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प्यार मे जोड़ा एक दूसरे ले लिए पागल क्यों हो जाते है

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प्यार मे जोड़ा एक दूसरे ले लिए पागल क्यों हो जाते है :- आज कल हर कोई प्यार मे पागल है जिसके कारण वह दुनिया तक को भूल जाते है। अक्सर प्यार मे पाया गया है की प्रेमीयों को अपने आस पास की दुनिया मे क्या चल रहा है पता ही नही रहता। वह एक दूसरे के ख्याल मे खोये रहते है। उनके दिमाग पूरी तरह प्यार के भावनाओं मे फस जाता है। जिसके कारण उनका दिमाग सिर्फ प्यार के लिए काम करता है। वैज्ञानिकों की रिसर्च के बाद पता चला की प्यार मे दिमाग कैसे काम करता है।

प्यार मे पड़े जोड़े के दिमाग मे फैसले लेना वाला भाग काम करना बंद कर देता है जिसके कारण वह सिर्फ अपनी ही दुनिया मे खो जाते है। अक्सर प्यार मे पड़ा व्यक्ति चाहने वाले व्यक्ति को देखता है तो उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है और दिमाग मे डोपामाइन हार्मोन्स काम करना शुरू कर देते है। जब प्रेमी या प्रेमिका आमने-सामने होते हैं तो दिल की धड़कन बढ़ने, हथेलियों में पसीना आने तथा मुंह सूखने के अनुभव के पीछे यही हार्मोन्स काम करता है।

प्यार क्या है ?

प्यार भावनाओ, अहसास, विश्वास से बनता है जिसमे दो लोगो की पूरी भावना जुड़ी होती है। प्यार एक अहसास है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है बताया नही जा सकता है। प्यार मे परवाह, चिंता, पसंद नापसंद सभी बातों को जोड़ दिया जाता है। किसी के प्रति प्रेम भाव प्रकट होने लगे और उसकी बातों को उसकी यादों के सिलसिलों की शुरुआत हो जाती है।

प्यार कैसे होता है?

जब एक दूसरे के प्रति आकर्षण पैदा होना शुरू हो जाता है तो एक जुनून वाली भावना जन्म लेती है। एक दूसरे को मन और तन से अपना लिया जाता है जिससे अपने साथी की बात सही लगती है। ये आकर्षण तब होता है जब एक दूसरे को आपसी समानता, बाते, पसंद, विचार, साथ रहना, समय बिताना एक दूसरे के बारे मे सोचने से होता है। जब ऐसी चिजे दिमाग मे जन्म ले लेती है तब जोड़ा प्यार मे पड़ जाता है व प्यार की शुरुआत होने लगती है।

प्यार मे जोड़ा एक दूसरे ले लिए पागल क्यों होते है। 

प्यार मे जोड़ा अक्सर पागल इस लिए हो जाता है क्योंकि प्यार के कारण निकलने वाला हार्मोन पूरी तरह से दिमाग पर हावी हो जाता है जिससे प्रेमियों को एक दूसरे का साथ, संभोग जैसी भावना, बार बार मिलने की इच्छा, बाते करते रहने की इच्छा, दिमाग मे एक दूसरे की तस्वीर बनाना जैसी गतिविधिया शुरू हो जाती है।

प्यार मे पड़ा जोड़ा एक बार शारीरिक गतिविधियो मे आने पर बार बार उस गतिविधियो को करने जैसे भावना पैदा करना शुरू कर देता है। जिससे दिमाग पर डोपामाइन हार्मोन पूरी तरह से हावी हो चुका होता है।

डोपामाइन हमारे खुशी, दुख, पीडा, इच्छा, लत आदि अनुभवों से जुडा होता है और इसकी मात्रा में वृद्धि होने पर प्रेम में पडे व्यक्ति की हालत नशेडी जैसी हो जाती है। उसे सिर्फ अपने प्रेमि के अलावा कोई और चीज़ समझ नही आती।

बिना किसी बात के ये हार्मोन काम करना शुरू कर देते है। जिससे प्यार मे पड़ा जोड़ा पागल के तरह इस दुनिया से अलग ही रहता है।

 

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