इंसान प्रकृति का जब-जब अतिक्रमण करेगा तब तब उसे पछताना पड़ेगा

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Whenever man transgresses nature, then he will have to repent

 

 

इंसान प्रकृति का जब-जब अतिक्रमण करेगा तब तब उसे पछताना पड़ेगा :-  मनुष्य का इस प्रकृति से नाता सदा ही रहा है और सदा ही रहेगा । दोनों ही एक दूसरे से गहरा संबंध रखते हैं । जब तक मनुष्य प्रकृति से जुड़कर रहता है तथा अतिक्रमण नहीं करता है तब तक वह स्वस्थ रहता है सुखी रहता है और संपन्न रहता है। परंतु जब जब इंसानों ने प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार किया है तब तक प्रकृति ने अपना विकराल और विघटनकारी रूप दिखलाया है इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है।

 दरअसल प्रकृति इंसानों का पालन पोषण करती है । ईश्वर ने इसे हमारे लिए ऐसा बनाया है जो हमारे जीवन के लिए उपयुक्त हो । लेकिन इंसान तो एक अजीब सा ही प्राणी है । मनुष्य जीवन में प्रकृति का इतना महत्व होते हुए भी मनुष्य समझता ही नहीं है और लगातार प्रकृति का संतुलन बिगड़ता चला जाता है।
 प्रकृति ने हमारे लिए जो कुछ भी पैदा किया है वह व्यर्थ नहीं होता है बल्कि हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है। दुनिया में जितने भी जीव वनस्पति तथा कीड़े मकोड़े पाए जाते हैं वह मानव जीवन को चलाए रखने में अपना योगदान देते हैं । ऐसे में पृथ्वी पर जीवन के लिए प्रकृति में शुद्ध हवा, शुद्ध पानी तथा साथ-साथ जीव जंतु वनस्पतियों और अन्य चीजों का संतुलन होना बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। लेकिन हम इंसान हैं कि समझते ही नहीं है लगातार विकास के अंधे दौड़ में प्रकृति का संतुलन बिगड़ तेजा रहे हैं जिसके कारण हमें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।
हम चाहे कितने भी विकास की दौड़ में आगे निकल जाएं लेकिन समय-समय पर प्रकृति हमारी आंखें खोल ही देती है । जब जब प्रकृति मनुष्य को सजा देती है तब तब मनुष्य असहाय हो जाता है। आज कोरोनावायरस के प्रकोप को देखकर तो ऐसा ही लगता है । पूरी दुनिया एक अदृश्य दुश्मन से लड़ रही है और मात भी खा रही है। लेकिन सोचना चाहिए कि क्या यह प्रकृति के असंतुलन का नतीजा तो नहीं है ।
 आज आदमी चाहे जितना भी आगे बढ़ गया हो लेकिन प्रकृति के तांडव से नहीं बच पा रहा है । कहीं बाढ़ से इंसान मर रहा है, कहीं सुनामी से मर रहा है तो कहीं भूकंप से मर रहा है। इंसान ने प्रकृति को इतना असंतुलित कर दिया है कि आज शुद्ध हवा और शुद्ध पानी के लिए भी मोहताज होता जा रहा है । अगर मनुष्य अब भी नहीं संभला तो इससे भी बुरे दिन देखने पड़ सकते हैं।
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