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चलिए हम विश्लेषण करते हैं कश्मीर समस्या में वह कौन-कौन से कारण हैं जिसके कारण वहां की स्थिति नाजुक बनी रहती है।

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कश्मीर समस्या

 

 

कश्मीर समस्या का जन्म आजादी के बाद पाकिस्तान की साम्राज्यवादी नीतियों के कारण हुआ। जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो सभी छोटे-बड़े रियासतों को यह अधिकार दिया गया कि वह हिंदुस्तान और पाकिस्तान जिधर भी जाए उधर अपना विलय कर सकते हैं या फिर स्वतंत्र रूप से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भी अपना अस्तित्व बरकरार रख सकते हैं।

 जम्मू और कश्मीर भी उस समय एक स्वतंत्र रियासत के रूप में अस्तित्व में था। उस समय जम्मू और कश्मीर के राजा महाराजा हरि सिंह थे । उन्होंने यह निर्णय लिया कि जम्मू कश्मीर को किसी भी पक्ष में विलय स्वीकार नहीं करेंगे और वे स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में जम्मू-कश्मीर के अस्तित्व को बनाए रखेंगे।
 यहां तक तो ठीक-ठाक चलता रहा हिंदुस्तान और पाकिस्तान बनने के साथ-साथ जम्मू कश्मीर भी एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकार कर लिया गया। ऐसे रियासतों का विलय हुआ हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों के तरफ जो आजादी से पहले एक स्वतंत्र रियासत के रूप में अखंड भारत के अधीन अस्तित्व में थे।
 क्योंकि यह बंटवारा दो मजहबों के आधार पर आधारित था इसलिए मुस्लिम बहुल रियासत पाकिस्तान के तरफ विलय हो गए और हिंदू रियासत हिंदुस्तान की तरफ विलय हुए। हालांकि कुछ ऐसे रियासत भी थे जहां के राजा तो हिंदू थे और परंतु आबादी के हिसाब से मुस्लिम बहुल थे ठीक ऐसे ही कुछ ऐसे भी रियासत थे जहां के राजा जो मुस्लिम थे परंतु वहां के आवाम हिंदू थे।
 जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर कुछ इसी तरह के समीकरण वाले रियासतों में शामिल थे। कश्मीर पहले से ही मुस्लिम बहुल राज्य था इसलिए पाकिस्तान की ओछी नजर उस पर पहले से ही थी। यही कारण था कि आजादी के बाद जैसे ही बंटवारा हुआ और पाकिस्तान अस्तित्व में आया वैसे ही उसने कबायलियों और सैनिकों की मदद से कश्मीर में घुसपैठ कर जंग शुरु कर दिया।
 तब राजा हरि सिंह के पास इतना सामर्थ्य नहीं था कि वे पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे सके और अपने राज्य की सुरक्षा को सुनिश्चित कर पाए। अतः पराजय से बचने के लिए भारत सरकार की शरण में आए। भारत सरकार ने उनके गुहार पर सर्च के साथ मदद देने पर सहमति जताई । राजा हरि सिंह के पास अन्य विकल्प नहीं थे अतः उन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए भारत सरकार के शर्तों के मुताबिक भारत गणराज्य में विलय करने का फैसला लिया और अंततः समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया ।
उसके बाद भारत ने कश्मीर में सैनिक कार्यवाही करते हुए कश्मीर को पाकिस्तान के नापाक मंसूबों से बचा लिया। तब से जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा है और सदा रहेगा। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक कामयाबी था। देश के सभी जवानों ने अपनी कुर्बानी देकर भारत माता के मस्तक को और भी ऊंचा कर दिया।
  परंतु कश्मीर भारत का हिस्सा तो बन गया मगर शांति अब तक स्थापित नहीं हो सका है। दरअसल इस अशांति का श्रेय भारत के उन नेताओं को जाता है जो उस समय विराजमान थे सत्ता पर। नेहरु जी ने भारतीय संविधान के तहत 370 धारा को जो स्वीकार कर लिया वह अब तक गले का फांस बना हुआ है।
 हालांकि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर धारा 370 के पक्ष में कभी नहीं थे किंतु विरोध के बावजूद भी नेहरू जी द्वारा स्वीकृति दे दी गई। आज मैं धारा 370 के पक्ष पर नहीं जाऊंगा क्योंकि चर्चा का विषय थोड़ा हटकर है। बाद में इसी धारा 370 के आड़ में वहां जिहादी मानसिकता फूलती फलती रही जिसके कारण वादी हमेशा अशांत रहता था। कभी भी वहां के खून के धब्बे मिट नहीं पाए।
