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संसार में एक माँ ही है जिसका कर्ज इंसान पर सदा रह जाता है। मां की ममता का कोई मोल नहीं

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माँ
माँ से बढ़कर कुछ भी नहीं ! यह दुनिया, यह धरती, आसमान, यह चांद सितारे, यह पहाड़, यह झरने, यह जो दुनिया में हम आनंद ले रहे हैं ना, सब मां की बदौलत है। इसलिए माँ का दर्जा सभी से ऊपर है। संसार में एक माँ ही है जिसका कर्ज इंसान पर सदा रह जाता है। मां की ममता का कोई मोल नहीं।
इस दुनिया में किसी भी जीव का जन्म देने के लिए ईश्वर को भी माँ का कोंंख उधार लेना पड़ता है। तब सोचिए ईश्वर की भी नजर में क्या होगी माँ की अहमियत? माँ ही तो एक है  जो निश्छल, निर्मल, पवित्र और पावन है। मां 9 महीने पेट में ढोती है। असीम पीड़ा को सहकर जन्म देती है। वह अपने संतान की दुनिया की सबसे बेहतरीन निगरानी करती है। संतान अगर रोता है तो वह भी रोती है। संतान अगर हंसता है तो वह भी हंसती है। कौन सा रिश्ता है और दूसरा कोई जो किसी के खुशी के लिए अपनी खुशियां निसार कर देगा इस पूरे ब्रह्मांड में।
 माँ के जैसा कोई नहीं। मुझे यह नहीं पता कि हमारे सारे गलतियों को ईश्वर मरने के बाद माफ करेगा कि नहीं। किंतु इतना जरुर जानता हूं कि मेरी मां मेरी सारी गलतियों को बिना शर्त मुस्कुराते हुए माफ कर देगी। मां की ममता की छाया वह अद्भुत साया है जिसके तले संसार का सबसे मधुर शीतलता है। जिसने भी मां को खुश कर दिया जिसने थी मां का दिल जीत लिया वह सबसे बड़ा उपकारी है। सबसे बड़ा सन्यासी है। वही सबसे बड़ा भक्त है। वही सबसे बड़ा विजेता है। उसके लिए ईश्वर का दरवाजा खुला है। जीवन में और जीवन के बाद उसका प्रत्येक पल स्वर्ग है।
 संसार में बहुत लोग ऐसे हैं जो मां को इज्जत नहीं देते। कुछ तो बचपन से ही बिगड़ैल होते हैं और मां की बात नहीं सुनते किंतु कुछ तो ऐसे भी हैं कि शादी के बाद बिगड़ जाते हैं। ऐसे लोग अक्सर शादी से पहले मां की बहुत इज्जत करते हैं। देखकर तो यूं लगता है जैसे कि दुनिया के सबसे बड़े शरीफ हों। किंतु जैसे ही शादी होती है और घर पर पत्नी का गृहप्रवेश होता है उसके स्वभाव  में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। फिर मां मां नहीं रह जाती बल्कि पत्नी ही माँ की जगह ले लेती है।
 माँ
 ऐसे लोगों से मैं आग्रह करूंगा कि यह परिवर्तन ठीक नहीं है। जिस मां ने पाल पोस कर इतना बड़ा किया जिसने तुम्हारे लिए  भीगे बिस्तर में सोया। जिसने 9 महीने कोख में रखा। जिसने अपने खून से बने दूध को तुम्हें पिलाया। उस के प्रति इतनी घृणा क्यों? क्या उसके एहसानों का यह सिला देना जायज है ? क्या तुमने कभी सोचा है उसके प्रति तुम्हारी एक अनदेखी उसे कितनी पीड़ा पहुंचाती होगी ?
कभी अकेले में बैठ कर मंथन कीजिएगा कि अगर वह ना होती तो क्या तुम इस दुनिया में आए होते ? क्या उसके बिना इस दुनिया में तुम्हारा वजूद संभव हो पाता ? क्या जिस पत्नी के लिए तुम मां को दुख दे रहे हो वह पत्नी तुम्हें मां के बदौलत नहीं मिली है ? यदि मां ने जन्म ना दिया होता तो तुम किस पत्नी के साथ होते ?
