Home Hindi poetry 7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

0
SHARE

7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

 

 

7 hindi poems

 

 

7 hindi poems

 

 

( 1 ) कब तक भागोगे कठिनाइयों से

कहां तक भागोगे कठिनाइयों से?
जो नाता जीवन और सांस में है ,
हृदय और एहसास में है ,
तुम और तुम्हारे परछाई में है ,
उससे कहीं गहरा नाता है
कठिनाइयों से मनुष्य का।

गर्भ में पलने और जन्म लेने की कठिनाई
फिर चलने दौड़ने व
इस उम्मीदो से भरी दुनिया में
बुलंदियों की अंतरिक्ष में
अतृप्त गोते लगाते रहने की कठिनाई ।

कहां तक भागोगे कठिनाइयों से,
बोलो ना !
कहां तक ?
जब इससे भागने का मतलब ही
जीवन से भागना है,
विमुख होना है,
जीवन की तासीर को नकार देना है ।

अनुभव की सड़क पर दृष्टिपात करते हुए
बहुत से ऐसे आदमी मिले
उन्नत खिलाड़ी होकर दर्शकों में बैठे हुए
श्रेष्ठ कलाकार होकर
अन्य की कलाओं का आनंद लेते हुए
तब लगा कि कहीं यह सभी वे
कठिनाइयों से भागे लोग तो नहीं ?

आखिर,
मृत्यु से भागने वाले को मृत्यु आती है,
ना भागने वालों को भी आती है
किंतु जीवन के बाद आती है।

सूरज, चांद बदली देख नहीं भागते
पृथ्वी की चाल समंदर की लहरों से नहीं डगमगाती
और मरुस्थल के पौधे ताप से भयभीत नहीं होते
क्योंकि,
इनको जीवन और कठिनाइयों का संबंध पता है।
यह जानते हैं कि
कठिनाइयों से भागा नहीं जा सकता
सिर्फ लड़ा जा सकता है ।

पैरों में साहस भी है
उम्मीद भी है
संघर्ष भी है
किंतु कठिनाई भी है
क्या तुम चल सकोगे ?
क्योंकि जीवन की वैतरणी पार करने का
यही सुनहरा माध्यम है
अन्यथा भागने का मतलब तो
जीवन का दुरुपयोग है ।

वैसे यह कठिनाइयां भागने कहा देती हैं
अपने आप से दूर हमको ।
सदा दामन से चिपक के रहती है
जैसे
अपनी ही कोख से जन्मा हुआ बच्चा
हमेशा लिपटा हुआ रहता है दामन से।

7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

( 2 )सरकारें बदलेगी

सरकारे बदलेंगी
क्योंकि बदलते रहना सरकारों की प्रकृति है
और साथ में आएंगे हमारे अच्छे दिन ।

क्यों भोली जनता नहीं समझती ?
किस्मत सरकार से नहीं
बल्कि अपने कर्म से बदलती है ।
आपके अच्छे दिन के निर्माता
आप स्वयं होंगे
कोई और नहीं
इस बात पर गर्व करो ।

सरकार तुम्हारा भाग्य तय करेगी
इसमें गर्व के लिए कुछ नहीं बचता ।

किसान कल भी मर रहे थे,
किसान अब भी मर रहे हैं ।
नेताजी कल भी कह रहे थे
और आज भी कह रहे हैं
मैं आऊंगा
तो किसानों के अच्छे दिन आएंगे ।

नेताओं!
तुम्हारी यह
टोपी बदल बदल कर पहनने की आदत
भगवान कसम !
गिरगिट से भी शातिर
रंग बदलने वाला
बहुरूपिया जैसा है।

( 3 ) तुम्हारे अवकाश के बाद

मेरे जिंदगी से तेरी अवकाश के बाद भी
जी रहा हूं जिंदगी,

हां किसी और ने
भर दिया है तुम्हारा खाली स्थान ,
कहता है
तेरी बातों के जितने मिठास वाली बातें,
मुस्कुराकर तृप्त कर देता है
तुम्हारे ही जैसी मुस्कान,
छूकर सीहरा देता है
तुम्हारी कोमल सी उंगलियों के स्पर्श जैसा,
रूठता है
मनाता है
अठखेलियां करता है
मगर सिर्फ मेरे लिए ही जीता है
और मेरे लिए ही मरता है ।

कि तुम्हारे अवकाश में
तुम जैसा सब कुछ है मेरे पास
सिर्फ तुम ही नहीं हो
मेरे पास तुम्हारी यादों के सिवा।

