बेवजह गाली देना राजनीतिक पार्टियों और राजनीतिक विचारों में बंधे लोगों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। वैसे भी राजनीतिक गाली गलौज सही नहीं है लोकतन्त्र में

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बेवजह गाली देना राजनीतिक पार्टियों और राजनीतिक विचारों में बंधे लोगों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। राजनीतिक गाली गलौज सही नहीं है लोकतंत्र मेें।
राजनीतिक गाली गलौज
 जब आप अपने प्रतिस्पर्धी पार्टी के नेता को गाली दे रहे होते हैं तो शायद आपको लगता है कि आप उसे एक्सपोज कर रहे हैं और आपको उस पर बढ़त प्राप्त हो रहा है। पर सच्चाई इसके बिल्कुल ही विपरीत है।
 दरअसल जब आप tv या सोशल मीडिया पर बैठकर किसी को गाली बकते हैं तो उस क्षण तो आपको आत्म संतुष्टि मिल जाती है किंतु आप भाप भी नहीं पाते और उसी क्षण जनता की नजर में राजनीतिक गाली गलौज की वजह से गिर जाते हैं।
 भाई सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का वार्तालाप आपके मोहल्ले का वार्तालाप की तरह नहीं है जहां आप जैसे मर्जी जो चाहे बोल दे। खैर मोहल्ले में गाली गलौज करने के एवज में कई बार मार भी खा जाते हैं लोग, पर मीडिया पर कोई आपको मारेगा तो नहीं पर आपकी जो सम्मान की क्षति होगी वह कहीं अपूर्णनीय होगी, जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
 इसलिए आप कहीं भी राजनीति या अन्य किसी प्रकार के वार्तालाप को करें तो सिर्फ तर्कसंगत वार्तालाप ही करें।  राजनीतिक गाली गलौज करने की कोशिश ना करें, और अगर गलती से मुंह से अपशब्द निकल जाए तो फौरन माफी मांग ले। माफी मांगने से आप का कद घटेगा तो नहीं किंतु आपको एक मर्यादित व्यक्ति के रूप में देखा जाएगा।
अपने मान सम्मान के हानि या लाभ के लिए आप स्वयं जिम्मेदार है। यह आप ही को सुनिश्चित करना होगा कि आपका व्यवहार कैसा हो कि आपकी इच्छा अनुसार लोग आप को महत्व दें।
  बेवजह राजनीतिक गाली गलौज का खामियाजा भुगतने हुए मैंने बहुत लोगों को देखा है। एक बार सोनिया जी चुनाव प्रचार के लिए गुजरात गई हुई थी। तब चुनाव प्रचार जोरों पर था और सभी नेता इसे भुनाने में लगे थे। मुझे अच्छी तरह याद है जब भाषण देते वक्त सोनिया जी ने नरेंद्र मोदी जी को मौत का सौदागर कहा था ।
मौत का सौदागर कहना भले ही गाली के स्तर का वाक्य ना हो पर था तो अमर्यादित। नरेंद्र मोदी ने भी सोनिया के इस वाक्य को खूब भुनाया और जम के चुनाव प्रचार किया। तब सोनिया जी के मुंह से निकले इस 1 जुमले ने चुनाव परिणाम की दिशा ही बदल दी थी।
 उस चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ BJP ने जो प्रचंड जीत हासिल की उसे सालों तक याद किया गया। बाद में बहुत से विश्लेषकों ने कांग्रेस के हार का जिम्मेदार सोनिया गांधी जी के उस एक जुमले “मौत के सौदागर” को ठहराया।तो कहा जा सकता है कि एक अमर्यादित टिप्पणी ने कांग्रेस को खाई में लाकर गिरा दिया।
 उसके बाद शुरू होता है 2014 का लोकसभा चुनाव। इस चुनाव में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की चर्चा शुरू होने लगी। उस समय दूसरी पार्टियों ने जिस प्रकार गाली-गलौज और अपशब्दों का प्रयोग मोदी के लिए किया वह निंदनीय तो था ही, पर दूसरी तरफ मोदी जी के राजनीतिक कद को बढ़ाने में संजीवनी भी साबित हुआ।
 उस समय मोदी जी को कोई चाय वाला बोलता था, कोई गुजरात का कसाई कहता था, कोई हिटलर कहता था। मतलब किन किन शब्दों का प्रयोग नहीं हुआ मोदी जी को नीचा दिखाने के लिए। इस बीच मोदी जी अपना विकास का एजेंडा लेकर आगे बढ़ते रहें। बदले में चारों ओर से उनको गालियां पड़ती रही।
सोशल मीडिया पर भी कम गालियां नहीं पड़ी मोदी जी को। सोशल मीडिया पर तो हद हो गई थी। खुलेआम उनके मां बहन को गालियां दी जाती रही। परिणाम स्वरुप एक बहुत बड़ा ध्रुवीकरण  हुआ जिसके कारण BJP की ऐतिहासिक जीत हुई। देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी को  इतिहास के सबसे बड़े हार से सामना करना पड़ा। इस चुनाव का निरीक्षण करने पर पता चलता है कि मोदी के इतनी बड़ी जीत में उनके प्रतिस्पर्धियों का राजनीतिक गाली गलौज और अमर्यादित टिप्पणीयों का बड़ा हाथ रहा।
  आगे आते हैं दिल्ली चुनाव। इस चुनाव में मोदी जी और उनकी पार्टी बीजेपी ने केजरीवाल के साथ हूबहू वही किया जो लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ अन्य पार्टियों ने किए थे। जिस के नतीजे में एक नई पार्टी जिसका कोई वजूद ही नहीं था और जिसके राजनीति में कूदे हुए जुम्मा जुम्मा 4 दिन हुए थे उसने BJP को बुरी तरह पराजित कर दिया। कुल 70 सीटों में से बीजेपी को मात्र 3 सीटें प्राप्त हुई और आम आदमी पार्टी को 67 सीटें प्राप्त हुई । देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की तो खाता भी नहीं खुल सकी। तो यह रहा अमर्यादित जुमलों के आधार पर लड़े गए चुनाव के नतीजे।
 हालांकि बीजेपी ने इन गलतियों से सबक नहीं लिया और बिहार विधानसभा में पुनः इन गलतियों को दोहराया जिस के नतीजे में नीतीश लालू और राहुल के गठबंधन पार्टी से हार का मुंह देखना पड़ा और नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री चुने गए। किंतु फिर आता है उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जिसमें काफी कुछ सीख चुकी भाजपा पार्टी ने सतर्कता बरती।
अब आता है यूपी चुनाव। जहां चुनावी जवाब में कांग्रेस और समाजवादी गठबंधन द्वारा अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया। गधा, हिटलर, कातिल, बूचड़ ऐसे ऐसे शब्दों का प्रयोग जनता द्वारा चुने गए मोदी के लिए किया गया । जिसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी को एकतरफा जीत मिली और योगी आदित्यनाथ CM बने।
 तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि चुनाव में जो लोग अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं अथवा राजनीतिक गाली गलौज कर रहे हैं,  वास्तव में वे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी ही मार रहे हैं, क्योंकि जनता देश में सिर्फ और सिर्फ स्वच्छ राजनीति चाहती है।