अत: यह तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे पत्नी का भी कर्तव्य बनता है कि वह यह सोचे कि जिस मां के कारण उसे तुम जैसा पति मिला है उस मां की इज्जत करना चाहिए। यह सब को ही सोचना चाहिए कि इस दुनिया में आप जो आनंद ले रहे हो उस आनंद को लेने के लायक आपको माँ ने ही बनाया है। वह भी अपने बरसों के आनंद को त्याग कर। तो क्या आप उस मां को अपनी सेवा नहीं दे सकते? जरा ध्यान से सोचिए! माँ को खोने के बाद दोबारा मां नहीं मिलेगी। फिर पछताना पड़ेगा और मां को याद कर करके रोने के सिवाय कुछ नहीं बचेगा जीवन में । इसलिए मां के साथ ऐसा सुलूक मत कीजिए जिससे आपको जीवन भर पछतावा की अग्नि में जलना पड़े।
सभी धर्म और सभी धर्म ग्रंथों में मां को आदर देना सिखाया गया है। मैं इतना तो धर्म ग्रंथों के विषय में नहीं जानता कि मैं बताऊं कि किस किस धर्म ग्रंथ में मां के विषय में क्या-क्या कहा गया है ? परंतु इतना जरुर जानता हूं कि सभी धर्म ग्रंथ मां की सेवा करना सिखाते हैं। हिंदू धर्म में तो मां को ईश्वर से भी  पूजनीय माना गया है। मैं कुछ इस्लामिक धर्म गुरुओं को भी सुना है यह कहते हुए कि मां के कदमों में जन्नत होता है।
 तब सोचिए यदि  आप माँ के एहसानों की नाफरमानी करते हैं तो आप के साथ ईश्वर का क्या रवैया होगा? यदि आप मां को इज्जत नहीं देते तो निश्चित ही आप पर ईश्वर का कहर गिरना तय है। चाहे जीते जी गिरे या मरने के बाद गिरे। परंतु आप ईश्वर के नाराजगी से नहीं बच पाएंगे।
हां एक और बात है, माँ के आदर के बिना पूजा पाठ पुण्य प्रताप सब व्यर्थ है। आप चाहे रोजाना सत्संग करें कीर्तन करें माला फेरे और कितने भी ग्रंथों का अध्ययन करें। किंतु मां के आदर के अभाव में कुछ भी फलदाई नहीं है। आपका ईश्वर प्रेम तभी फलित होगा जब आप मातृप्रेम से ओतप्रोत होंगे। आप गंगा नहाने से पवित्र हो या ना हो परंतु मातृप्रेम में नहा लिए तो सब पवित्र होगा।
 आप सोचिए तो आप किस देश में रहते हो ? आप की संस्कृति क्या रही है ? आपके बुजुर्गों ने क्या सिखाया है और आपको आपके इतिहास से क्या शिक्षा मिलती है ? यह वही भारत है जहां पर राम ने कैकई जैसी मां के वचनों का भी पालन किया और पुरुषोत्तम हो गए। यह वही भारत है जहां श्रीकृष्ण ने अपनी माता पिता को कंस मामा की जेल से स्वतंत्र करवाया। यह वही भारत है जहां श्रवण कुमार ने माता पिता को कंधे पर लेकर तीरथ करवाया। यह वही भारत है आज जहां का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले मां का आशीर्वाद लेता है। कहने का तात्पर्य यह है कि आप भी भारतवर्ष के निवासी हो और अपने बुजुर्गों के दिखाए रास्ते पर चलकर अपने संस्कृति की पवित्र धारा को आगे बढ़ा सकते हो।
 मैं तो आखिर में यही कहना चाहूंगा कि हम सब को अपने संस्कृति से कुछ सीखना चाहिए और अपने माँ का ख्याल रखना चाहिए मां खुश तो खुदा खुश।

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