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चलिए हम आपको बताते हैं कौन – कौन से कारण हैं जिनके कारण भारत में बेरोजगारी की समस्या खत्म नहीं हो पा रही है

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बेरोजगारी की समस्या

बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या रही है। बेरोजगारी की समस्या का स्तर इतना अधिक है कि देश का कार्यशील वर्ग अपने ऊर्जा का उपयोग ही नहीं कर पाता। माता पिता अपनी संतान को पाई-पाई लगाकर पढ़ाते हैं परंतु जब बच्चे की शिक्षा पूरी हो जाती है तो रोजगार ही नहीं मिलता।

 बेरोजगारी की समस्या इतना खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है कि देश का युवा दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है। कितना भी पढ़ो लिखो कितना भी विवेक एकत्रित करो पर कुछ काम नहीं आता। ज्यादातर लोगों को बेरोजगार जीवन ही व्यतीत करना पड़ता है। हालांकि फिर भी देश ने बहुत ही तरक्की किया है। हर क्षेत्र में भारत ने दुनिया के सामने अपना लोहा मनवाया है।
 ऐसा नहीं है कि बेरोजगारी को दूर करने का प्रयास नहीं किया जाता। परंतु यह प्रयास इतना नाकाफी होता है कि बेरोजगारी की समस्या बनी रह जाती है। हालांकि बेरोजगारी भारत की एक ऐसी समस्या है जिसके समाप्त ना होने के बहुत ही कारण है। यदि पूरा देश इन कारणों पर गौर करें और इसका निदान निकाले तो जरूर बेरोजगारी को खत्म किया जा सकता है।
 अब तक इस पर ध्यान तो बहुत दिया गया है परंतु निदान निकालने में उतना प्रयास नहीं किया गया है जिसके कारण देश  बेरोजगारी मुक्त हो सके। किंतु अब वह समय आ गया है कि इस बला से हम सबको मिलकर लड़ना होगा। 21वी सदी का यह दौर आर्थिक दौर है। यदि इस दौर में हमने बेरोजगार के अवसर क्रांतिकारी स्तर पर ना पैदा किए तो निश्चित ही विकास की राहों में हम पीछे छूट जाएंगे।
 वैसे भी भारत दुनिया का सबसे युवा ऊर्जा वाला देश है । यदि इस युवा उर्जा को श्रम के रूप में उपयोग में लाया गया तो भारत को सुपर पावर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
 तो चलिए हम आपको बताते हैं कौन – कौन से कारण हैं जिनके कारण भारत में बेरोजगारी की समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।
बेरोजगारी की समस्या
(1)  पूंजी की कमी ———
भारत एक ऐसे मुल्क की श्रेणी में आता है जहां अमीरी और गरीबी का अंतर काफी बड़ा है और अमीर लोग जहां अपनी पूंजी को सुरक्षित रख कर जीवन में ऐशो-आराम करते हैं, गरीब वहीं दूसरी ओर नौकरीपेशा के लिए ठोकरें खाता फिरता है। देश के अधिकतर गरीब लोग पूंजी के अभाव में रोजगार का सृजन नहीं कर पाते। सोचिए यदि पूंजी की कमी ना होती तो लोगों को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता तथा में पूंजी लगाकर स्वयं लघु आकार का रोजगार पैदा कर लेते। जिसके कारण बेरोजगारी में कमी आती। आज देश के आधी जनता के पास पूंजी नहीं है जिससे कि वह उद्योग धंधों का निर्माण कर सकें।
 ( 2)   लघु उद्योग ————
देश में आज बड़ी बड़ी कंपनियां तो है जहां हजारों की संख्या में लोग रोजगार पाते हैं परंतु भारत जैसे अरबों की जनसंख्या वाले देश के लिए यह कम है। ऐसे में यदि सरकार द्वारा जनता में लघु उद्योगों के प्रति जागरूकता अभियान चलाई जाती तथा उन तक उचित जानकारी पहुंचाई जाती तो लोग पारिवारिक स्तर पर छोटे-छोटे रोजगार का सृजन करते। जिससे बेरोजगारी की समस्या को दूर होती  ही साथ-साथ देश भी तरक्की करता।