7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

( 4 ) अंधेरे में दीप उजाले की

अंधेरे में दीप उजाले की ,
अब चलो जलाने चलते हैं।

जो है राहों में अटके भटके ,
उन्हें राह दिखाने चलते हैं ।

बहुत हुआ अपना-अपना,
अब फर्ज निभाने चलते हैं।

तेरा मेरा का भेद भुलाकर,
चलो मुल्क बनाने चलते हैं।

गंगा जैसी पावन नदियां,
मन में भी बहाने चलते हैं ।

दिखे जहां भी प्रेम सरोवर,
अब चलो नहाने चलते हैं ।

मझधार में उबता है दिल ,
अब चलो मुहाने चलते हैं।

ये नफरत की ध्वनियां छोड़ो ,
मृदु  गीत  सुनाने  चलते  हैं।

( 5 ) वह डूबना भी नहीं चाहते हैं

वह डूबना भी नहीं चाहते हैं
पर डूबने का मजा चाहते हैं

उन्हें  कह देना चाहिए सबसे
वे मोहब्बत की सजा चाहते हैं

बारूद और चिंगारी हाथ में लेकर
अपनी जिंदगी की दीफा चाहते हैं

जिनकी आंखों में रोशनी ना रही
वे भी आशियां में समा चाहते हैं

कभी हमसे भी पूछा करो जानू
कि हम आपसे क्या चाहते हैं

पास होता हूं तो कुछ कहते नहीं
दूर  होता  हूं तो बड़ा  चाहते हैं

बड़े नादान है मरीज ए इश्क वाले
देखो दिल्लगी  की  दवा  चाहते हैं

हम भी तिनके की तरह उड़ जाए
बस किसी सिम्त की हवा चाहते हैं

ऐसी वैसी कुछ ख्वाहिश नहीं है
हम  चाहते हैं तो बड़ा  चाहते हैं

न जाने क्यों घर से दफा करके
लोग मां बाप की दुआ चाहते हैं

7 hindi poems by poet sanjay kumar maurya

( 6 ) आज की हरकत से बचपन की नादानी अच्छी है

आज की हरकत से बचपन की नादानी अच्छी है
चलो लौट  चलें फिर  से वह  बचकानी  अच्छी है

मैंने देखा ऐसी कूलर पंखा पंखी का जलवा फिर
तो जाना कि टूटी खटिये की मच्छरदानी अच्छी है

उम्र ढली  तो देखा  मैंने  बढ़ी हुई बंधन की छाया
इससे तो मां-बाप के साए की मनमानी अच्छी है

जब फूटा करम तो  जेल  गए  बापूजी  रहने को
भक्त कहे प्रवृति  छोड़ो,  बापू की बानी अच्छी है

दहलीज पे है चौकीदारी खिड़की पे शीशे का पर्दा
अब चोरी पकड़े जाने से अपनी नाकामी अच्छी है

वह मुझ पे मरती  जीती  है,प्यार  बहुत  करती है
उसकी गलियों में चर्चा है कि वह दीवानी अच्छी है

मैं जब भी लौट के ऑफिस से घर पर जाता हूं तो
उनसे मिलकर  लगता  है कि  जिंदगानी  अच्छी है

जब जीत गए नेताजी तो खा गए जनता का पैसा
लगता है ऐसी बेशर्मी से तो आंख में पानी अच्छी है

( 7 ) मंदिरों मस्जिदों के झगड़े तमाम है

मंदिरों और मस्जिदों के झगड़े तमाम है
क्योंकि हर शख्स मजहब का गुलाम  है

आपने तो कहा था कि खुशी आएगी साहब
लो हमने दे दिया आपके हाथों में निजाम है

आलू से सोना , पकौड़ी से रोजी नहीं मिलते
पर नेताजी कहें हैं तो  इसके भी  इमकान है

अब तो धर्म गुरु ही इब्लीस हो गए हैं यहां पर
बहका रहे मंदिरों में साधु , मस्जिदों में इमाम हैं

गरीबों को नंगा मत कहो बड़ी इज्जतदार है ये
नंगे तो   वे लोग  हैं जिनके  घरों  में हमाम  हैं

लगता  है  देश  मजहब – मजहब   में  टूटेगा
इस वास्ते अब हमें दुश्मनों का  क्या  काम है

भोजपुरी भाषा देश विदेश में सबसे तेजी से समृद्ध हो रही भारतीय भाषा है

How is the development of Bhojpuri language and its status in Hindi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here