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विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है

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विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है

विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है

विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है

देश में राजनीति बदली है हालात बदले हैं और साथ साथ राजनीति में विरोध करने के तरीके में भी बदलाव हुआ है । पहले के राजनीति में राजनेता विरोध या आलोचना तब करता था जब उसका प्रतिस्पर्धी कोई गलती या चूक करता था । जब कोई निर्णायक कदम देश हित में नहीं होता था तब पहले विरोध किया जाता था। यहां तक कि जब सरकार द्वारा कोई कदम ऐसा उठाया जाता था जो राष्ट्र के अनुकूल फल देने वाला हो तो विपक्षी तहे दिल से स्वागत करते थे। परंतु अभी ऐसा नहीं है । ( विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है )चाहे पक्ष का नेता हो या कि विपक्ष का फिलहाल सब का उद्देश्य मात्र विरोध करना या आलोचना करना होता है । काम अच्छा हो तो भी विरोध और काम बुरा हो तो भी विरोध हो रहा है । यानी अब के नेता को विरोध ही करना है और इसके अलावा कुछ नहीं करना है । कोई एक नेता जाति धर्म या कोई अन्य राजनीतिक शिगूफा छोड़ देता है बाद में सारे नेता ऐसे हो हल्ला मचाते हैं कि व्यक्त करना ही मुश्किल है ।

आपने देखा होगा कि एक कौवे के मरने पर सारे कौवा कांव-कांव करते हैं । ठीक वैसे ही नेता करते हैं। मीडिया के मंच के सामने ताज्जुब की बात तो यह है कि देश में कोई अच्छा कार्य हो जाता है तो भी प्रतिस्पर्धी नेता तारीफ करने की बजाय विरोध ही करते हैं । अच्छाइयों में भी बुराइयां ऐसे ढूंढ लेते हैं जैसे कोई सूक्ष्मदर्शी से सूक्ष्म जीवाणु को ढूंढता है । खैर सलाम है ऐसे होनहार नेताओं को आखिरकार लोकतंत्र इन्हीं जैसे लोगों के कंधे पर बैठ कर ही तो जय हो जय हो किए जा रहा है । पर थोड़ा सा बेशर्मी का आवरण अपने ऊपर से हटाकर अच्छे कर्मों की भी तारीफ कर देते तो क्या चला जाता है ? यही ना आप के प्रतिस्पर्धी की जय हो हो जाएगी । तो क्यों ना होगी उसकी जय हो ? यदि उसने देश हित में अच्छा कार्य किया है तो तारीफ होना ही होना है और आप जो विरोध और आलोचना की लाठी मीडिया में सीना तान के भाज रहे हैं यह घटिया है जब तक कि आप अपने विरोधियों के अच्छे कामों की तारीफ नहीं कर लेते । वैसे भी आप नेता सिर्फ इसलिए नहीं है कि खाली विरोध में आलोचना करेंगे । ( विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है ) देश में कुछ भी अच्छा होने पर नेताओं का काम उसकी सराहना करना भी होता है ना कि खाली विरोध और आलोचना करना।

  अच्छा एक बात पर हमने खूब गौर किया है । आप चुनाव जीत गए पर आप की पार्टी सत्ता में नहीं आई तो आप अपने आप को दायित्व मुक्त पेश करने लगते हैं जनता के सामने । परंतु आपका यह काम भी निहायत शर्मनाक है । आप चुनाव जीत गए तो इसका मतलब यह थोड़ी है कि आप दिल्ली में बैठकर विपक्ष की भूमिका निभाते हुए खाली आलोचना करते रहेंगे। आप जिस क्षेत्र से सांसद बन के आए हैं उस क्षेत्र का क्या? वहां का शुद्ध कौन लेगा ? क्या वहां सब कुछ ठीक-ठाक है ? गरीब बेवा पीड़ित दलित क्या सब सुखी हैं आपके क्षेत्र में ? हकीकत लाकर आपके सामने रख दो तो मुंह का नक्शा बदल जाएगा।

  हम तो अदना कलम चलाने वाले आदमी और क्या कहें आपके तारीफ में ? आलोचना कीजिए गलती निकालिए  यही तो लोकतंत्र है । ( विपक्ष का काम खाली आलोचना करना ही तो नहीं होता है ) आप जैसों से ही तो लोकतंत्र जिंदा है देश में । यह बात अलग है कि आप जैसे नेताओं ने ऐसे देश को लूटा कि हम से बाद में आजाद होने वाला चाइना आज हमसे बहुत आगे हैं और भारत वही का वही है । आजादी के बाद से आप लोगों ने ठोककर सुलाया है देश की जनता को । परंतु राजनीति में इतना भी मत उछलीए कि हम जैसों को आपके सामने आईने रख कर बोलना पड़े की नेता जी जरा अपना मुंह देख लीजिए । सही को सही और गलत को गलत बोलने का माद्दा रखिए बाकी क्या कहूं? लोकतंत्र जिंदाबाद!

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