बहुत ही आसान था किंतु पूरा करना बड़ा ही मुश्किल।
इसलिए मैं एक के बाद एक सपने देखता गया और अपने मन से जब पूछा तो मन ने साफ मना कर दिया। मेरे मन ने कहा कि यह सब तुमसे ना हो पाएगा। इसमें सोचने वाली बात यह है कि मन की गवाही ना देने पर मैं थोड़ा भी विचलित नहीं हुआ, बल्कि मैं तो और भी उर्जा के साथ दूसरे सपनों को देखने में लग गया। मैं सपनों ही सपनों में ढूंढने लगा कि मैं ऐसा क्या करूं जिससे सफलता मिल जाए। क्योंकि अब तक जो भी सपने देखे थे उसमें  प्रतिभा की आवश्यकता तो थी ही किंतु साथ-साथ रुपयों की भी बेहद आवश्यकता थी। वह भी हजारों में नहीं लाखों में भी नहीं, करोड़ों में थी।
इसलिए मैंने देखे गए सारे सपनों को रिजेक्ट कर दिया और नए सिरे से सोचने लगा। किंतु सपना देखना कभी नहीं छोड़ा। आपको यह बताते चले  कि मैं इस बीच न्यूज़ पेपर पढ़ने का बड़ा ही शौकीन था। जब मैं न्यूज़ पेपर में आर्टिकल पढ़ता तो मन को शांति मिलती थी। पढ़ते-पढ़ते अचानक ही 1 दिन में आर्टिकल लिखने वालों की ओर आकर्षित हुआ और सोचने लगा कि यह आर्टिकल लिखने वाले कितने अच्छे होते हैं ना। अपने लेखों के माध्यम से लोगों को जागरुक करते रहते हैं और उनका स्वयं का भी नाम होता है।  उसके बाद मैंने लेखकों,  पत्रकारों और कवियों के बारे में गहनता से जानने का प्रयास किया, तब मुझे पता चला कि इस क्षेत्र में भी कैरियर बनाया जा सकता है और इसमें कुछ ज्यादा खर्च भी नहीं था। ₹5 की कलम और ₹10 की कॉपी, बस इतनी सी डिमांड थी इस रोजगार की। मैं तो इससे भी ज्यादा लगाने को तैयार था सफलता के नाम पर। तो मैंने शुरू की इस क्षेत्र में काम और आज आप देख सकते हैं मुझे। मैं महान तो नहीं बन पाया हूं किंतु एक सफल व्यक्ति जरूर बन गया हूं।
दोस्तों मैं अपनी यह कहानी आपको इसलिए बताया कि आप भी सपने देखना ना छोड़ें भले ही आप ऐसे सपने देखते हो जो पूरा नहीं हो सकते। क्योंकि कठिन सपने देखते देखते क्या पता आपके जहन में एक आसान सा सपना आ जाएगा जिससे आपकी तकदीर ही बदल जाएगी। जरा सोचिए मैं अपने कठिन सपनों से घबरा कर  सपना देखना ही छोड़ देता तो क्या मैं सफल हो पाता। जवाब मिलेगा बिल्कुल ही नहीं। तो चलिए सपने देखिए। जिस तरह कठिन रास्तों से होकर सुगम राह मिलती है ठीक उसी प्रकार एक उबाऊ और कठिन स्वप्न के बाद एक अच्छी स्वप्न दस्तक देगी जिससे आपका भाग्य ही बदल जाएगा। किंतु जीवन में जब भी आपके लायक स्वप्न दिखें और मन इसे पूरा करने की गवाही दे तो आप रुके मत। उस सपने को पूरा करने में लग जाए और पीछे के दूसरे स्वप्नों को भूल ही जाएं तो बेहतर होगा।