 (3)  युवाओं का आलसी होना————-
 जी हां, यह सच है हमारे देश के ज्यादातर युवा आलसी होते हैं। उनके पास कोई सटीक दिनचर्या नहीं होता। वह सफलता तो बहुत प्राप्त करना चाहते हैं परंतु मेहनत कभी नहीं करना चाहते। यदि देश का युवा वास्तव में पढ़ लिखकर यह  ठान ले कि उसे देश को तरक्की की ओर ले जाना है, उसे रोजगार का सृजन करना है तो कुछ सालों में ही देश बेरोजगारी की समस्या से निजात पा लेगा। वास्तव में ज्यादातर युवा अपनी वास्तविक शक्ति के साथ योगदान नहीं देते। युवा अगर आलस  छोड़ दें और अपने जीवन के समय को जाया न करें तो निश्चित ही इतिहास रचा जाएगा। परंतु दुख के साथ कहना पड़ता है कि हमारे देश के युवा के पास काम न करने के बहुत बहाने हैं। हमने देखा है जिस दिन क्रिकेट मैच आता है उस दिन युवा कंपनी छोड़कर मैच देखने चले जाते हैं। हांलाकि आई टी क्षेत्र के पढ़े लिखे युवा आजकल देश के विकास में बड़ा ही योगदान दे रहे हैं। यह काबिले तारीफ है। परंतु उन युवाओं को भी सोचना होगा जो सोकर जीवन गुजार देते हैं बाद में बेरोजगारी को दोष देते हैं, किंतु अपने आलस को दोष नहीं देते। हमारे देश के युवाओं को यह सोचना होगा कि जापान जैसा छोटा देश परमाणु हमला ससहर भी  विकास कर सकता है तो हमारा इतना बड़ा देश भारत विकास क्यों नहीं कर सकता?
(4) जनसंख्या में वृद्धि ———-
जनसंख्या में वृद्धि कहीं ना कहीं सबसे बड़ा अभिशाप है। बेरोजगारी के लिए अकेला एक यही ऐसा कारण है जो सब कारणों पर भारी पड़ता है। आजादी के समय देश की जनसंख्या लगभग 36 करोड़ थी और आज 125 करोड़ है। तो निश्चित ही जिस गति से जनसंख्या में वृद्धि हुई है उस गति से रोजगार का सृजन कर पाना संभव नहीं है। फिलहाल भारत प्रत्येक साल एक आस्ट्रेलिया के बराबर जनसंख्या पैदा कर रहा है। अतः फिलहाल जब तक जनसंख्या वृद्धि पर रोक नहीं लगाया जाता तब तक बेरोजगारी पर विजय पाना दुष्कर ही लगता है।
 (5)  युवाओं को टेक्निकल प्रशिक्षण ना देना ———-
 वर्तमान समय वैज्ञानिकता का समय है। कलपुर्जों का दौर चल रहा है। ऐसे में बेसिक शिक्षा के साथ-साथ युवाओं के पास टेक्निकल प्रशिक्षण होना जरूरी है। हालांकि इस क्षेत्र में विकास हुआ है परंतु अभी भारत का एक बड़ा युवा वर्ग टेक्निकल ज्ञान से दूर है। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां विकास का दौर आना अभी भी बाकी है वहां सरकार को ऐसे संस्थानों का अवश्य ही निर्माण करना चाहिए जहां पर देश के गरीब युवा भी टेक्निकल प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। इससे देश में कुशल कामगारों में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
 (6)  बिजली की व्यवस्था ना होना ———–
