भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे

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भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे
भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे
भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे :-  इस विषय में कथा है कि जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया और राम सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष के लिए वन में भटक रहे थे तब सीता को रावण धोखे से हर ले गया था । इस अवस्था में राम और लक्ष्मण बन बन भटक रहे थे और प्राणियों से भी सीता जी का पता पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने सीता जी को कहीं भी देखा है ।
तब एक मोर ने कहा कि प्रभु मैं आपको रास्ता बता सकता हूं कि रावण सीता माता को किस दिशा में ले गया है पर मैं आकाश मार्ग से जाऊंगा और आप पैदल तो रास्ता भटक सकते हैं। इसलिए मैं अपना एक एक पंख गिराता हुआ जाऊंगा जिससे आप रास्ता ना भटके और इस तरह मोर ने श्रीराम को रास्ता बताया परंतु अंत में वह मृत्यु को प्राप्त हो गया । क्योंकि मोर के पंख एक विशिष्ट मौसम में अपने आप ही गिरते हैं । अगर इस तरह जानबूझ के पंख गिरा दे तो उसकी मृत्यु हो जाती है।
 तो भगवान श्रीराम ने उस मोर से कहा कि वह इस जन्म में उसके इस उपकार का मूल्य तो नहीं चुका सकते परंतु अगले जन्म में उस मोर के सम्मान में पंख को अपने मुकुट मे धारण करेंगे और इस तरह श्री कृष्ण के रूप में विष्णु ने जब जन्म लिया तो अपने मुकुट में मोर पंख को धारण किया। तो  मित्रों यही कहानी थी जिसके कारण भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख रखते थे।