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चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से इसलिए तुलना हीनहीं हो सकती

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चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से इसलिए तुलना हीनहीं हो सकती

चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत

चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से इसलिए तुलना ही नहीं हो सकती

चीन और भारत की सीमाएं करीब करीब 4000 किलोमीटर लंबी है । उसमें भी पहाड़ी इलाके जिसमें पेट्रोलिंग करना हमारे जवान के लिए बड़ा ही कठिन होता है । यह कठिनाई चाइना के जवानों के लिए भी है। जरा सोचिए हमारे जवान कितना मशक्कत के बाद देश की सरहदों की हिफाजत करते हैं । वहां की मौसम वहां की परिस्थिति चाहे कितनी भी प्रतिकूल हो पर हमारे यह जवान तनिक भी नहीं घबराते और देश की सेवा में चौबीसों घंटे लगे रहते हैं । वाकई में जवानों सेवा कितना कठिन और कितना तारीफ के लायक है सेल्यूट हमारे इन जवानों को।

  खैर इन सब के बीच आए दिन चीन द्वारा देश की सीमा में घुसपैठ होती रहती है । चीन पहले तो दादागिरी कर के भीतर घुस आता है और विरोध करने पर आंखें दिखाने लगता है। ( चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से )जब जब भारत सरकार चीन सरकार के समक्ष घुसपैठ का मुद्दा उठाते हैं तो चीन यह कह कर पल्ला झाड़ लेता है कि उसके सैनिक अपने सरहद में है । हालांकि काफी कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से ऐसे मसलों को समझाना पड़ता है और वह पीछे हटते तो है मगर बार-बार हरकत करने से बाज नहीं आते । क्योंकि भारत 1965 में चाइना से युद्ध हार चुका है । यह वह लड़ाई थी जिसमें भारत को स्विजरलैंड के बराबर जमीन खोना पड़ा था । इस हार का असर भारत पर दीर्घकालिक पड़ा है । नतीजे में वह बार-बार आँख दिखाने से बाज नहीं आता ।

चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से

परंतु फिर भी युद्ध हारने के बाद भी भारत इतना असहाय नहीं होता किंतु हम क्या करें ? हम पहले आजाद हुए चाइना बाद में आजाद हुआ । फिर भी हम विकास के स्तर पर उससे पीछे रह गए । चीन हमेशा सही दिशा में चलता रहा ऐसे में वह इतना आर्थिक विकास कर लिया कि भारत और चाइना के बीच कोई तुलना ही नहीं रह गया । दूसरी ओर भारत दिशाहीन रहा। नेताओं ने भ्रष्टाचार किए। सरकारी अफसरों ने मन भर खजाना लूटा । फल स्वरूप आर्थिक विकास चीन की तरह नहीं हो पाया । गरीबी नहीं जा पाई ढांचागत विकास का सदा आभाव रहा। अब जब आप आर्थिक विकास नहीं करेंगे तो गरीबी दूर कैसे होगी हथियार कैसे खरीदोगे  या फिर देश में ही कैसे बनाओगे । ( चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से ) अतः हथियार के अभाव में आप सेना को मजबूत नहीं बना सकते ।

दूसरी ओर चीन ने इतना आर्थिक विकास किया है कि उसकी गिनती धनी मुल्कों में होने लगी है । फल स्वरूप अपने फौज को वह भारत की तुलना में अधिक शक्तिशाली बना पाने में सफल रहा है । यही कारण है कि आज चीन हमसे लगभग पावर के मामले में 3 गुना अधिक मजबूत है ।

चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से

चीन और भारत दोनों ही बड़े देश है ।वकई क्षेत्रों में दोनों एक दूसरे के आसपास रहते तो है किंतु सैन्य शक्ति के विषय पर ऐसा नहीं है । चीन भारत से कहीं 3 गुना आगे निकल चुका है । ऐसे में हम मीडिया या सोशल मीडिया में डायलॉग तो मार सकते हैं कि हम चीन को हरा देंगे , परंतु हमें यह सोचना चाहिए कि सैन्य शक्ति के आकलन के हिसाब से भारत इस स्थिति में नहीं है कि वह चीन से युद्ध का खतरा मोल ले सके। माना कि यदि हमने चाइना को सबक सिखा भी दिया पर नुकसान हमारा ही ज्यादा होगा । वैसे भी चाणक्य ने कहा है कि दुश्मन जब मजबूत हो तो उससे युद्ध नहीं समझौता करना चाहिए । इसलिए भारत के लिए समझौता ही सही विकल्प है चीन के साथ युद्ध तो कोई विकल्प ही नहीं है ।

वैसे भी हमें पाकिस्तान की तरफ से चुनौती है । अतः  हमें इस चुनौती से निकलने के बाद ही किसी अन्य मुल्क से लड़ने की चिंता करनी चाहिए। मैं तो रोज ही देख रहा हूं फेसबुक पर तरह तरह के कमेंट आते हैं। सब चीन को सबक सिखाने के मूड में ही होते हैं।( चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से ) फेसबुक पर ही चीन पर कब्जा करने लगते हैं। किंतु मैं अपने देश के युवाओं से पूछना चाहता हूं कि क्या यह सही है ? क्या आपका फेसबुक पर किया गया बकवास भारत को चीन पर जीत दिला देगा या फिर भारत की तरक्की आपके देश को चीन से आगे ले जाएगी । आप देखिए तो जरा अपनी आंखों से असत्य का चश्मा उतार कर और सत्य का चश्मा लगाकर।

चीन का युवा सुबह उठता है तो शाम तक काम धंधा देखता है , किंतु भारत का युवा सुबह उठता है तो या तो क्रिकेट देखता है या फिर फेसबुक चलाता है । यदि भारत का युवा सुबह उठे और शाम तक अपने काम धंधा पर ध्यान दें और उसके बाद फेसबुक क्रिकेट की फिक्र करें तो देर नहीं लगेगी देश को आगे बढ़ने में। वैसे भी देश चीन से पीछे है परंतु उसका प्रतिस्पर्धी भी है । अब इस प्रतिस्पर्धा में भारत को युवा ही जीता सकते हैं । किंतु हम तो ठहरे सोशल मीडिया के कीड़े। सोशल मीडिया के चक्कर में तो हम मां बाप की भी फिक्र नहीं करते देश की क्या चिंता करेंगे ? अति तो इतनी हो गई है कि हम बाथरूम में भी ऑनलाइन होते हैं।( चीन कहीं बहुत आगे निकल चुका है भारत से )

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