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किसानों द्वारा आत्महत्या करना देश के लिए एक गंभीर विषय है

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किसानों द्वारा आत्महत्या करना देश के लिए एक गंभीर विषय है

किसानों द्वारा आत्महत्या करना

किसानों द्वारा आत्महत्या करना देश के लिए एक गंभीर विषय है

किसानों के द्वारा किया जा रहा आत्महत्या देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है । जिस देश में एक प्रधानमंत्री ने नारा दिया हो जय जवान जय किसान और उस नारे को देशवासी गर्व से लगाते आए हो उस देश में किसानों की दयनीय दशा निश्चित ही चिंता का विषय है । आज किसान खेतों में जीवन लगाकर काम करता है और सूखे या बाढ़ की स्थिति में उसकी फसल नुकसान हो जाते हैं तो उसे कोई पूछता भी नहीं है। ( किसानों द्वारा आत्महत्या करना ) अतः खेतों में मेहनत करके सवा सौ करोड़ लोगों का पेट पालने वाला किसान इतना मजबूर हो जाता है कि उसे अपने जीवन यापन के लिए कर्ज लेना पड़ता है।  परंतु बात कर तक ही सीमित हो तो बात अलग है। कर्ज लेने के बाद भी जब उसके हालात नहीं बनते तथा इतने बिगड़ जाते हैं कि पिछला कर्ज चुकाना तो दूर पुनः कर्ज लेने की नौबत आ जाती है तो ऐसे हालात में जब किसान अपने भविष्य को अवरुद्ध पाता है और उसे कर्ज और भुखमरी के दलदल से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता तो वह खुदकुशी कर लेता है ।

किसानों द्वारा आत्महत्या करना देश के लिए एक गंभीर विषय 

सोचिए जिस देश में किसान अन्नदाता हो पसीना बहाकर सबका पेट पालता हो उसे अपने जिंदगी को जीने के लिए भी कोई रास्ता नजर नहीं आता है यह देश के लिए कितने शर्म की बात है । दुनिया जानती है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है भारत की अर्थव्यवस्था खासतौर पर कृषि पर निर्भर है । ऐसी अवस्था में सरकार द्वारा किसानों की समस्याओं का निदान न करना अन्याय है ।( किसानों द्वारा आत्महत्या करना ) मेरा मानना है कि पंडित लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा देकर पहले ही संदेश दे दिया था कि इस देश में किसानों और देश के सीमा पर पहरा कर रहे जवानों की अनदेखी नहीं की जा सकती है । जब यहां बात हो रही है किसानों की तो मैं निश्चित तौर पर भारत सरकार से पूछना चाहूंगा कि फिर देश में किसानों की इस तरह से अनदेखी क्यों हो रही है ? क्या इस तरह के रवैया से किसानों के साथ साथ देश के हितों की भी अनदेखी नहीं हो रही है जब देश की अर्थव्यवस्था में किसानों का अहम योगदान है तो ?
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किसानों द्वारा आत्महत्या करना

यहां मैं यह बता देना चाहूंगा कि चाहे सरकार किसी भी पार्टी की रही हो परंतु आजादी के बाद से आज तक किसानों के हितों को नजरअंदाज किया गया है। पर क्या अब वह दिन नहीं आ गया है कि दिल्ली में पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर किसानों की समस्याओं का निदान निकाले ? ( किसानों द्वारा आत्महत्या करना ) क्या देश में ऐसे ही किसान मरते रहेंगे ? आज देश का कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां किसान आत्महत्या नहीं कर रहा हो । रोज ही अखबार टी वी में किसानों के मौत का समाचार आ रहा है । क्या भारत सरकार को कुछ ऐसा प्रबंध नहीं कर देना चाहिए कि किसानों के आत्महत्या की मनहूस खबर दोबारा टीवी अखबार में देखने पढ़ने को ना मिले? क्या भारत सरकार को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए कि किसान आत्महत्या करने के बजाय अपनी जिंदगी हंसी खुशी जी सके ?

कुछ ही दिनों दिल्ली में धरने पर बैठे तमिलनाडु के किसानों को देखा था, सच कहूं तो आंसू नहीं आए पर दिल बहुत रोया था । मैं तो पूछूंगा ही की किसानों के अच्छे दिन कब आएंगे ? ( किसानों द्वारा आत्महत्या करना ) किसान गुजरे जमाने में भी हल चलाकर मर जाता था और आज भी कर्ज में डूब कर मर रहा है । आखिर किसानों को उनका हक कब मिलेगा ? किसान कंकाल गले में लटका कर प्रदर्शन कर रहा है , चूहा खाकर प्रदर्शन कर रहा है , यहां तक कि पेशाब तक पीने पर मजबूर हुआ है । जो भी हो किसानों के साथ यदि अन्याय होगा तो सरकार से सवाल तो पूछा जाएगा । आखिर ऐसी नौबत ही क्यों आती है जो किसानों को यह सब करने के लिए विवश होना पड़ता है ? जरूर कहीं ना कहीं व्यवस्था द्वारा कोई त्रुटि हो रही है जिसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए।

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