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Biography of Chandrashekhar Azad चंद्रशेखर आज़ाद की जीवनी

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Biography of Chandrashekhar Azad चंद्रशेखर आज़ाद की जीवनी

Biography of Chandrashekhar Azad

चंद्रशेखर आज़ाद की जीवनी ( Biography of Chandrashekhar Azad ) :-  आप सभी ने साहसी स्वतंत्रता सेनानी और एक निडर क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आज़ाद का नाम तो सुना ही होगा। वो एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। काकोरी ट्रेन डकैती (1926) और लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए लाहौर में सांडर्स की हत्या भी चन्द्र शेखर आज़ाद (Biography of Chandrashekhar Azad) ने की थी। वो बहुत से क्रन्तिकारी के लिए एक मिशाल थे। इनका जन्म 1906 में हुआ था। चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह के सलाहकार थे और साथ ही एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे।

चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म और प्रारंभिक जीवन

चंद्रशेखर आज़ाद जी का जन्म 23 जुलाई 1906 को उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के एक गाँव बदर में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी था जो तत्कालीन अलीराजपुर की रियासत में काम करते है और इनकी माता का नाम जगरानी था। चंद्रशेखर आजाद का बचपन अपने गाँव में ही व्यतीत हुआ इसके बाद इनकी (Biography of Chandrashekhar Azad) माता ने इनको पढने के लिये बनारस के कशी विद्यापीठ मे भेजा दिया जहां इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूरा किया।

चंद्रशेखर आज़ाद का क्रन्तिकारी जीवन

चंद्रशेखर आजाद के क्रन्तिकारी जीवन की शुरुआत भी जलियांवाला बाग हत्याकांड की वजह से ही हुई क्यूंकि इस हत्याकांड का उनके जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा और इसके बाद उन्होंने देश को आज़ाद कराने की ठान ली। जब 1921 में गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की तब भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद ने इस आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। तब चंद्रशेखर आज़ाद एक
क्रन्तिकारी आन्दोलन में पकड़े गये.

तब मजिस्ट्रेट ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम आज़ाद बताया था और फिर उनको सिर्फ 15 साल की उम्र में पहली बाद सजा मिली जिसमे उन्हें 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। लेकिन सबसे अलग बात ये थे कि जब चंद्रशेखर आज़ाद (Biography of Chandrashekhar Azad) को कोड़ा मारा जाता था तो वो हर कोड़े के लगने पर “भारत माता की जय” बोल रहे थे और तभी से
उनको “आज़ाद” की उपाधि दे दी गई थी। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई कि वो अब कभी ब्रिटिश सरकार के हांथो गिरफ्तार नही होगें।

फिर जब चौरी-चौरा घटना में ब्रिटिश पुलिसकर्मीयो को जिन्दा जला दिया गया था इस घटना से आहत होकर गाँधी जी ने आन्दोलन वापस ले लिया जिससे चंद्रशेखर आज़ाद को बहुत निराशा हुई और फिर वो आक्रामक और क्रन्तिकारी आदर्शो की ओर आकर्षित हुए और अपने साथी और सहयोगियों के साथ मिलकर ब्रिटिश अधिकारीयों को मरना शुरू कर दिया। चंद्रशेखर आजाद (Biography of Chandrashekhar Azad) ने 1926 में वायसराय की ट्रेन को उड़ाने का प्रयास किया और साथ ही उन्होंने 1926 में ही काकोरी नामक जगह पर एक ब्रिटिश ट्रेन को लुट लिया था । जिस घटना को काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है। चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने दुसरे दोस्तों भगत सिंह, सुखदेव, और राजगुरु के साथ मिलकर “हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सभा” का गठन किया।

चंद्रशेखर आज़ाद अपनी क्रन्तिकारी गतिविधियों के चलते ब्रिटिश पुलिस के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुके थे। ब्रिटिश सरकार चंद्रशेखर आज़ाद को जिंदा या मुर्दा पकड़ना चाहती थी और इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उनके ऊपर इनाम भी रखा था। फिर एक दिन 27 फरवरी 1931 को जब चंद्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने सहयोगियों से मिलने गये थे लेकिन उनके किसी जानने
वाले ने पुलिस को इसकी जानकरी दे दी। फिर जब चंद्रशेखर आज़ाद आज़ाद पार्क में पहुचे तो पुलिस ने उस पार्क को चारो तरफ से घेर लिया और उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन वो चंद्रशेखर आज़ाद थे और उन्होंने तीन पुलिस वालो को गोली से मार डाला। लेकिन जब उन्होंने अपने आप को पुलिस से घिरा पाया और बाहर निकलने का कोई रास्ता नही था तो भारत के इस वीर सपूत ने ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए खुद को गोली मार ली।

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