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भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से समृद्ध हो रही भारतीय भाषा है

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भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से समृद्ध हो रही भारतीय भाषा है

भोजपुरी भाषा

भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से समृद्ध हो रही भारतीय भाषा है

भोजपुरी भाषा उत्तर भारत खासकर पूर्वी यूपी और बिहार में बोली जाने वाली मुख्य भाषा है । हालांकि शहरी इलाकों में मुख्य रूप से हिंदी ही बोली जाती है परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में भोजपुरी भाषा की ही धाक है। फिर भी शहरों में भोजपुरी का प्रयोग हिंदी के साथ-साथ आम तौर पर होता है । यह भाषा सुंदर मधुर और सक्षम भाषा है । इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि पूर्वी यूपी और बिहार की बात की जाए तो प्रतिनिधित्व भोजपुरी ही करती है । हालांकि यूपी और बिहार के लोगों द्वारा सालों से प्रयास करने पर भी अब तक भी यह आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं हो पाई है। फिर भी भोजपुरी भाषा अपनी सरलता और मिठास के कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जन भाषा बनी हुई है ।

इस भाषा को मान्यता ना प्राप्त होने और खुद की लिपि ना होने के बावजूद यहां के लोगों ने इसे सहेज कर रखा है । हालांकि भोजपुरी को लिखने के लिए देवनागरी का ही प्रयोग होता है किंतु यह भाषा हिंदी से भिन्न है । किंतु फिर भी यदि देखा जाए तो हिंदी के विकास में भोजपुरी ने जो सहयोग दिया है वह अद्वितीय है, पर इसके अलावा भोजपुरी का अपना अस्तित्व मजबूत है । भोजपुरी अपने विकास पथ पर निरंतर अग्रसर है । सरकार द्वारा सहयोग ना करने के बाद भी यह भाषा जिस प्रकार दिन दोगुनी रात चौगुनी आगे बढ़ रही है काबिले तारीफ है । यह इसके अभिव्यक्ति की सरलता और शब्दों के मिठास के कारण ही संभव हो सका है ।

भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से समृद्ध हो रही  है

मेरा मानना है कि सरकार द्वारा दोयम दर्जे के व्यवहार के बाद भी भोजपुरी भाषा सुदृढ़ है तो इसके लिए इस भाषा की प्रशंसा तो की ही जानी चाहिए । पर उन लोगों की भी प्रशंसा होनी चाहिए जिन्होंने अपने आम जिंदगी में इस भाषा को अपनाकर इसे विपुल किया है।

  पूरे भारत की सभी भाषाओं पर यदि ध्यान से समीक्षा की जाए तो वास्तविकता तो यही है कि हिंदी के बाद यदि कोई भाषा देश में सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा बोली जाती है तो वह भोजपुरी भाषा है । उत्तर प्रदेश और बिहार में यह भाषा तो बोल ही जाती है साथ-साथ सीमावर्ती राज्यों में भी यह भाषा बहुतायत बोली जाती है । भोजपुरी भाषा भले ही अपने जन्म स्थान भारत में अधिकारिक भाषा नहीं बन पाई हो तथा उपेक्षित की गई हो पर पड़ोसी देश नेपाल में तो इसको मान्यता मिल चुका है । पता नहीं किस आधार पर इस भाषा की अनदेखी की जा रही है कुछ समझ नहीं आता । छत्तीसगढ़ झारखंड में भी तो इस भाषा की स्थिति यूपी बिहार की ही तरह है । इसके अलावा दिल्ली मुंबई कोलकाता या देश के किसी कोने में भी चले जाइए आपको भोजपुरी बोलते हुए लोग मिल ही जाएंगे ।

भोजपुरी भाषा

देश की तो छोड़िए भोजपुरी भाषा अब विदेशों में भी लोकप्रिय हो चुकी है । मॉरीशस में तो भोजपुरी वहां की मुख्य भाषाओं में से एक है । आज यूपी बिहार के लोग जहां रोजी रोटी की तलाश में नौकरी करने जहां जहां गए हैं वहां भोजपुरी को अपने साथ लेकर गए हैं। चाहे देश के भीतर हो या विदेश भोजपुरी हर जगह मिल ही जाएगी ।

