जब दिल से मेहनत किया जाए तो सुखद परिणाम की आशा तो रहती है

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जब दिल से मेहनत किया जाए तो सुखद परिणाम की आशा तो रहती है

जब दिल से मेहनत किया जाए तो सुखद परिणाम की आशा तो रहती है

जब दिल से मेहनत किया जाए तो सुखद परिणाम की आशा तो रहती है । भला कौन होगा दुनिया में जो परिश्रम करने के बाद भी उत्तम फल की आशा ना रखता है । हालांकि गीता में कहा गया है कि कर्म करो फल की चिंता ना करो। परंतु वैसे किंचित ही कहीं लोग मिलेंगे जो फल की चिंता ना करते हो । जब भी कोई व्यक्ति किसी कार्य को करता है तो उसका मन मस्तिष्क उससे प्राप्त होने वाले भावी परिणाम पर भी होता है। गीता में फल की चिंता ना करने की बात इसलिए कहा गया है कि किसी कार्य का फल ईश्वर द्वारा सुनिश्चित किया जाता है कि वह हकदार को कब प्राप्त होगा । ऐसी अवस्था में श्रमिक को उसके द्वारा किए गए उम्मीद के मुताबिक समय पर फल ना मिला तो उसके लिए दुख का कारण बन जाएगा । मैं इतना बड़ा गीता का ज्ञान ही तो नहीं हूं पर मेरा मानना है कि शायद इसी वजह से फल की चिंता ना करने को कहा गया है । परंतु वास्तविकता तो यही है कि हम सभी फल की चिंता करते हैं । जो बहुत त्यागी होता है वही फल की चिंता नहीं करता और निरंतर कर्म करता रहता है ।

दरअसल वर्तमान में किसी द्वारा जो कुछ भी किया जाता है वह भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है । कहीं ना कहीं बात मन में रहती ही है कि अमुक कार्य को करने से हमारी भविष्य की परिस्थिति अमुक प्रकार की होगी । हम इतने तरक्की कर चुके होंगे ? तब तक हम फला वस्तु को प्राप्त कर लेंगे ? यानी योजना मस्तिष्क में उपजती रहती है । फलस्वरूप हम सदा ही अपने जीवन को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते रहते हैं । हमारी यही योजनाएं हमारे जीवन में अगले कदम पर भाग्य और दुर्भाग्य का निर्धारण सुनिश्चित करती है। हमारी योजना जिस कोटि की होगी परिणाम भी उसी कोटि के मिलेंगे।

जब दिल से मेहनत किया जाए तो सुखद परिणाम की आशा तो रहती है

  फिर भी आपने कई ऐसे लोगों को देखा होगा जो शिक्षित और बुद्धिमान होते हैं । वह सदा ही सही योजना बनाते हैं किंतु सफलता नहीं मिलती । ऐसा बहुत सारे लोगों के साथ होता है । हालांकि वह अपने आप से उम्मीद ज्यादा रखते हैं इसलिए असफल होने के बाद दुख सहना पड़ता है । परंतु मेरा मानना है कि कभी भी जीवन में मिले हार को नकारात्मक रूप में नहीं लेना चाहिए । परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपत्ति अथवा विपरीत हो परंतु सकारात्मक रहना चाहिए।

हारने पर समझिए कि भाग्य आपका इंतहान ले रहा है जिसमें आज नहीं तो कल आप पास होंगे ही होंगे । आपको पास होने से कोई नहीं रोक सकेगा क्योंकि आपके पास साहस है। गिरने के पश्चात भी उठकर चलना शुरू कीजिए यह प्रक्रिया जितनी बार दोहराने पड़े दोहराईए। आप देखेंगे बदकिस्मती आपके कदमों में घुटने टेक देगी । आप अपने श्रम से जैसी भी परिणाम की आशा रखते हैं वह अंततः मिल जाएगा । प्रमुख समस्या यह नहीं है कि आप असफल हो जाते हैं । समस्या तो तब बड़ी होती है कि आप असफल होने के बाद पुनः प्रयास करना ही छोड़ देते हैं । यही वह कारण है जिससे मनुष्य महान कार्य नहीं कर पाता अन्यथा ईश्वर ने क्षमता तो सबको ही दिया है।

अहंकारी व्यक्ति अपने साथ-साथ दूसरों का भी अहित करता है

आदमी किसी कार्य को अकेला कर सकता है
जीवन में पढ़ाई का सदा ही महत्व रहा है और सदा ही रहेगा
आदमी के लिए कुछ असंभव होता ही नहीं है असंभव तो एक वहम है

दिल की आवाज सुनिए सफलता आपको जरूर मिलेगी

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मेरा नाम "संजय कुमार मौर्य " है और मैं देवरिया ( यूपी ) का रहने वाला हूं । मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर, लेखक, कवि और कथाकार हूं । मैं हिंदी साहित्य में रुचि रखता हूं और हमेशा कविताओं और कहानियों का सृजन करता रहता हूं। इसके अलावा भी हमारे पास बहुत सारी चीजों की जानकारियां है जिसे मैं इस ब्लॉग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करता हूं। दोस्तों हमें अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करना बहुत ही अच्छा लगता है अतः इसी उद्देश्य से हमने सन 2018 जनवरी में www.sitehindi.com को शुरू किया, जो कि आज एक सफल वेबसाइट बन चुका है और निरंतर वेब की दुनिया में उचाईयों की ओर बढ़ रहा है । इसके अलावा मेरा उद्देश्य अपने राष्ट्रभाषा हिंदी की सेवा करना है और इसे जन-जन तक पहुंचाना भी है । अगर मैं अपने इस उद्देश्य में सफल होता हूं तो मैं स्वयं को भाग्यशाली समझूंगा। आप भी हमारे इस ब्लॉग को पढ़े और हमारे इस उद्देश्य को पूरा करने में हमारी सहायता करें । धन्यवाद !

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