जीवन है तो कठिनाई है। अगर सोचा जाए कि जीवन में कठिनाई हो ही नहीं तो ऐसा हरगिज संभव नहीं है। कठिनाई जीवन की संगिनी है

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कठिनाई

 

 

जीवन है तो कठिनाई है। अगर सोचा जाए कि जीवन में कठिनाई हो ही नहीं तो ऐसा हरगिज संभव नहीं है। कठिनाई जीवन की संगिनी है।

 इस संसार में जीवन जीने वाला प्रत्येक आदमी यह चाहता है कि वह जीवन प्रयत्न कठिनाइयों से बचा रहे पर वास्तव में ऐसा हो नहीं पाता। होता तो केवल इसके विपरीत है। सभी जीवन भर किसी न किसी प्राब्लम में घिरे ही रहते हैं। क्या अमीर क्या गरीब कोई भी अछूता नहीं है?
घर बार छोड़ने वाला व सदा ब्रह्मचारी रहने वाला Sanyasi भी सदा कठिनाइयों से घिरा रहता है। क्या आप सोचते हैं कि तपस्या कठिनाइयों से परे है? गलत सोचते हैं आप। आप कभी उन सन्यासियों से मिलकर पूछिए तब पता चलेगा कि वह कितने कठिनाइयों से होकर गुजरते है तो कहीं सन्यासी होने का धर्म पालन कर पाता है।
दुनिया का अमीर तरीन व्यक्ति भी कठिनाइयों से मुक्त नहीं है। वह भी दिन रात कठिन परिस्थितियों से घिरा रहता है। यदि आप उसके बारे में भी सोचते हैं कि वह निश्चित ही सुखी है तो यह आपकी भूल है। सच तो यह है कि कोई भी इस संसार में निश्चिंत या सुखी नहीं है। कहने का तात्पर्य है कि किसी को भी प्राब्लम नहीं छोड़ती और जीवन में हर कदम सबके साथ होती है।
 इसका कारण आदमी की ललक भी है। हालांकि ललक ना हो तो भी आदमी कठिनाइयों से बच नहीं सकता। किंतु आदमी की ललक जो कि लालच के काफी करीब होती है वह जीवन की कठिनाइयों को कुछ ज्यादा ही बढ़ा देती है। सोचिए हम सब ललक की जाल में किस तरह फंसे हुए हैं।
हम जो चाहते हैं वह हो भी जाता है तब भी हमारी ललक खत्म नहीं होती। हम सोचने लगते हैं यह हो जाता, वह हो जाता, यह कर लेते, वह कर लेते, यहां पहुंच जाते, वहां पहुंच जाते, मकान बना लेते, महल बना लेते। और जब यह सब ख्वाहिशें पूरी हो जाती है तो बुर्ज खलीफा के स्वप्न आने लगते हैं।
 वास्तव में यह ललक यह स्वप्न ही कठिनाइयों को जन्म देती है। आदमी जितना अलग अलग तरीके से सोचता है उतना ही अलग अलग तरह की कठिनाइयां सामने खड़ी हो जाती है। अतः आदमी की सोच ही कठिनाइयों की जननी है। सोच पर भी आदमी के कठिनाइयों का विकास होता है।
 ऐसे में अगर सोच को कंट्रोल किया जाए तो कुछ हद तक कठिनाइयों को सीमित किया जा सकता है। परंतु पूर्णता रोका नहीं जा सकता। किंतु हमें यह सोचना चाहिए कि कठिनाई हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। आप सोचिए तो यदि जीवन में कठिनाई ना होती तो क्या आप कुछ कर पाते। उत्तर नकारात्मक ही मिलेगा। प्राब्लम ही इंसान को प्रेरित करती है कुछ नया करने के लिए।
 जब तक हमें जीवन में कठिनाई परेशान नहीं करती है तब तक हम कुछ भी नहीं करते तो बिना कठिनाई के हम क्या करेंगे ? जहां कठिनाई का अभाव रहता है वहां मनुष्य आलसी हो जाता है। आप सोच कर देखिए जब कठिनाई आती भी है तो भी हम कुछ नहीं करना चाहते तो बिना प्राब्लम के हम क्या करेंगे  भला ?
हमारे लिए कोई भी कार्य जब तक महत्वपूर्ण रहता है तब तक हम उसे टालते रहते हैं। किंतु यह हालत तब छूमंतर हो जाती है जब उस महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए करो या मरो की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इंसान की आदत है जब तक कठिनाई उसके लिए घातक ना हो जाए तब तक उसकी आंखे नहीं खुलती।
परंतु देखा जाए तो प्राब्लम जीवन जीने के लिए जरूरी है। वही लोग सक्सेज होते हैं जो कठिनाइयों को सहज स्वीकार करते हैं और आगे बढ़ते हैं। कठिनाई तो होनी ही होनी है। हर आदमी को कठिनाइयों से सामना करते हुए जीवन जीना पड़ता है। बिना कठिनाई के जीवन का होना अकल्पनीय है।