भोजपुरी के विकास में भोजपुरी गानों का बहुत महत्व रहा है । हालांकि इसके विकास में मौखिक किस्से कहानियों का भी बहुत योगदान रहा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होती रही है । इसके अलावा यह नौटंकी नाच आर्केस्ट्रा के माध्यम से भी आगे बढ़ी है लेकिन लोकगीतों ने भोजपुरी भाषा को जन-जन तक पहुंचाया है । शारदा सिन्हा और मालिनी अवस्थी जैसे दिग्गज गायिकाओं ने तो भोजपुरी के विकास के लिए अपना जीवन ही लोकगीतों को जन-जन तक पहुंचाने में खपा दिया । इसके अलावा भरत शर्मा , मदन राय और विष्णु ओझा सरीखे बहुत से गायको ने अपना यथाशक्ति योगदान दिया है । अभी नए नए गायकों ने अपना योगदान तो दिया है परंतु कहीं ना कहीं उनके गानों में अश्लीलता का प्रदर्शन रहा है ।

आधुनिक गाने आमतौर पर ज्यादा अश्लील ही बनाए जा रहे हैं पर बावजूद इसके भोजपुरी भाषा को सहयोग ही मिला है । वैसे में अश्लीलता के पक्ष में बिल्कुल नहीं हूं पर बात जब आती है कि क्या अश्लील गानों द्वारा भी भोजपुरी भाषा को सहयोग हुआ है तो मेरा उत्तर होगा हां हुआ है । कहीं ना कहीं खासकर नए तबके को इस तरह के गानों ने आकर्षित जरूर किया है । हो सकता है कि इस तरह के गानों के अभाव में नई पीढ़ी हिंदी या इंग्लिश गानों की ओर उन्मुख हो जाते । इसमें युवाओं का दोष नहीं है कहीं ना कहीं जमाना ही ऐसा है कि आजकल अश्लीलता आम हो गया है । पर इसका मतलब यह नहीं कि आप जनता के सामने अश्लीलता परोसने जाए। आधुनिकता और संस्कृत में तालमेल बिठाकर कलाकारों को चलना होगा । कला से पैसे कमाने के साथ साथ संस्कृति की रक्षा भी कलाकारों की ही जिम्मेदारी है ।

भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से हो रही है समृद्ध

भोजपुरी भाषा

माना कि आप सहयोग दे रहे हैं भोजपुरी के विकास में किंतु भोजपुरी को भोजपुरी रहने दीजिए पैसों की लालच में घालमेल मत कीजिए । फिल्मों में तो आइटम सॉन्ग के नाम पर जो कचरा फैलाया जा रहा है उस पर भी ध्यान देना होगा । माना की फिल्मों में भोजपुरी को जन जन तक पहुंचा दिया है यहां तक कि अन्य भाषी लोग भी इसे फिल्मों के माध्यम से समझने की कोशिश कर रहे हैं परंतु शुद्धता का ध्यान दिया जाना चाहिए । प्रत्येक डायलॉग में अंग्रेजी को ठोसना ठीक नहीं है । हमारी भाषा है भोजपुरी इसलिए हमें इसका ख्याल रखना होगा ।

दूसरी ओर साहित्यकार भी भोजपुरी भाषा को समृद्ध करने में लगातार लगे हुए हैं । नए नए लेखक लगातार भोजपुरी पुस्तकों का सृजन कर रहे हैं । अब तो भोजपुरी के कुछ चुनिंदा पुस्तकों को विश्वविद्यालयों में भी पढ़ाया जाने लगा है । वर्तमान में भोजपुरी के लेखकों में मनोज भावुक सबसे ऊपर है । उन्होंने पहली बार नया प्रयोग करते हुए भोजपुरी में गजल की पुस्तक लिखी है जो कि काफी लोकप्रिय हुई है । दोस्तों यदि आपको कभी समय मिले तो मनोज भाऊ की पुस्तक ” तस्वीर जिंदगी के ” गजल संग्रह जरूर पढ़िएगा । बहुत ही बढ़िया पुस्तक लिखा है मनोज भावुक जी ने । उनकी एक और पुस्तक ”  चलनी में पानी ” है । और भी नए-नए लेखक आए हैं भोजपुरी के क्षेत्र में जो कि अपना योगदान दे रहे हैं ।

तो कहा जा सकता है कि भोजपुरी युवाओं को अपनी तरफ खींच रही है । बस देरी है तो सिर्फ इस बात की की कब भोजपुरी आठवीं वी अनुसूची में शामिल की जाती है। जिस दिन भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा निश्चित ही वह दिन ऐतिहासिक होगा । पर अभी भोजपुरी समाज प्रतीक्षा में है देखते हैं कब यह प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त होती है।

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