भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे

0
8
भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे
भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे
भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख क्यों रखते थे :-  इस विषय में कथा है कि जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया और राम सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष के लिए वन में भटक रहे थे तब सीता को रावण धोखे से हर ले गया था । इस अवस्था में राम और लक्ष्मण बन बन भटक रहे थे और प्राणियों से भी सीता जी का पता पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने सीता जी को कहीं भी देखा है ।
तब एक मोर ने कहा कि प्रभु मैं आपको रास्ता बता सकता हूं कि रावण सीता माता को किस दिशा में ले गया है पर मैं आकाश मार्ग से जाऊंगा और आप पैदल तो रास्ता भटक सकते हैं। इसलिए मैं अपना एक एक पंख गिराता हुआ जाऊंगा जिससे आप रास्ता ना भटके और इस तरह मोर ने श्रीराम को रास्ता बताया परंतु अंत में वह मृत्यु को प्राप्त हो गया । क्योंकि मोर के पंख एक विशिष्ट मौसम में अपने आप ही गिरते हैं । अगर इस तरह जानबूझ के पंख गिरा दे तो उसकी मृत्यु हो जाती है।
 तो भगवान श्रीराम ने उस मोर से कहा कि वह इस जन्म में उसके इस उपकार का मूल्य तो नहीं चुका सकते परंतु अगले जन्म में उस मोर के सम्मान में पंख को अपने मुकुट मे धारण करेंगे और इस तरह श्री कृष्ण के रूप में विष्णु ने जब जन्म लिया तो अपने मुकुट में मोर पंख को धारण किया। तो  मित्रों यही कहानी थी जिसके कारण भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट के ऊपर मोर पंख रखते थे।
Previous articleहनुमान अष्टक पढ़ने के क्या लाभ हैं
Next articleभगवान शिव के पुत्री का नाम क्या है आइए जानते हैं 
मेरा नाम "संजय कुमार मौर्य " है और मैं देवरिया ( यूपी ) का रहने वाला हूं । मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर, लेखक, कवि और कथाकार हूं । मैं हिंदी साहित्य में रुचि रखता हूं और हमेशा कविताओं और कहानियों का सृजन करता रहता हूं। इसके अलावा भी हमारे पास बहुत सारी चीजों की जानकारियां है जिसे मैं इस ब्लॉग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करता हूं। दोस्तों हमें अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करना बहुत ही अच्छा लगता है अतः इसी उद्देश्य से हमने सन 2018 जनवरी में www.sitehindi.com को शुरू किया, जो कि आज एक सफल वेबसाइट बन चुका है और निरंतर वेब की दुनिया में उचाईयों की ओर बढ़ रहा है । इसके अलावा मेरा उद्देश्य अपने राष्ट्रभाषा हिंदी की सेवा करना है और इसे जन-जन तक पहुंचाना भी है । अगर मैं अपने इस उद्देश्य में सफल होता हूं तो मैं स्वयं को भाग्यशाली समझूंगा। आप भी हमारे इस ब्लॉग को पढ़े और हमारे इस उद्देश्य को पूरा करने में हमारी सहायता करें । धन्यवाद !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here