 पाकिस्तान ने भी कश्मीर हथियाने की मंशा लेकर कई बार भारत पर आक्रमण किया परंतु हर बार उसको मुंह की खानी पड़ी। परंतु कहा गया है ना कि कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती। पाकिस्तान वह कुत्ते की पूंछ है जो कभी सीधा नहीं हुआ और बहुत अधिक नुकसान उठाने के बाद भी पाकिस्तान की गंदी नजर आज भी जम्मू कश्मीर पर रहती है और वह निरंतर छद्म युद्ध लड़कर हथियाना चाहता है।
 किंतु सच तो यह है कि वह कभी भी कामयाब नहीं होगा क्योंकि भारत से उसका किसी भी स्तर पर तुलना नहीं है। ना ही साइज मैं , ना ही जनसंख्या में , ना ही हथियार में,  ना ही विज्ञान में और ना ही तादात में और ना ही आर्थिक स्थिति में । भारत हर क्षेत्र में पाकिस्तान से 5 से 10 गुना आगे है।
 भारत हर क्षेत्र में पाकिस्तान से 5 से 10 गुना आगे हैं और  यह असमानता आने वाले समय में और भी बढ़ेगी । ऐसे में यदि भारत ने ठान लिया कि पाकिस्तान को सबक सिखाना है तो पाकिस्तान बर्बाद हो जाएगा। किंतु छद्म युद्ध एक बड़ी समस्या है।
 पाकिस्तान आतंकियों के सहारे इसी तरह का युद्ध लड़ता रहता है साथ में वह कश्मीरी युवाओं को भी धर्म और जिहाद के नाम पर उकसाता रहता है। जिसके कारण वादी में अशांति और अलगाववाद का माहौल बना रहता है।
 तो चलिए हम विश्लेषण करते हैं कश्मीर समस्या में वह कौन-कौन से कारण हैं जिसके कारण वहां की स्थिति नाजुक बनी रहती है।
कश्मीर समस्या
 (1)  अलगाववाद —————-
कश्मीरी अलगाववादी नेता गिलानी के नेतृत्व में हमेशा अलगाववाद का झंडा बुलंद किया जाता रहा है। उनके साथ में कुछ और भी अलगाववादी नेता है जो कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेदार है । फिलहाल कश्मीर में कई अलगाववादी संगठन काम कर रहे हैं जिनका मकसद धर्म के नाम पर कश्मीर को भारत से अलग करना है। ऐसे लोग  कश्मीरी युवाओं को बरगलाते रहते हैं और आए दिन प्रोटेस्ट करते हैं तथा कश्मीर को बंद करते रहते हैं । जिससे वहां का जनजीवन सामान्य नहीं रह पाता। वास्तव में यह अलगाववादी नेता पाकिस्तानी दलाल है जो पाकिस्तान से  पैसे लेकर कश्मीर को अशांत बनाए रखते हैं । इनकी खुद के बच्चे  अमेरिका और ब्रिटेन में पढ़ते लिखते और मौज मस्ती की जिंदगी जीते हैं परंतु यह कश्मीर में दूसरों के बच्चों को उकसाकर भारत के खिलाफ आंदोलन करवाते हैं। जिससे कश्मीरी बच्चे पढ़ लिखकर सही स्थान नहीं पाते और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं। किंतु इसमें सरकार का भी दोष है कि वह ऐसे लोगों के प्रति कड़ाई से नहीं पेश आती और हमेशा दया दिखाती रहती है।
 ( 2 ) आतंकवाद ————
यह एक ऐसा कारण है कि इसके वजह से आजादी के बाद से आज तक कश्मीर का मिट्टी खून से लाल है। पाकिस्तान द्वारा भेजे गए आतंकवादी आए दिन घुसपैठ करके कश्मीर में जवानों के साथ गोलीबारी करते रहते हैं। शायद ही कोई ऐसा महीना खाली जाता हो जब कश्मीर में दर्जनों आतंकवादी ना मारे जाते हैं। आतंकवाद कश्मीर का मूल समस्या है। पाकिस्तान आतंकवाद के सहारे कश्मीर को अशांत कर के अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कश्मीर समस्या की तरफ ध्यान आकर्षित करने पर मजबूर करना चाहता है। किंतु वह कभी कामयाब नहीं होगा क्योंकि किसी भी मुद्दे का समाधान आतंकवाद कभी नहीं हो सकता।
 ( 3 ) कश्मीरी नेताओं का दोगला रवैया ————–
कश्मीरी नेताओं के दोगले रवैया के कारण भी कश्मीर में अमन नहीं आता। आमतौर पर देखा गया है कि जो भी कश्मीरी नेता सत्ता में होता है वह तो भारत के फेवर में बात करता है परंतु जो भी सत्ता से बाहर होता है वह खुलकर आतंकवाद अलगाववाद और पाकिस्तान का समर्थन करता है। कश्मीर के सभी नेता इस नीति को अपनाए हुए हैं और कश्मीरियों को बरगलाकर हिंसा के तरफ ले जाते हैं और उनके खून की आग में अपनी राजनीति की रोटियां सेकते रहते हैं ।
( 4 )  भारतीय राष्ट्रीय नेताओं का दोगलापन ———–
 भारत में भी कई ऐसे राजनेता हैं जिनका दोगला चेहरा जनता के सामने समय-समय पर आता रहता है। ऐसे दोगले किस्म के नेता कश्मीर को तो भारत का अटूट अंग मानते हैं परंतु साथ साथ उन लोगों को भी किसी न किसी रूप में सही ठहराते हैं जो कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते। इस तरह के नेता अपने राजनीतिक फायदे के लिए देश बेच देंगे। खैर ऐसे लोग अब बेनकाब होने लगे हैं तथा कई स्तरों पर इन को आइना दिखाया जा चुका है । जनता ने तो सबक भी सिखाना शुरू कर दिया है ऐसे नेताओं को ।
