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होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है

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होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है
होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है

होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है। उसे तो बस प्यारी होती है मौज मस्ती खाली-खाली से बेपरवाह जिंदगी। आदमी बेपरवाही में जिंदगी को जीना चाहता है, आलस करता है, किसी भी प्रकार का काम नहीं करना चाहता। वह चाहता है कि उसकी सारी ख्वाहिशें अपने आप अनायास ही पूरी हो जाए बैठे-बिठाए बिना कोई युक्त्ति लगाए। हां दोस्तों मैं सच कह रहा हूं वास्तव में कोई भी आदमी कुछ करना नहीं चाहता है और बदले में यह इच्छा रखता है कि उसे हर चीज अपने आप प्राप्त हो जाए। किंतु ऐसा ना कभी हुआ है और ना ही कभी होगा।

 बिना मेहनत के, बिना दिमाग लगाए और बिना प्रयास किए वास्तव में कोई भी कुछ भी नहीं कर सकता। सोचिए अगर आपके आगे कोई थाली में खाना रख दे तो भी आपको उसे उठाकर अपने हाथों से ही खाना पड़ेगा। यदि आपको कोई अन्य व्यक्ति अपने हाथों से खिला भी दे तो भी आपको मुंह तो चलाना ही पड़ेगा।
होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है
 अब आप सोच रहे होंगे कि मैं आप सबको इतना सब क्यों बता रहा हूं। दरअसल मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आप अपने जीवन में कामयाबी के लिए जो भी लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं उसके लिए आपको कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा। यानी कि आप कुछ भी नहीं करेंगे तो कुछ भी नहीं पा सकते। कुछ भी पाने के लिए आपको कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा।
 इसलिए आप कार्य से भाग नहीं सकते। यदि आप कार्य से भागेंगे तो सफल नहीं होंगे। आप आलस करेंगे और बिना कुछ किए आप कोई इच्छा रखते हैं तो आप एक गलतफहमी की जिंदगी जी रहे हैं।
होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है
कार्य  किया जाए तो या न किया जाए तो समय तो अपना कार्य सदा करता रहेगा। समय का काम चलना है और वह बिना रुके थके चलता रहेगा और लगातार। अतः आप को यह निर्णय लेना है कि अपनी सफलता के लिए समय के साथ चलेंगे या रुककर समय को आगे निकल जाने का मौका देंगे।
 सोच लीजिए यदि समय निकल गया तो आप सिर्फ पछताएंगे और कुछ नहीं कर पाएंगे। खैर पछताना नहीं चाहते हैं तो आलस को दरकिनार कर दीजिए। रूटीन बनाइए बैठकर ध्यान से अपने दिल से पूछिए कि आप वास्तव में चाहते क्या हो? आपको जीवन में करना क्या है? वह लक्ष्य क्या है जिसे आप हासिल करना चाहते हैं ? जब यह मंथन पूरा हो जाए तो संकल्प लेकर एक नई ऊर्जा के साथ यह कदम बढ़ाइए।
होशो हवास लेने के बाद आदमी दुनियादारी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे यह ख्याल ही नहीं रहता कि समय किस गति से आगे बढ़ रहा है
 ध्यान रहे कदम बढ़ाने से पहले आपको यह सोच लेना चाहिए कि रास्ते में कठिनाई आएंगे। उससे आपको लड़ना होगा डरना नहीं है। चाहे मुसीबत कैसे भी हो उससे सामना करेंगे । उसे हराएंगे और हराकर बढ़ते जाएंगे।
 दरअसल होता यह है कि आदमी जब भी कुछ नया करने जाता है तो वह उस समय अतिउत्साहित होता है। उसे लगता है कि सब कुछ बेहद आसान है पर जैसे ही वह अपने लक्ष्य की ओर कुछ कदम बढ़ाता है तो कठिनाइयां सामने आने लगती हैं। ऐसे में वह एक्सेप्ट नहीं किया जाता है कि रास्ते में हालात ऐसे भी आएंगे। अतः ऐसे कठिनाइयों से रूबरू होकर डर जाता है। यहीं पर उसके इच्छाशक्ति पर भारी दबाव पड़ता है और वह स्वयं को हरा महसूस करने लगता है।
 ऐसे में जब मनोबल गिर जाता है तो वह आगे नहीं पढ़ पाता और सारे सपने धरे के धरे रह जाते हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि आप पहले उत्साहित जरूर होंगे परंतु रास्ते की कठिनाइयों को भी ध्यान में रखिए। आप सोच कर चलिए की कठिनाई आएगी और आप उस से लड़ेंगे। ऐसा सोचकर बढ़ने से किसी भी मुसीबत का अनचाहा दबाव आपके ऊपर नहीं बनेगा और आप निरंतर सफल होते जाएंगे।
 तो देखते क्या है एक कदम बढ़ाइएं और निरंतर बढ़ाते रहिए। ध्यान रहे आपके कदमों का चाल समय के चाल के साथ मिलना चाहिए। कुछ भी करने में समय के सदुपयोग का भी बड़ा महत्व होता है। समय का सदुपयोगी कभी भी हारता नहीं है। दुनिया में जितने भी समय का सदुपयोग किया है वह सदा जीत का झंडा गाड़ कर आया है।
 तो देखते क्या है समय के कदमों में कदम मिलाकर दरिया  को पार कीजिए। नदियों को, समंदरों को, बिहड जंगलों को लांघ दीजिए। पहाड़ों से ऊपर उठ जाइए आसमान में । लिख दीजिए अपना नाम इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में अमिट स्याही से।

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