राम भक्त शबरी की कथा क्या है आइए जानते हैं

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राम भक्त शबरी की कथा क्या है आइए जानते हैं
 
 
 
 
 
राम भक्त शबरी की कथा क्या है आइए जानते हैं
 
 
 
 
 
 

राम भक्त शबरी की कथा क्या है आइए जानते हैं :-  माता शबरी भील पुत्री थी।  सबरी भील राज की इकलौती पुत्री थी । अगर देखा जाए तो जाति प्रथा के आधार पर वह एक भील जाति में पैदा हुई थी। जिस जाति को उस वक्त निम्न जाति माना जाता था। बचपन से ही सबरी जिज्ञासु दयालु और भक्त थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो उनकी जाति में एक प्रथा थी की शादी में भोज के लिए जानवरों का मांस दिया जाता था। ऐसे में जब उनके विवाह के अवसर पर बहुत सारे जानवरों को इकट्ठा किया गया तो शबरी ने पिता से पूछा कि इतने जानवरों को क्यों इकट्ठा किया गया है। तब उनके पिता ने यह बताए कि इन जानवरों का मांस उनके विवाह में भोज के रूप में दिया जाएगा।

इस बात से दुखी होकर उन्होंने विवाह करने से मना कर दिया था। फिर वह अपने पिता के घर को त्याग कर रात्रि के समय जंगल में चली गई । वह ऋषि-मुनियों का शरण चाहती थी लेकिन निम्न जाति का होने के कारण सभी उनको अछूत कहते थे तथा उनसे घृणा करते थे । ऐसी परिस्थिति में शबरी जंगल में ही रहने लगी और साधु-संतों के लिए राह बुहारने का काम करने लगी। इसके साथ साथ माता शबरी आश्रमों में छुप-छुपकर जलावन के लिए लकड़ी भी रख देती थी।
 सभी ऋषि मुनि सोचने लगे कि आखिर कौन है जो गुप्त रूप से उनकी सेवा कर रहा है। एक दिन सभी ने शबरी को देखा और बहुत बुरा भला कहा। तब ऋषि मतंग वहां पर आए और उन्होंने सबरी को अपनी शिष्य बना लिया और माता शबरी को ऋषि मतंग ने आश्रम में शरण दे दी। बाद में इसका भारी विरोध हुआ। दूसरे ऋषि गण इस बात के लिए सहमत नहीं थे कि किसी निम्न जाति की स्त्री को कोई ऋषि अपनी शिष्य बनाएं। परंतु ऋषि मतंग ने इस विरोध की कोई परवाह नहीं की जिसके कारण ऋषि समाज ने उनका पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया और ऋषि मतंग ने उसे सहर्ष स्वीकार भी कर लिया। तब गुरु की सेवा करते हुए गुरु मतंग ऋषि का जब गोलोक धाम जाने का समय आया तो उन्होंने शबरी माता से कहा कि सबरी तुम यही आश्रम में रहकर भगवान की भक्ति करते हुए इंतजार करो। प्रभु श्री राम एक दिन तुमसे मिलने जरूर आएंगे और तुम्हारा उद्धार करेंगे। उसी दिन से शबरी माता प्रभु श्री राम की राह देखने लगी। रोज वन में जाती और फल लाती व  राह निहारती की प्रभु राम एक दिन आएंगे और मीठे फल खाएंगे । अंततः एक दिन मां शबरी की प्रतीक्षा खत्म हुई भगवान राम और लक्ष्मण वहां पर आए तब शबरी माता ने मीठे फल उनको खिलाएं और तब प्रभु राम ने माता शबरी को नवधा भक्ति की महिमा बताई और शबरी माता का उद्धार हुआ। इस तरह से शबरी माता प्रभु श्री राम की अनन्य भक्त हुई।
 तो मित्रों यहां पर हमने शबरी माता के कथा के बारे में बताया। आपको भी यह लेख पढ़कर पता चल गया होगा कि राम भक्त शबरी की कथा क्या है ।

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