( 5 ) भारत के राजनीतिक पार्टियों का एकजुट ना होना —————
 कई अवसरों पर देखा गया है कि भारत की राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दों पर भी एक राय नहीं होती। इसके पीछे वोट की गंदी राजनीति होती है । कई बार देखा गया है कि अपने निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय हित को ताक पर रख दिया जाता है। कश्मीर समस्या पर भी ऐसा देखने को मिला है। जब कश्मीर की घाटी सुलग रही होती है तब नेता अपनी राजनीति की रोटी सेक रहे होते हैं।
 ( 6 )  कश्मीर समस्या को धार्मिक रंग देना ———–
खासकर अलगाववादियों और वहां के नेताओं के द्वारा कश्मीर समस्या को धार्मिक रंग दिया जाता है। इन्हीं लोगों के उकसावे पर वहां के लोग धार्मिक नारेबाजी करते हैं और साथ साथ हिंसा करते हैं। कश्मीर के नेताओं और अलगाववादियों के बयानों में धार्मिक रंग को साफ साफ देखा जा सकता है। अलगाववादियों और नेताओं को शायद ऐसा लगता है कि धर्म के नाम पर वहां के लोगों को उकसाना आसान है। हालांकि यह तिकड़म काफी हद तक कामयाब होते दिखता है परंतु कश्मीर को भारत से अलग कर पाना सदा एक ख्वाब ही रहेगा।
 ( 7 ) सेना को अपना काम ना करने देना और उन पर उंगली उठाना ———–
 यह कमजोरी भारतीय सरकार और भारतीय नेताओं की है। जब भी हमारी सेना सख्त होने का प्रयास करती है तब भारत सरकार द्वारा उसे नरम होने पर मजबूर कर दिया जाता है। सेना को कश्मीर में शांति स्थापना के लिए स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जाता। यही कारण है कि आए दिन हमारे सेना के जवान कश्मीर में शहीद होते रहते हैं साथ-साथ आतंकवाद भी खत्म नहीं होता । फिर भी सेना अपने कर्तव्य का पालन करती है पत्थर खा-खाकर । परंतु दुख तो तब होता है कि दिल्ली में बैठे कुछ नेता तथा कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी सेना पर ही उंगली उठाने लगते हैं। जब भी किसी पत्थरबाज को नुकसान पहुंचता है तो यह लोग मानवाधिकार के नाम पर छाती पीटने लगते । किंतु सेना का जवान शहीद होता है तो ऐसे लोगों को दर्द नहीं होता। सेना पर उंगली उठाना तो अब देश के कुछ नेताओं का फैशन बन गया है। जरा सोचिए जब सेना को ही अपना काम नहीं करने दिया जाएगा तो कश्मीर में शांति स्थापित कैसे होगी और कश्मीर समस्या का हल कैसे निकलेगा?
( 8 ) धारा 370 
धारा 370 कश्मीर समस्या का मूल कारण है। इसी आर्टिकल की आड़ में आज कश्मीर में मनमानी चलती है। आतंकवाद फलता-फूलता है तथा वहां का समुचित विकास नहीं हो पाता। जब तक धारा 370 कश्मीर में लागू है तब तक भारत सरकार के हाथ बंधे रहेंगे । ऐसे में वहां की सरकार और अलगाववादियों की मनमानी चलती रहेगी। ऐसे में यह कल्पना करना भी व्यर्थ है कि कश्मीर समस्या का समाधान निकल पायेगा । यानि सभी समस्या का जड़ धारा 370 ही है। भारत सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द धारा 370 को खत्म करें और पूरे जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान के प्रति जवाबदेही के अंतर्गत लाए। कश्मीर समस्या की स्थाई समाधान के लिए यह जरूरी है।
 ( 9 ) पाकिस्तान और आईएसआई ———
 दोनों फैक्टर ऐसे हैं जिनकी दखलंदाजी कश्मीर में हमेशा रही है । दरअसल पाकिस्तान अपने खुफिया एजेंसी आईएसआई के बल पर कश्मीर को अशांत करके भारत से अलग कर देना चाहता है। पाकिस्तान अपने इसी नीति पर काम करता आया है और करता रहेगा । भारत सरकार को कभी इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि पाकिस्तान से कभी भविष्य में संबंध मधुर भी हो सकते हैं । दरअसल हिंदुस्तान और पाकिस्तान की दुश्मनी तभी खत्म होगी जब भारत पाकिस्तान को पूरी तरह से बर्बाद कर दे और टुकड़ों-टुकड़ों में विभक्त कर दे अन्यथा शांति की कल्पना करना बेमानी है।
 दोस्तों यह रहा कश्मीर समस्या का कारण। हमने कोशिश किया कि कश्मीर समस्या पर एक अच्छा लेख आप सबके समक्ष प्रस्तुत करो आगे भी और उपयोगी लेख प्रस्तुत करता रहूंगा।  धन्यवाद !

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