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वर्ग संघर्ष आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है

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वर्ग संघर्ष आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है

वर्ग संघर्ष

वर्ग संघर्ष आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है

आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या वर्ग संघर्ष है। वर्ग संघर्ष एक ऐसे अभिशाप की तरह है जो पूरे मानवता को दानवता कि दलदल में फांसती रहती है।

पूरा इतिहास साक्ष्य है कि वर्ग संघर्ष का परिणाम समस्त संसार में कितना विनाशकारी और कितना घातक सिद्ध हुआ है । अब तक इस संसार में जितना भी अत्याचार और हत्याएं अपराधियों के कारण नहीं हुआ है उससे कहीं लाख गुना ज्यादा तो धर्म और राष्ट्र के नाम पर हुआ है ।

दरअसल धर्म और राष्ट्र एक ऐसा विचारधारा का रूप लेते जा रहे हैं जो कि सारे संसार में अशांति का कारण बन गए हैं । आप पूरे दुनिया के वर्तमान परिस्थिति पर नजर दौड़ा कर देख दीजिए हर जगह धर्म और राष्ट्र के नाम पर कलह किसी ना किसी रूप में विराजमान है ।

यह थोड़ा कम या अधिक हो सकता है परंतु अपवाद शायद ही मिले इसका । भारत में तो भाषाएं और क्षेत्रीय विविधता ने वक्त वक्त पर लोकतंत्र को कमजोर करने का कार्य किया है । परंतु अहोभाग्य भारत का की लोकतंत्र सशक्त और जीवित है।

वर्ग संघर्ष और आधुनिक दुनिया

वैसे भारत में देखा जाए तो भाषाई द्वेष और क्षेत्रीयता ने अपराधों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है । हालांकि स्वतंत्रता से पूर्व ही यह संघर्ष ने पूरे भारत को बहुत पीछे धकेल रखा है।  सवर्ण और असवर्ण का भेदभाव तो जगजाहिर है। हिंदू मुसलमान का भी विद्वेष आप देख ही चुके हैं । भारत और पाकिस्तान का बंटवारा भी तो इसी वर्ग संघर्ष का परिणाम था ।

यदि वर्ग विद्वेष ना होता तो लोग धर्म या जाति के आधार पर एक दूसरे से अलग ना होते । आज शायद पाकिस्तान अस्तित्व में ही नहीं आता अपितु भारत अखंड ही होता। इस संघर्ष की इस दुष्परिणाम से भी हमारे देश के नेता अब तक सबक नहीं ले सके हैं , ना ही देश के लोग ही वर्ग संघर्ष के दुष्परिणामों को जानते हुए भी सचेत हैं। निरंतर ही वर्गों में भेद भाव बढ़ता जा रहा है और वर्ग संघर्ष की नींव को मजबूती मिल रही है ।

वर्ग संघर्ष और आधुनिक दुनिया

खैर इस संघर्ष के लिए कहीं ना कहीं हमारे देश के राजनेता अधिक जिम्मेदार हैं । क्योंकि वोट की राजनीति साधने के लिए नेताओं ने असामान्य रूप से वर्ग संघर्ष को बढ़ावा दिया है । देश में किसी भी अप्रिय घटना घटने पर राजनेता अपने वोट की राजनीति करने से कदापि बाज नहीं आते । यह जब भी भलाई की बात करते हैं तो उसमें सच्चाई कम और नानाटकीयता ज्यादा होती है । चाहे हिंदू मुस्लिम दंगे हो या फिर वैमनस्यता की बात हो , नेता वहां राजनीति करने पहुंच जाते हैं और कहीं ना कहीं राष्ट्रहित को दांव पर रखकर वर्ग संघर्ष को बढ़ावा दिया जाता है ।

यह परिस्थिति कमोबेश जातीय वैमनस्यता में भी देखने को मिलता है । नेता अलग-अलग जातियों के वोट लेने के लिए बिना किसी आधार के ही आंदोलन करवाते हैं तथा जातिय और धार्मिक विद्वेष को समाज में कायम रखते हैं । बाद में ये अपने राजनीतिक लड़ाई में इस सब चीजों को सत्ता में आने के लिए उपयोग करते रहते हैं।

नेताओं को इस कार्य में काफी हद तक सफलता भी मिला है । हमने समय-समय पर देखा है कि नेता इस वर्ग संघर्ष का फायदा उठाकर सत्ता की चौखट तक आते रहे हैं । वैसे मैंने भारतीय राजनीति में कदापि ऐसा समय चक्र नहीं देखा जब कोई भी राजनीतिक पार्टी या कोई भी राजनेता शुद्ध रूप से राजनीति करके सत्ता पर पहुंचा हो।

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