 हमारे देश में बिजली का समुचित प्रबंध नहीं है। आज भी हजारों गांव तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। जहां पहुंची भी है वहां समय से रहती नहीं है। अतः बिजली ना होने की वजह से भी पूजी होते हुए भी बहुत से लोग छोटे उद्योग नहीं लगा पाते। मैंने ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो बिजली ना होने के कारण अपना धंधा शुरू नहीं कर पाते। तो कहा जा सकता है कि यदि बिजली की व्यवस्था हो तो लोगों द्वारा स्वयं का धंधा शुरु किया जाएगा और अपने गांव को छोड़कर पलायन शहरों की ओर नहीं करना पड़ेगा। यूपी बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों के लोगों को अक्सर ही शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। क्योंकि वहां पर बिजली की व्यवस्था ना होने के कारण उद्योग-धंधे फूल फल नहीं पाते।
 ( 7 )  उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करना———
 हां बेरोजगारी की समस्या के अन्य कारणों में यह भी एक कारण है। कोई भी उद्योगपति जब बड़ा उद्योग स्थापित करता है तो वह सरकार से आशा रखता है कि सरकार उसके द्वारा लगाए गए पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। अन्य राज्यों के विषय में तो मैं नहीं कह सकता परंतु यूपी-बिहार के विषय में तो मैं  ठीक से जानता हूं कि अब तक वहां की सरकार उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई है। ऐसा और भी कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। ऐसे में उद्योगपति किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेते और बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी रह जाती है।
 ( 8 ) क्षेत्रीय गुंडागर्दी———-
 क्षेत्रीय गुंडागर्दी भी उद्योग-धंधों के लिए घातक है। अक्सर ही मैंने देखा है कि लोकल Gunday उद्योगपतियों से मनमाने पैसे मांगते हैं और ना देने पर तोड़फोड़ करके कंपनी बंद करा देते हैं। इस कारण भी पूंजीपति नए कारखाने लगाने से बचते हैं। जिसके  कारण औधोगिक विकास नहीं हो पाता और बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलने में दिक्कत आती है।
 ( 9 )  जमीन का उपजाऊ होना ———–
हालांकि यह  बहुत बड़ा कारण नहीं है परंतु कई जगहों पर यह भी कारण हो सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में हमने देखा है कि खेतिहर जमीन पर उद्योग लगाने  में सौ बार सोचना पड़ता है। उपजाऊ जमीनों पर उद्योग लगाने से हो सकता है कि कुछ हद तक अनाज का उत्पादन घट जाए। यह तो पता ही है कि अनाज का जीवन में क्या महत्व है ? इस कारण भी कारखाने लगाने में दिक्कत आती है। परंतु देश में बहुत बंजर जमीन खाली पड़ी है जहां कारखाने लगाकर उद्योग का सृजन किया जा सकता है।
  दोस्तों तो यह रहे बेरोजगारी की समस्या के कारण। और भी कारण हो सकते हैं जो हम से छूट गए होंगे। आप भी विचार मंथन कीजिए। मैं तो सभी युवाओं से निवेदन करूंगा कि आप सब मिलकर मेहनत करें। मैं यह नहीं कहता कि आप घूमे फिरे नहीं और मौज मस्ती नहीं करें। यह आपका अधिकार है। यहां पर जीवन का मजा लें परंतु साथ-साथ दिन में 8 घंटा कम से कम काम भी करें। यदि आप अमीर हो तो भी और गरीब हो तो अवश्य ही करना। इससे यह होगा कि औद्योगिक विकास होगा, देश आर्थिक तरक्की करेगा, फिर खुशहाली आएगी और हम सुरक्षित होगे। बेरोजगारी के सभी समस्याओं के होते हुए भी सिर्फ हमारे देश का युवा अगर ठान ले कि बेरोजगारी को दूर करना है तो वातावरण बदलते देर नहीं लगेगा। सारी समस्याएं एक तरफ और युवाओं का मेहनत और हौसला एक तरफ।

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