परमाणु बम से किसी का भी भला नहीं होगा। इसलिए इस दानव को नष्ट करके पूरे दुनिया को डर के साए में जीने से बचाया जाए

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परमाणु बम से किसी का भी भला नहीं होगा। इसलिए इस दानव को नष्ट करके पूरे दुनिया को डर के साए में जीने से बचाया जाए

 परमाणु बम
 आदमी जिस गति से विकास किया है वह काबिले तारीफ है। परंतु इस विकास के गति के साथ साथ आदमी ने अपने विनाश के औजार भी तैयार कर लिए हैं। निरंतर विकास करती इस आर्थिक दुनिया में कुछ ऐसे आविष्कार हुए हैं जिसका निर्माण तो अपनी सहूलियत और सुरक्षा के लिए किया गया है। परंतु दूसरे परिदृश्य में देखा जाए तो यह पूरे मानवता और पूरे पृथ्वी के लिए घातक है।
 मैं बात कर रहा हूं परमाणु बम का। परमाणु बम जिन जिन देशों के पास है उनके लिए वास्तव में वरदान की तरह है। क्योंकि परमाणु बम होने की अवस्था में कोई भी दुश्मन मुल्क हमला करने के लिए हजार बार सोचेगा। परंतु दूसरे दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह एक अभिशाप से भी कम नहीं है। क्या कोई जंग  इतनी बड़ी होनी चाहिए कि पूरे मानव समाज को ही विलुप्त कर दे। शायद ही कोई होगा जो ऐसा चाहेगा।किंतु जब भी भविष्य में परमाणु युद्ध होगा तो संभव है कि यह स्थिति आन पड़े।
आज जिस तरह से परमाणु हथियारों का तजुर्बा हो रहा है और अनेक परमाणु संपन्न मुल्कों में जिस तरह से तनाव है वैसे तो  यही कल्पना किया जा सकता है कि भविष्य में पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में है। तो क्या यह अंदाजा लगाया जाए कि विज्ञान जो की इस सदी में मानव समाज के लिए वरदान साबित हुआ है वह एक दिन अभिशाप भी बन जाएगा ? खैर भविष्य में क्या होगा कोई नहीं जानता ? मेरा मानकर चलना है कि हर परमाणु संपन्न मुल्क को पता है कि यह कितना घातक हथियार है। ऐसे में शायद ही कोई इसका इस्तेमाल करें। ईश्वर उन सब को आगाह करें जो परमाणु युद्ध को महज एक खेल की तरह लेते हैं।
1945 में अमेरिका ने जापान के 2 शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर फैट मैन और लिटिल बॉय नामक परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया था। उसके बाद जो नरसंहार हुआ उसके कई गवाह आज भी जीवित है। जिस तरह से लाशें बिछा और जिस तरह से पूरा शहर खंडहर में तब्दील हुआ भगवान ना करे दोबारा ऐसी मंजर फिर कभी पृथ्वी पर हो। आज भी वह शहर उस नरसंहार की गवाही देते हैं।
 खैर मेरा तो मानना है कि यह अमेरिका द्वारा किया गया एक कायरतापूर्ण कारवाही था।यह बिल्कुल ही युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। अपने सुपर पावर स्टेटस को बरकरार रखने के लिए जिस प्रकार अमेरिका ने इतना घृणित कृत्य किया उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। हालांकि अमेरिका ने कभी भी इस कृत्य के लिए आधिकारिक तौर पर माफी नहीं मांगी।
 खैर उस वक्त का इतिहास जब कोई व्यक्ति पढ़ता है तो अनायास ही भय मन में समा जाता है। ऐसे में हर आदमी यही सोचता है कि वह उस व्यक्ति की तरह है जो बारूद की ढेर पर बैठकर सिगरेट पी रहा है। कब एक हल्की हवा के कारण चिंगारी नीचे गिर पड़े कोई नहीं जानता।
हालाकि फिर भी जिन देशों के पास यह घातक हथियार है वह फूले नहीं समाते। वह सोचते हैं कि यह बम उन्हें अजय बनाता है। पर उन्हें यह नहीं पता कि अजय मानसिकता के पीछे एक घातक पराजय भी है। एक ऐसा पराजय  जिसका पश्चाताप करने के लिए कोई नहीं बचेगा। एक ऐसा पराजय जहां से इतिहास भी मौन धारण कर लेगी। इसलिए मैं तो कहूंगा कि इंसान परमाणु बम के विषय पर धैर्य रखें।
 पूरे मानव समाज को यह विचार मंथन करना चाहिए कि परमाणु बम से किसी का भी भला नहीं होगा। इसलिए इस दानव को नष्ट करके पूरे दुनिया को डर के साए में जीने से बचाया जाए।