पहले से मजबूत हुई है मोदी राज में देश की विदेश नीति

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Nrendra modi

विपक्षी चाहे कितना भी शोर शराबा करें पर तमाम आरोपों को दरकिनार करते हुए भारत की जनता ने मोदी को सबसे पापुलर नेता बनाया हुआ है । मोदी जी के इस प्रसिद्धि के पीछे कहीं ना कहीं उनकी विदेश नीति अधिक कारगर रही है । कहीं ना कहीं आम जनता को मोदी के विदेश नीति पर पहले से अधिक भरोसा है ।

हालांकि बीच-बीच में उनके विदेश दौरों पर लोग उंगली उठाते रहे हैं परंतु इसका कोई अस्तित्व साफ साफ नजर नहीं आता कि जिससे मोदी के विदेशी दौरों को गलत ठहराया जा सके । कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो विदेश नीति के मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है ।

भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक एक कदम देश के पक्ष में ही रहा है । परंतु यह बात उन लोगों के गले नहीं उतरती जो लोग सरकार की आलोचना में दिन रात लगे हुए हैं ।

किंतु आप देश से बाहर किसी भी कोने में जाइए आप विदेशी सरजमीं पर यह महसूस करेंगे कि मोदी सरकार से पहले की सरकार में बनी धारणा बहुत हद तक बदल चुकी है । हालांकि पूर्णता बदलाव की गारंटी मैं नहीं दे सकता क्योंकि चीजें एकाएक नहीं बदल जाया करते किंतु जो भी तब्दीली हुई है सम्मानजनक हुई है ।

कई विरोधी भी नरेंद्र मोदी को श्रेय देते हैं कि उन्होंने भारतीय हितों की विश्व मंच पर मजबूती से पैरवी की है और वैश्विक मामलों में भारत की अहमियत का लोहा मनवाया है । विरोधियों ने मोदी को यह श्रेय देकर चौका सा दिया है । भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने चरणबद्ध तरीके से देश को उस निर्णायक दिशा की ओर उन्मुख किया है जिस ओर कदम को बढ़ाने की उनसे पहले की सरकारों ने साहस नहीं दिखाई । इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने विश्व स्तर में आ रहे इंकलाबी बदलावों में शायद ही इतनी बुद्धिमता से ताल बैठाई हो । निश्चित ही मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति बेहद मजबूत हुई है। सत्ता के शीर्ष पर मोदी के आगे कुछ सालों तक विराजमान होने से माना जाता है कि भारतीय विदेश नीति अलग नजर आएगी ।

एक ओर जहां भारतीय राजनीति दक्षिण पंथ की ओर मजबूती से जुड़ा हुआ है वहीं दूसरी और आधारभूत बदलाव भी तेजी से हुआ है । आज भारत दुनिया की तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है । यह तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था मोदी के 2014 में सिंहासन पर बैठने के बाद देखने को मिली है । खैर भविष्य के गर्भ में क्या छुपा हुआ है यह तो कोई नहीं जानता किंतु मैं भारतीय कूटनीति को लेकर आशावादी जरूर हूं।

एक बात बता दें कि  विरोधी विरोध तो करेंगे ही,   आलोचक असहमति जताते रहेंगे, वैसे आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है किंतु तमाम असहमति के बीच जिस तरह मोदी की रणनीति आगे बढ़ती रही है उसी तरह कुछ सालों तक अभी और कायम रहेगी। क्योंकि अभी तक विपक्ष कोई ऐसा नेता प्रस्तुति ही नहीं कर पाया है जिससे यह कहा जाए कि मोदी का विकल्प मिल चुका है।

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