आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है

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आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है

आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है

आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है

हालांकि अक्सर ही लोग कहा करते हैं कि मैं अकेला हूं परेशान हूं अकेला क्या क्या करूं वगैरा-वगैरा? कहना गलत नहीं है अकेले आदमी पर जब अधिक बोझ पड़ता है तो विचलित हो ही जाता है । समाज में आसपास आपके बहुत से ऐसे लोग मिलते होंगे जो दुनियादारी के जिम्मेदारियों के खींचतान में इतने व्यस्त होते हैं कि उन्हें अपने लिए समय ही नहीं मिलता है । कई बार तो खींज में उन्हे यह भी कहते सुना गया है कि यार अकेले में क्या क्या करूं? यह करूं कि वह करूं? ( आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है  ) मेरी तो जिंदगी ही नरक हो गई है। तात्पर्य है कि अकेले आदमी पर जब बोझ चारों ओर से पड़ता है तो वह तनाव में आ जाता है । लेकिन इस तनाव के अलग-अलग कारण हो सकते हैं । हो सकता है कोई व्यक्ति अधिक बोझ सहन ना करने वाला हो पर उस पर अधिक बोझ दे दिया जाए तो वह तनावग्रस्त हो जाएगा । दुनिया में ऐसे लोग भी तो है जो थोड़ी सी परेशानियों के कारण टेंशन में आ जाते हैं।
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आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है

यानी ऐसे लोग जब शत-प्रतिशत कठिनाइयों से दूर होते हैं तभी खुश रह पाते हैं । ऐसे लोगों के जीवन में जब भी कोई मुसीबत आती है तो वह दुखी हो जाते हैं और सही रास्ते का चुनाव नहीं कर पाते । इसी कारण आम तौर पर देखा गया है कि यह लोग मुसीबत का एक साधारण सा झोंका झेलने में ही परेशान हो जाते हैं । यह सच भी है कि किसी भी कार्य या जिम्मेदारी को अकेले पूरा करने में और कई लोगों द्वारा मिलकर एक साथ पूरा करने में फर्क है । ( आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है  )  संगठित रूप से किसी कार्य को किया जाए तो आसान हो जाता है पर अकेले जब कोई कार्य को किया जाता है तो कहीं ना कहीं कठिन तो हो ही जाता है । परंतु ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अकेला किसी कार्य को अंजाम नहीं दिया जा सकता । पर हर कार्य को अकेले करना संभव नहीं है।
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आदमी किसी कार्य को अकेला स्वयं ही कर सकता है

  किंतु मेरा खुद का मानना है और तजुर्बा भी है कि यदि कार्यो में वह कार्य जो इंसान को महान या महानतम बना देता है वह अकेले ही किया जाता है।  कुल मिलाकर अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता परंतु अकेला चना भाड़ फोड़ दे तो इतिहास बन जाता है । निश्चित ही वह चना महान है जो अकेले भाड़ फोड़ दे । यानी साधारणतया आम कार्यों को करने के लिए एक आदमी काफी हो सकता है या बहुत से लोगों की जरूरत पड़ सकती है ।  परंतु असाधारण कार्यों को करने के लिए आदमी अकेला काफी है। जैसे कि आपको उच्च कोटि का डॉक्टर, इंजीनियर, नेता, अभिनेता, गायक, संगीतकार, गीतकार, लेखक जो भी बनना है इसमें सिर्फ आप की लगन और मेहनत काम आएगी। इस सब मंजिलों तक पहुंचने के लिए आपके पैरों को अग्रसर होना पड़ेगा । इसमें कोई हाथ नहीं बटा सकता । लेकिन एक चीज तो यह भी निश्चित है कि आप जब इन लक्ष्यों को पूरा कर लेंगे और जब आप श्रेष्ठ सम्मानित या महान बन जाएंगे तो टाइटल भी आपको ही मिलेगा ।
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तो इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य यह था कि आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है भी या कि नहीं। तो दोस्तों अकेले किसी कार्य को कर पाने या ना कर पाने का सवाल परिस्थितियों और उस कार्य पर निर्भर करता है जिस कार्य को किया जा रहा है । साथ साथ ही यह भी सत्य है कि अधिकतर लोग तो अकेले कुछ कर ही नहीं पाते पर जो लोग असाधारण प्रतिभा के धनी होते हैं वह बहुत कुछ अकेले ही करके दिखा देते हैं।

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